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रूस की भारत में आर्कटिक कैटेगरी के जहाज बनाने में रुचि, भारतीय शिपयार्ड के साथ सहयोग की तलाश रहा संभावना

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रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने कहा, 'आर्कटिक-श्रेणी के जहाजों का संयुक्त उत्पादन उद्यम सहयोग का आशाजनक क्षेत्र बन सकता है।'

Last Updated- December 04, 2025 | 11:20 PM IST
Vladimir Putin

रूस ध्रुवीय-श्रेणी के जहाजों के निर्माण के लिए भारतीय शिपयार्ड के साथ सहयोग करने की संभावना तलाश रहा है। इससे भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने कहा, ‘आर्कटिक-श्रेणी के जहाजों का संयुक्त उत्पादन उद्यम सहयोग का आशाजनक क्षेत्र बन सकता है।’

मंटुरोव ने रूसी सरकार के स्वामित्व वाले मीडिया हाउस स्पूतनिक इंडिया को बताया कि भारत के बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के साथ बातचीत चल रही है। यह कदम भारत-रूस समुद्री मार्गों के माध्यम से व्यापार बढ़ाने के मद्देनजर भी महत्त्वपूर्ण है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और व्लादिवोस्तोक को चेन्नई से जोड़ने वाला पूर्वी समुद्री गलियारा शामिल है। उन्होंने कहा कि रूस और भारत एक ठोस यूरेशियाई परिवहन ढांचा स्थापित करना चाहते हैं।

ध्रुवीय-श्रेणी के जहाज विशेष रूप से बर्फीले ध्रुवीय जल में सुरक्षित रूप से चलाने के लिए होते हैं। आर्कटिक और अंटार्कटिक जैसे दुर्गम क्षेत्रों में काम करने के लिए ऐसे जहाज अपनी मजबूत संरचना, उन्नत तकनीक और बर्फ तोड़ने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। रूस इस तकनीक में अग्रणी देशों में गिना जाता है। ये जहाज टोही, अनुसंधान और उच्च-लक्जरी अभियानों में इस्तेमाल किए जाते हैं। भारत उत्तरी सागर मार्ग पर भी चर्चा में शामिल रहा है।

अतीत में आर्कटिक बर्फ पिघलने से रूस के उत्तरी तट से शिपिंग मार्गों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं। यही नहीं, उत्तरी रूस में काम करने वाले भारतीय कार्गो में वृद्धि हुई है। जहाजरानी मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि भारत-रूस संयुक्त कार्य समूह जहाज निर्माण प्रस्ताव पर शुरुआती दौर की बातचीत में शामिल रहा है। इसमें रूसी परिवहन और लॉजिस्टिक्स समूह डेलो ग्रुप संयुक्त उद्यम के माध्यम से भारत में काम करने में रुचि दिखाने वाले समूहों में शामिल है।

अधिकारी ने नाम नहीं छापने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘इस मामले पर पिछली भारत-रूस संयुक्त कार्य समूह की बैठक में चर्चा की गई थी। इस सिलसिले में अभी बातचीत बहुत शुरुआती दौर में है, लेकिन इस क्षेत्र में कार्यरत कंपनियां सहयोग के लिए व्यक्तिगत रूप से निजी शिपयार्ड से संपर्क कर सकती हैं।’

अभी जहाजरानी मंत्रालय को सरकार के स्वामित्व वाले शिपयार्ड के साथ संयुक्त उद्यम में काम करने के लिए कोई ठोस प्रस्ताव नहीं मिला है। कोचीन शिपयार्ड भारत के सबसे बड़े यार्डों में से एक है, जो जहाज निर्माण के शुरुआती प्रयासों का हिस्सा रहा है। इस साल की शुरू में इसने फ्रांसीसी कंपनी सीएमए सीजीएम से छह दोहरे ईंधन वाले कंटेनर जहाजों के लिए आशय पत्र प्राप्त किया।

इसी वर्ष जून में सरकारी स्वामित्व वाली कोलकाता स्थित गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स ऐंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और नॉर्वे के कोंग्सबर्ग ओस्लो ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इससे भारत के लिए स्वदेशी रूप से पहला ध्रुवीय अनुसंधान पोत बनाने का रास्ता साफ हुआ। इस समय भारत और रूस ने चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच पूर्वी गलियारा शुरू कर दिया है। अधिकारी ने कहा, ‘इस मार्ग पर प्रमुख वस्तुएं मुख्य रूप से कच्चा तेल और कोकिंग कोयला रही हैं। कार्गो बेस का विस्तार करने के लिए बातचीत चल रही है।’

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First Published - December 4, 2025 | 11:11 PM IST

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