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देश में 10 साल में 10 लाख से ज्यादा अपहरण के मामले, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

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फिरौती नहीं, जबरन उठाने और शादी के लिए महिलाओं के अपहरण के मामले सबसे ज्यादा; महाराष्ट्र और यूपी शीर्ष पर

Last Updated- May 08, 2026 | 9:18 AM IST
Representational Image

दिल्ली स्थित सिविल सेवा परीक्षा कोचिंग सेंटर की निदेशक शुभ्रा रंजन का 3 मई को भोपाल में बंदूक की नोक पर अपहरण कर लिया गया और 1.89 करोड़ रुपये से अधिक की फिरौती देने के लिए मजबूर किया गया। इस तरह के अपराध का यह अकेला मामला नहीं है। पिछले एक दशक में 10 लाख से अधिक केस अपहरणके सामने आए हैं।

यही नहीं, वर्ष 1953 से 2024 के बीच अपहरण और अगवा करने के 20 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, जो भारतीय दंड संहिता (अब भारतीय न्याय संहिता) के तहत दर्ज कुल मामलों का लगभग 1.7 प्रतिशत है। कुल मामलों में से 54 प्रतिशत 2013 से 2024 के बीच सामने आए हैं। इस अवधि में केवल 0.7 प्रतिशत मामले ही फिरौती से जुड़े हैं। वर्ष 1953-62 के दशक के बाद से अपहरण के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। आईपीसी मामलों में इनकी हिस्सेदारी 1973-82 के दशक से बढ़ रही है।

आंकड़ों के अनुसार अपहरण के मामलों में फिरौती बड़ी वजह नहीं रही है। सबसे अधिक मामले लोगों को जबरन उठाने यानी अपहरण से जुड़े हैं, जो कुल मामलों के आधे से भी ज्यादा हैं। इसके बाद शादी के लिए महिलाओं के अपहरण के मामले आते हैं, जबकि फिरौती के लिए अपहरण या अगवा करने के मामलों की हिस्सेदारी इनमें बहुत कम है। अपहरण के मामलों में शीर्ष छह राज्यों में से बिहार 2024 में सबसे नीचे रहा। पिछले कुछ वर्षों में यह राज्य महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद तीसरे नंबर पर रहा है।

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First Published - May 8, 2026 | 9:18 AM IST

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