पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के कारण ऊर्जा आपूर्ति में पैदा हुआ व्यवधान धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। देश में रसोई गैस (एलपीजी) की मांग सामान्य स्तर पर लौट रही है और घरेलू आपूर्ति काफी बढ़ गई है। दूसरी ओर सरकार ने पूरे देश में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आपूर्ति ढांचे को मजबूती और विस्तार के लिए बड़े स्तर पर पहल शुरू की है, ताकि सड़क मार्ग पर निर्भरता कम हो जाए तथा ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने कहा कि इस पहल के तहत रिफाइनरियों और आयात टर्मिनलों को बॉटलिंग संयंत्रों से पाइपलाइन के जरिये जोड़ा जाएगा, जिससे थोक भंडारण टैंकरों से होने वाले परिवहन की जगह अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और ठोस प्रणाली विकसित की जा सके।
पीएनजीआरबी ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए नौ पाइपलाइन परियोजनाओं की पहचान की गई है और फिलहाल करीब 2,500 किलोमीटर लंबाई वाली चार प्रमुख परियोजनाओं- चेरलापल्ली-नागपुर, शिकरापुर-हुबली-गोवा, पारादीप-रायपुर और झांसी-सितारगंज के लिए निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इन परियोजनाओं पर लगभग 12,500 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पीएनजीआरबी ने कहा कि वर्ष 2030 तक एलपीजी के बड़े पैमाने पर सड़क मार्ग से परिवहन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का लक्ष्य है।
कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले पेट्रोरसायन उत्पादों का इस्तेमाल एलपीजी उत्पादन में करने जैसे कदमों से घरेलू एलपीजी उत्पादन में 40-50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इससे घरों तक गैस आपूर्ति की स्थिति में सुधार हुआ है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने संवाददाताओं को बताया कि वर्तमान में हर रोज सिलिंडर बुकिंग 46 से 50 लाख के बीच हो रही है। उन्होंने कहा, ’16 अप्रैल को करीब 50 लाख सिलिंडर उपभोक्ताओं के घर तक पहुंचाए गए।’ इसके अलावा, वाणिज्यिक गैस की आपूर्ति भी अब संकट-पूर्व स्तर के करीब 70 प्रतिशत तक बहाल हो चुकी है।
(साथ में एजेंसियां)