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डाकघर बनेगा आपका दफ्तर, ई-कॉमर्स डिलीवरी से लेकर रियल एस्टेट तक फोकस

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150 साल पुरानी ऐतिहासिक डाक सेवा इंडिया पोस्ट अब चलन कम होने के साथ ही अपना वजूद बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है

Last Updated- June 10, 2026 | 11:12 PM IST
नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, ​शिलॉन्ग में हाल में एन-जेन इंडिया पोस्ट ऑफिस का उद्घाटन किया गया। फोटो: डाक विभाग
नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, ​शिलॉन्ग में हाल में एन-जेन इंडिया पोस्ट ऑफिस का उद्घाटन किया गया। फोटो: डाक विभाग

हो सकता है कि आने वाले समय में आपका शानदार को-वर्किंग स्पेस आपके पड़ोस का डाकघर हो। वही डाकघर जिसे आप केवल टिकट बेचने की जगह समझते थे। दरअसल इंडिया पोस्ट ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए व्यापक बदलाव की योजनाएं बनाई है जिसमें यह भी शामिल है। 150 साल पुरानी ऐतिहासिक डाक सेवा इंडिया पोस्ट अब चलन कम होने के साथ ही अपना वजूद बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।

तत्काल पहुंचने वाले ईमेल और तेज कोरियर सेवाओं के कारण इंडिया पोस्ट की सेवाएं हाशिए पर धकेल दी गई हैं। मगर डाक विभाग उसे अब एक नया स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है। इसी क्रम में उसकी विशाल रियल एस्टेट संप​त्तियों का नए सिरे से इस्तेमाल करने पर भी विचार किया जा रहा है।

अन्य योजनाओं में 24 घंटे की डिलिवरी सेवाओं के साथ लेट-लतीफ वाली अपनी पहचान को खत्म करना, एमेजॉन एवं फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए दूरदराज के इलाकों तक डिफॉल्ट डिलिवरी सेवा प्रदाता बनना, डाकघरों को उपयोगकर्ताओं के अनुकूल बनाने के लिए नवीनीकरण करना, पार्सल सेवा को यूपीएस एवं फेडएक्स जैसी वैश्विक कोरियर सेवाओं के बराबर लाना, अपने करीब 4.5 लाख कर्मचारियों को जवाबदेह बनाना और मुनाफा कमाने वाला सार्वजनिक उपक्रम बनना शामिल है।

संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी इस बदलाव की दैनिक आधार पर निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘सार्वजनिक उपक्रमों को भी निजी कंपनी की तरह बदला जा सकता है और हम ऐसा कर रहे हैं।’

इंडिया पोस्ट के पास 1.2 करोड़ वर्ग मीटर की रियल एस्टेट संप​​त्ति है। इसमें 1,460 खाली पड़े भूखंड हैं जो कुल मिलाकर करीब 22 लाख वर्ग मीटर जगह में हैं। मगर इन परिसंपत्तियों के बाजार मूल्य या राजस्व क्षमता को निर्धारित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने पिछले साल अगस्त में इसका उल्लेख किया था।

मगर अब डाक विभाग ने नए सिरे से रणनीति तैयार करने के लिए सलाहकारों की नियु​क्ति के लिए निविदाएं जारी की हैं। साथ ही नेटवर्क लॉजिस्टिक्स के आधुनिकीकरण के साथ-साथ डाकघरों के नवीनीकरण के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल से रकम मांगी जा रही है। कई डाकघर विश्वविद्यालयों के परिसरों में मौजूद हैं जिन्हें जेनज़ी पोस्ट ऑफिस कहा जाता है। ऐसे डाकघरों ने कैफे जैसी सजावट और वाई-फाई की उपलब्धता सहित एक नया स्वरूप पहले ही हासिल कर लिया है।

मंत्री ने कहा, ‘हम पट्टे के जरिये कमाई करने और रियल एस्टेट प्रबंधन के लिए कई योजनाओं पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल हम यह आकलन कर रहे हैं कि क्या डाकघरों की इमारतों में कुछ और मंजिल जोड़े जा सकते हैं, उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं और खाली पड़ी जमीनों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।’

रियल एस्टेट प्रबंधन उन सुधारों का हिस्सा है जो इस दृष्टिकोण से प्रेरित हैं कि डाक, पार्सल सेवाओं, बचत खातों, जीवन बीमा और नागरिक सेवाओं तक फैले अपने विशाल नेटवर्क के साथ इंडिया पोस्ट एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स एवं संचार कंपनी के रूप में उभरने की क्षमता रखती है।

इंडिया पोस्ट को मुनाफे की ओर ले जाने के लिए शुरुआती कदम उठाए गए हैं। इसके तहत वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2030 तक पोस्टल नेटवर्क के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सिस्टम को आधुनिक बनाने पर 5,786 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसमें इंटेलिजेंट प्लेटफॉर्म बनाना और परस्पर जुड़ी हुई एवं एकीकृत डाक व वित्तीय सेवाएं देना शामिल है। राजस्व को वित्त वर्ष 2026 में 2,100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2027 में 4,000 करोड़ रुपये के पार पहुंचाने और आ​खिरकार न नफा न नुकसान वाली ​स्थिति में पहुंचने का लक्ष्य है। इंडिया पोस्ट का मौजूदा खर्च पेंशन सहित 36,000 करोड़ रुपये है।

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First Published - June 10, 2026 | 11:07 PM IST

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