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Electoral Bonds: चुनावी बॉन्ड से जुड़ी पूरी जानकारी देने से SBI ने फिर किया इनकार

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Electoral Bonds: RTI के तहत चुनावी बॉन्ड की बिक्री और भुनाने से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, जिसे देने से SBI ने इनकार कर दिया है।

Last Updated- May 21, 2024 | 5:15 PM IST
SBI

चुनावी बॉन्ड की बिक्री और भुनाने से जुड़ी जानकारी को लेकर सूचना के अधिकार कानून (RTI) के तहत दायर पहली अपील के जवाब में, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक बार फिर से इनकार कर दिया है। दरअसल, RTI के तहत चुनावी बॉन्ड की बिक्री और भुनाने से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, जिसे देने से SBI ने इनकार कर दिया है।

SBI ने “commercial confidence” का हवाला देते हुए कहा कि यह जानकारी “बैंक की बौद्धिक संपदा” है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये आंतरिक दिशानिर्देश केवल बैंक कर्मचारियों के लिए हैं जिन्हें सीधे चुनावी बॉन्ड से जुड़ा काम करना होता है।

सूचना पारदर्शिता की पैरवी करने वालीं अधिवक्ता अंजलि भारद्वाज ने 4 मार्च को एक आवेदन दायर कर चुनावी बॉन्ड से जुड़ी कार्यप्रणाली (Standard Operating Procedures – SOPs) की जानकारी मांगी थी।

ये जानकारी एसबीआई द्वारा अप्रैल 2017 से लागू दिशानिर्देशों से जुड़ी थी। लेकिन, 30 मार्च को बैंक ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया। इसके बाद, भारद्वाज मामले को एसबीआई के प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (FAA) के पास ले गईं।

17 मई को FAA से मिले जवाब से असंतुष्ट होकर, भारद्वाज ने अब केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) में इस इनकार को चुनौती देने का फैसला किया है। 17 मई के अपने आदेश में, FAA ने कहा है कि “मांगी गई जानकारी बैंक के व्यावसायिक गोपनीयता के अंतर्गत आती है और इसलिए प्रदान नहीं की जा सकती है।

साथ ही, ये आंतरिक दिशानिर्देश केवल बैंक कर्मचारियों के लिए हैं और यह जानकारी बैंक की बौद्धिक संपदा भी है, इसलिए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(d) के तहत इसे देने से इनकार किया गया है।”

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(d) में बताया गया है कि “कोई भी जानकारी, व्यापारिक गोपनीयता, व्यापारिक रहस्य या बौद्धिक संपदा जिसको उजागर करने से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को नुकसान पहुंचेगा, उसे तब तक नहीं दिया जा सकता जब तक कि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो जाए कि बड़े सार्वजनिक हित के लिए ऐसी जानकारी का खुलासा किया जाना जरूरी है।”

अंजलि भारद्वाज का कहना है कि चुनावी बॉन्ड से जुड़ी कार्यप्रणाली (SOPs) की मांग इसलिए की गई थी क्योंकि उन्हें इस बात को लेकर चिंता थी कि SBI इन बॉन्ड्स से जुड़े लेन-देन का डेटा कैसे मैनेज करता है। चिंता इस बात को लेकर थी कि कहीं SBI खरीदने और भुनाने वाले दोनों पक्षों के लिए यूनिक नंबर रिकॉर्ड तो नहीं कर रहा है, जिससे बॉन्ड की ट्रैकिंग हो सके।

उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि “सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देने और सभी ई-बॉन्ड्स की जानकारी उजागर करने का आदेश देने के बाद भी, एसबीआई महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाए हुए है।”

अंजलि भारद्वाज का कहना है कि प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (FAA) यह बताने में नाकाम रहा है कि कैसे कार्यप्रणाली (SOPs) को उजागर करने से ‘किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को नुकसान’ पहुंचेगा।

उन्होंने यह भी नहीं बताया है कि वह तीसरा पक्ष कौन है। साथ ही, FAA ने इस मामले में जनहित को भी नहीं आंका है और उन्होंने इनकार को सही ठहराने के लिए सिर्फ इतना कहा है कि ये दिशानिर्देश आंतरिक दिशानिर्देश हैं, जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम में ऐसा कोई छूट का प्रावधान नहीं है।

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First Published - May 21, 2024 | 5:15 PM IST

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