Private defense players- Atmanirbhar Bharat drive: सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति और घरेलू रक्षा खरीद को बढ़ावा मिलने से निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों का कारोबार चालू वित्त वर्ष में बढ़ने की उम्मीद है। मांग बढ़ने के कारण कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश भी बढ़ा रही हैं। सरकार का लक्ष्य देश की रक्षा जरूरतों का 75 प्रतिशत सामान घरेलू कंपनियों से खरीदना है। इसी वजह से निजी कंपनियां अब कम जटिल और कम मुनाफे वाले निर्यात ऑर्डरों की बजाय देश में ही उच्च तकनीक वाले रक्षा उपकरण बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। हालांकि, बड़े और जटिल ऑर्डरों में गुणवत्ता जांच और मंजूरी की प्रक्रिया लंबी होने के कारण कंपनियों का पैसा ज्यादा समय तक फंसा रहता है, जिससे कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ रही है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक आत्मनिर्भर भारत नीति और घरेलू रक्षा खरीद को बढ़ावा मिलने से निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों का कारोबार चालू वित्त वर्ष में 15-16 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। पिछले वित्त वर्ष में भी इन कंपनियों की वृद्धि इसी स्तर पर रही थी। इनके पास लगभग 50,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं, जिससे आगे भी अच्छी वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक जयश्री नंदकुमार ने कहा कि ‘हम उम्मीद करते हैं कि इन कंपनियों का राजस्व इस वित्त वर्ष में 15-16 प्रतिशत बढ़कर लगभग 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
क्रिसिल रेटिंग्स ने 24 निजी रक्षा कंपनियों का अध्ययन किया है, जो देश के निजी रक्षा उद्योग की कुल आय का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं। पिछले पांच वर्षों में इन कंपनियों की आय में औसतन 26 प्रतिशत सालाना वृद्धि हुई है। इसमें रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं की बड़ी भूमिका रही है। इनमें आईडेक्स (iDEX), पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड और डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (DcPP) जैसी योजनाएं शामिल हैं।
क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पहले ये कंपनियां मुख्य रूप से विदेशी कंपनियों की ऑफसेट जरूरतों को पूरा करने या पुर्जों की आपूर्ति करती थीं, लेकिन अब वे पूरे रक्षा सिस्टम तैयार करने का काम कर रही हैं। अब इन्हें इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, रॉकेट वारहेड, ड्रोन, हवाई बम प्रणाली, रडार, उपग्रह और निगरानी प्लेटफॉर्म जैसे उन्नत क्षेत्रों में ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे इनके मुनाफे में सुधार हुआ है। चालू वित्त वर्ष में इनका परिचालन लाभ मार्जिन 18-19 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के बराबर है और वित्त वर्ष 2020 की तुलना में करीब 4 प्रतिशत अधिक है।
क्रिसिल के मुताबिक मांग बढ़ने के कारण निजी रक्षा कंपनियां कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश (कैपेक्स) भी बढ़ा रही हैं। उच्च मूल्य वाले ऑर्डरों को पूरा करने के लिए कंपनियां इस वित्त वर्ष में 1,500-1,600 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करेंगी, जबकि पिछले वर्ष यह करीब 1,000 करोड़ रुपये था। इसके अलावा उन्हें 1,600-1,800 करोड़ रुपये अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की भी जरूरत होगी।
क्रिसिल रेटिंग्स की एसोसिएट डायरेक्टर पल्लवी सिंह ने कहा कि निरंतर मजबूत नकदी प्रवाह के अलावा निजी रक्षा कंपनियों के बैलेंस शीट को वित्त वर्ष 2022 से 2025 के बीच लगभग 3,900 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश से फायदा हुआ है। इसलिए निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर रहने की उम्मीद है, क्योंकि उनकी कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत है। इसका प्रमाण इस बात से मिलता है कि इस वित्त वर्ष में इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 4.3-4.5 गुना और डेट टू एबिटा रेशियो 2.2-2.3 गुना है।
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रक्षा परियोजनाओं में समय पर परीक्षण और मंजूरी मिलना परियोजनाओं को कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर उच्च मार्जिन वाले सिस्टम इंटीग्रेशन ऑर्डरों में जहां 5-6 महीने तक की देरी हो सकती है। क्रिसिल के आकलन के अनुसार यदि किसी परियोजना के क्रियान्वयन में छह महीने की देरी होती है, तो कंपनियों का वर्किंग कैपिटल चक्र सामान्य स्थिति के 240-250 दिनों की तुलना में 35-40 दिन और बढ़ सकता है यानी कंपनियों का पैसा अधिक समय तक फंसा रहेगा और उन्हें अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ सकती है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (डीआरडीओ) की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर व्यवस्था निजी कंपनियों को जरूरी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे वे निर्धारित गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप उत्पाद बना सकें। लेकिन कंपनियों के लिए तय समय पर आपूर्ति करना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा। इसके अलावा रक्षा खरीद नीतियों में बदलाव या महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति में रुकावट जैसे जोखिमों पर भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।