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‘विपक्ष ने की भ्रूणहत्या’, महिला आरक्षण बिल फेल होने पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर बरसे PM मोदी

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बीते शुक्रवार को लोकसभा में बहुमत न मिलने से महिला आरक्षण बिल गिर गया था। पीएम मोदी ने इसे विपक्ष की "स्वार्थी राजनीति" और नारी शक्ति का अपमान करार दिया है

Last Updated- April 18, 2026 | 9:14 PM IST
Narendra Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी | फाइल फोटो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश को संबोधित करते हुए विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। मौका था संसद में ‘महिला आरक्षण बिल’ के गिरने के बाद उपजे राजनीतिक घमासान का। पीएम मोदी ने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी (सपा) को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इन दलों ने अपनी “स्वार्थी राजनीति” की वजह से देश की करोड़ों महिलाओं का हक छीना है। उन्होंने इस घटनाक्रम को नारी शक्ति के खिलाफ एक बड़ा अपराध करार दिया।

विपक्ष के ‘जश्न’ पर पीएम का कड़ा प्रहार

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उस पल का जिक्र किया जब सदन में बिल गिर गया। उन्होंने कहा कि यह देखना बेहद दर्दनाक था कि जब महिलाओं के हित वाला प्रस्ताव बहुमत न मिलने के कारण हार गया, तो कांग्रेस, डीएमके, सपा और टीएमसी जैसी पार्टियों के नेता मेज थपथपाकर खुशियां मना रहे थे।

पीएम ने कहा, “वे सिर्फ मेज नहीं थपथपा रहे थे, बल्कि देश की महिलाओं के सम्मान और स्वाभिमान पर चोट कर रहे थे।” उन्होंने विपक्षी दलों पर हमला जारी रखते हुए कहा कि इन पार्टियों ने इस ईमानदार कोशिश की ‘भ्रूणहत्या’ कर दी है और वे संविधान व नारी शक्ति के अपराधी हैं।

Also Read: PM मोदी बोले: महिला आरक्षण बिल पास नहीं करा पाया, देश की महिलाओं से माफी मांगता हूं

संसद में क्या हुआ और क्यों गिरा बिल?

शुक्रवार को संसद में 131वां संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया गया था। इस बिल का उद्देश्य 2029 से विधायिकाओं में महिलाओं को आरक्षण देना और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना था। हालांकि, संविधान में संशोधन के लिए जिस ‘विशेष बहुमत’ (दो-तिहाई) की जरूरत होती है, सरकार वह आंकड़ा नहीं जुटा पाई।

मतदान के दौरान कुल 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 298 ने बिल के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट किया। बिल को पास कराने के लिए कम से कम 352 वोटों की जरूरत थी। बिल के गिरते ही सरकार ने स्पीकर ओम बिरला से दो अन्य प्रस्तावित कानूनों पर भी आगे न बढ़ने का अनुरोध किया।

40 साल का इंतजार और 2029 का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि महिलाओं को अधिकार देने वाला यह संशोधन पिछले 40 साल से लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन’ 21वीं सदी की भारतीय महिलाओं को नए अवसर देने और उनके रास्ते की बाधाएं हटाने के लिए एक ‘महायज्ञ’ की तरह था। सरकार की योजना थी कि इसके जरिए उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम समेत सभी क्षेत्रों में महिलाओं का समान सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जाए। पीएम ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी से कुछ छीनने के लिए नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका हक देने के लिए लाया गया था।

प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि 21वीं सदी की महिलाएं अब चुप नहीं हैं। वे हर घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं और विपक्ष की मंशा को बखूबी समझ रही हैं। उन्होंने कहा कि जिन दलों ने महिलाओं का अधिकार छीना है, उन्हें जनता और समय की सजा जरूर मिलेगी, क्योंकि उन्होंने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का अपमान किया है। पीएम ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार की नीयत साफ थी, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने मिलकर इस पवित्र प्रयास को रोक दिया।

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First Published - April 18, 2026 | 9:13 PM IST

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