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Petrol pump license: पेट्रोल पंप खोलना होगा आसान? सरकार ने बनाई विशेषज्ञों की टीम – जानें पूरी बात

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ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ईंधन को ध्यान में रखकर 2019 के नियमों की समीक्षा, विदेशी कंपनियों की बढ़ी रुचि

Last Updated- August 11, 2025 | 11:36 AM IST
Petrol Pump

भारत में तेजी से बढ़ते पेट्रोल-डीजल के बाजार को देखते हुए सरकार पेट्रोल पंप खोलने के नियम और आसान करने की योजना बना रही है। सरकार का कहना है कि नए नियम ऊर्जा सुरक्षा और प्रदूषण कम करने के लक्ष्यों के हिसाब से बनाए जाएंगे। इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया है।

2019 में ढीले हुए थे नियम

साल 2019 में सरकार ने पेट्रोल पंप खोलने के नियम बदल दिए थे, जिससे गैर-तेल कंपनियों को भी इस कारोबार में आने का मौका मिला। तब शर्त रखी गई थी कि जिन कंपनियों की नेटवर्थ कम से कम ₹250 करोड़ है, वे पेट्रोल-डीजल बेच सकती हैं। लेकिन उन्हें शुरू करने के तीन साल के भीतर सीएनजी, एलएनजी, बायोफ्यूल या ईवी चार्जिंग जैसी वैकल्पिक ईंधन सुविधा भी लगानी होगी। अगर कंपनी खुदरा (रिटेल) और थोक (बल्क) दोनों में पेट्रोल-डीजल बेचना चाहती है, तो उसकी नेटवर्थ ₹500 करोड़ होनी चाहिए।

नई गाइडलाइंस पर विचार

अब मंत्रालय ने 2019 के नियमों की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई है। यह देखेगी कि पुराने नियम कितने असरदार रहे और उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार कैसे बदला जा सकता है। यह समिति पूर्व बीपीसीएल मार्केटिंग डायरेक्टर सुक्खमल जैन की अगुवाई में बनी है। बाकी सदस्य हैं – पीपीएसी के डायरेक्टर जनरल पी मनोज कुमार, एफआईपीआई के पीएस रवि और मंत्रालय के मार्केटिंग डायरेक्टर अरुण कुमार। सरकार ने 6 अगस्त को नोटिस जारी कर लोगों और कंपनियों से 14 दिन के अंदर अपने सुझाव देने को कहा है।

यह भी पढ़ें: बायोमास परियोजनाओं की सब्सिडी में देरी खत्म करने की तैयारी, मॉनसून के बाद बकाया सब्सिडी देगा मंत्रालय

2019 से पहले के सख्त नियम

2019 से पहले पेट्रोल पंप खोलने का लाइसेंस पाना बहुत मुश्किल था, क्योंकि सरकार ने इसके लिए बहुत सख्त शर्तें रखी थीं। उस समय कोई भी कंपनी तभी पेट्रोल पंप खोल सकती थी, जब वह कम से कम ₹2000 करोड़ का निवेश तेल-गैस की खोज, रिफाइनरी बनाने, पाइपलाइन बिछाने या एलएनजी टर्मिनल जैसे बड़े प्रोजेक्ट में करे। इस वजह से सिर्फ बड़ी और अमीर तेल कंपनियां ही पेट्रोल पंप के कारोबार में आ पाती थीं। लेकिन साल 2019 में सरकार ने यह नियम आसान कर दिया। नए नियमों के तहत अब कंपनी की नेटवर्थ सिर्फ ₹250 करोड़ होनी चाहिए और लाइसेंस मिलने के बाद उसे कम से कम 100 पेट्रोल पंप खोलने होंगे। इनमें से 5% पंप ग्रामीण इलाकों में लगाना अनिवार्य होगा और यह काम 5 साल के भीतर पूरा करना होगा। इस बदलाव से छोटी और नई कंपनियों के लिए भी पेट्रोल पंप के बिजनेस में आने का रास्ता खुल गया।

विदेशी कंपनियों की नजर

भारत के ईंधन बाजार में कई विदेशी कंपनियां आना चाहती हैं। फ्रांस की टोटलएनर्जीज़ ने अदाणी ग्रुप के साथ 1500 पंप खोलने का आवेदन दिया था। ब्रिटेन की बीपी ने रिलायंस के साथ साझेदारी की है। प्यूमा एनर्जी और सऊदी अरामको भी भारतीय बाजार में दिलचस्पी दिखा चुकी हैं।

भारत में पेट्रोल पंप की स्थिति

अभी देश में कुल 97,804 पेट्रोल पंप हैं। इनमें ज्यादातर इंडियन ऑयल (40,666), बीपीसीएल (23,959) और एचपीसीएल (23,901) के हैं। निजी कंपनियों में रिलायंस-बीपी के 1,991, नायरा एनर्जी के 6,763 और शेल के 355 पंप हैं।

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First Published - August 11, 2025 | 11:36 AM IST

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