facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल बाद बदली भारत की रक्षा रणनीति, ड्रोन से स्पेस शील्ड तक बड़ा बदलाव

Advertisement

पाकिस्तान के साथ सैन्य टकराव के बाद रक्षा बजट, एयर डिफेंस और ड्रोन युद्ध क्षमता पर बढ़ा फोकस

Last Updated- May 07, 2026 | 9:14 AM IST
Operation Sindoor
Representational Image

पिछले साल 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकवादी हमलों के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का एक साल पूरा होने के बाद भारत में रक्षा से जुड़े विभिन्न स्तरों पर कई अहम बदलाव हुए हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के साथ चार दिनों की सैन्य झड़प से मिले अनुभव देश के रक्षा बजट, सैन्य कार्यक्रमों और सशस्त्र बलों के भीतर संगठनात्मक बदलाव के रूप में झलक रहे हैं।

देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में रक्षा क्षेत्र के लिए बजट आवंटन में पिछले कुछ वर्षों से हो रही कटौती रुक गई है। वित्त वर्ष 2026-2027 में रक्षा क्षेत्र क लिए बजट आवंटन लगभग 2 प्रतिशत बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026 में यह आंकड़ा 6.81 लाख करोड़ रुपये रहा था। रक्षा क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिस्सा वित्त वर्ष 2020 में 2.25 प्रतिशत से घट कर वित्त वर्ष 2025 में 1.91 प्रतिशत हो गया जो वित्त वर्ष 2025-2026 में भी बरकरार रहा। जीडीपी के प्रतिशत के रूप में वित्त वर्ष 2023-2024 में यह 2 प्रतिशत के अहम स्तर से नीचे फिसलकर 1.97 प्रतिशत रह गया।

इसके अलावा, आवंटित रकम के बेहतर इस्तेमाल के साथ आधुनिकीकरण को भी बढ़ावा मिला जिसका नतीजा यह हुआ कि रक्षा सेवाओं पर पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2025-2026 के अनुमानित बजट (1.86 लाख करोड़ रुपये) की तुलना में 17.62 प्रतिशत और अनुमानित बजट (1.80 लाख करोड़ रुपये) की तुलना में 21.84 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2026-2027 में 2.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह रक्षा मंत्रालय द्वारा कुल आवंटित रकम का 27.96 प्रतिशत है। पूंजी मद के तहत कुल आवंटन में 1.85 लाख करोड़ रुपये सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण बजट के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह रकम वित्त वर्ष 2025-2026 के इसी मद के तहत अनुमानित रकम से लगभग 24 प्रतिशत अधिक है।

पिछले साल 6 और 7 मई की दरमियानी रात भारत की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद पाकिस्तान ने भी देश की पश्चिमी सीमा पर हवाई घुसपैठ तेज कर दी और नागरिक एवं सैन्य दोनों ढांचों को निशाना बनाने का प्रयास किया। इस सैन्य झड़प के दौरान कम से कम तीन ऐसी बातें देखने को मिलीं जो बिल्कुल नई थीं। सबसे पहले तो भारत ने हवा से पाकिस्तान पर क्रूज मिसाइलें दागीं। दूसरी बात यह कि पाकिस्तान ने भी पारंपरिक हथियारों से लैस छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया और तीसरी बात यह कि दोनों ही देशों ने एक दूसरे के खिलाफ ड्रोन का इस्तेमाल किया।

भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी के मंसूबों और प्रयासों को पूरी तरह विफल कर दिया। एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली में तीनों सेनाओं के संसाधनों को शामिल किया गया है, हालांकि इसकी पूरी जिम्मेदारी भारतीय वायु सेना के हाथ में है। जब दोनों देशों के बीच 10 मई की शाम संघर्ष विराम का ऐलान हुआ तो तब तक भारतीय उपमहाद्वीप बिना एक दूसरे की सीमा में घुसे दूर से ही हमले करने के अभियान से वाकिफ हो चुका था। यानी भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही सैनिकों को एक दूसरे की सीमा में भेजे बिना ही मिसाइलों और ड्रोन प्रणाली का इस्तेमाल किया। भारत ने इस घटना से सीख लेते हुए मिशन ‘सुदर्शन चक्र’ के तहत एक अंतरिक्ष रक्षा कवच स्थापित करने का प्रयास शुरू किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष अपने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधन में इसका ऐलान किया था।

रक्षा सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि सुदर्शन चक्र परियोजना की जांच और कार्य योजना तैयार करने के लिए गठित समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट पेश कर दी है। इस मिशन के तहत देश के राष्ट्रीय सुरक्षा कवच का 2035 तक विस्तार किया जाना है ताकि रणनीतिक और नागरिक दोनों महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की व्यापक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसे दो चरणों में लागू करने की बात चल रही है। अगले पांच वर्षों के लिए एक मध्यम अवधि की कार्य योजना और 10 वर्षों तक चलने वाली एक दीर्घकालिक कार्य योजना पर अमल करने का प्रस्ताव है।

पिछले एक वर्ष में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यह तकनीक अब सेना की टुकड़ी के स्तर तक पहुंच चुकी है जिसने ‘ईगल-इन-द-आर्म’ अवधारणा को अपनाया है। इसके तहत प्रत्येक सैनिक को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है और यह ठीक उसी तरह जैसे उन्हें उनकी सेवा में इस्तेमाल होने वाले हथियार या अन्य उपकरण चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
मानवरहित प्रणालियों के प्रसार का प्रभाव सशस्त्र बलों के भीतर चल रहे संगठनात्मक बदलाव में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मार्च में सरकार द्वारा जारी वर्ष 2047 के ‘दृष्टिकोण पत्र’ में चार नए विशिष्ट त्रि-सेवा संगठनों के गठन की रूप-रेखा का जिक्र है। इनमें एक रक्षा भू-स्थानिक एजेंसी, एक डेटा बल, एक ड्रोन बल और एक संज्ञानात्मक युद्ध कार्रवाई बल शामिल हैं।

संज्ञानात्मक युद्ध यानी दुश्मन की सोच एवं नीति का पता लगाकर उसे बेअसर करने की कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों से ही प्रेरित दिख रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सूचना युद्ध, दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक अभियानों की अहमियत खासी बढ़ गई।
इसी महीने के शुरू में रक्षा प्रमुख (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) जनरल अनिल चौहान ने खुलासा किया कि संज्ञानात्मक युद्ध संगठन की स्थापना के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया जा चुका है और वित्तीय मंजूरी भी हासिल हो गई है।

Advertisement
First Published - May 7, 2026 | 9:14 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement