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भारत के निजी बंदरगाहों का प्रदर्शन बेहतर, कांडला पोर्ट ने खो दिया सबसे ज्यादा कार्गो संचालन का तमगा

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अधिकारियों का विश्वास है कि बंदरगाहों के सामान लदान की क्षमता पर कुछ असर गैर बासमती चावल पर प्रतिबंध लगाने की नीतियों का भी पड़ा। इसका असर निजी बंदरगाहों पर भी पड़ा।

Last Updated- May 02, 2024 | 10:13 PM IST
Adani ports
Representative Image

भारत के निजी बंदरगाहों का केंद्र सरकार के बंदरगाहों से बेहतर प्रदर्शन कायम रहा। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार 2023-24 (वित्त वर्ष 24) में भारत के निजी बंदरगाहों ने दो अंकों में वृद्धि दर्ज की जबकि सरकारी स्वामित्व वाले प्रमुख बंदरगाहों ने 4.45 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की।

गैर प्रमुख बंदरगाहों ने बीते वित्त वर्ष में सालाना आधार पर 11.18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर 72.1 करोड़ टन सामान भेजा जबकि प्रमुख बंदरगाहों ने वित्त वर्ष 24 में 81.8 करोड़ टन वस्तुओें को भेजा।

केंद्र सरकार पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के जरिये इन प्रमुख बंदरगाहों का संचालन करती है जबकि गैर प्रमुख बंदरगाह का स्वामित्व राज्य सरकारों और निजी कंपनियों के पास है।

गैर प्रमुख बंदरगाहों में सामान की आवाजाही की वृद्धि प्राथमिक तौर पर तापीय कोयले के कारण हुई। इन बंदरगाहों के सामान लदान करने में तापीय कोयले की हिस्सेदारी सात प्रतिशत है।

गैर प्रमुख बंदरगाहों से बीते वित्त वर्ष में तापीय कोयले का लदान 5.1 करोड़ टन से बढ़कर 5.3 करोड़ टन हो गया। वित्त वर्ष 23 में लौह अयस्क में नरमी रही थी लेकिन इसकी मात्रा में वित्त वर्ष 24 में 44 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

प्रमुख बंदरगाहों की वृद्धि मुख्य तौर पर कच्चे तेल (5.05 प्रतिशत), तापीय कोयले (बढ़कर 4.72 प्रतिशत) और लौह अयस्क (28 प्रतिशत) में हुई।

हालांकि गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के अंतर्गत निजी बंदरगाहों ने संयुक्त रूप से 7.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जबकि दीनदयाल बंदरगाह (कांडला) का ट्रैफिक संचालन 4.2 प्रतिशत कम होकर 13.1 करोड़ टन हो गया। दीनदयाल बंदरगाह से विदेशी सामान भेजने में करीब 5 प्रतिशत गिरावट आने के कारण इसके ट्रैफिक संचालन पर असर पड़ा।

अधिकारियों का विश्वास है कि बंदरगाहों के सामान लदान की क्षमता पर कुछ असर गैर बासमती चावल पर प्रतिबंध लगाने की नीतियों का भी पड़ा। इसका असर निजी बंदरगाहों पर भी पड़ा। गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के तहत प्रमुख निजी बंदरगाह मुंद्रा पोर्ट, पीपावाव और हजीरा आते हैं।

भारत के प्रमुख बंदरगाह कांडला पोर्ट ने सर्वाधिक कार्गो संचालन का तमगा खो दिया। इसका कारण यह है कि ओडीशा के पारादीप बंदरगाह ने 14.5 करोड़ टन कार्गो का संचालन किया जबकि कांडला बंदरगाह 13.1 करोड़ टन कार्गो का ही संचालन कर पाया।

दूसरी तरफ, निजी क्षेत्र में अदाणी पोर्ट ऐंड स्पेशल इकनॉमिक जोन के गुरुवार को जनवरी-मार्च और वित्त वर्ष 23 के संयुक्त घोषित परिणामों के अनुसार कार्गो में 24 प्रतिशत और राजस्व में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

कंपनी ने 41.9 करोड़ टन कार्गो भेजकर वित्त वर्ष 24 का समापन किया। कंपनी ने गोपालपुर बंदरगाह के अधिग्रहण के बाद 2025 तक कार्गो बढ़कर 50 करोड़ टन होने का अनुमान जताया।

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First Published - May 2, 2024 | 10:13 PM IST

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