facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

2020 Delhi riots case: उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत से इंकार

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया और एक साल तक नई जमानत याचिका पर रोक लगा दी।

Last Updated- January 05, 2026 | 3:04 PM IST
Umar Khalid
Representative Image

2020 Delhi riots case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, UAPA के तहत आरोप लगाने के लिए पर्याप्त प्रारंभिक सबूत मौजूद हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “प्रोसेक्यूशन सामग्री से उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रारंभिक आरोप स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। इस स्तर पर उन्हें जमानत देना न्यायसंगत नहीं है।”

अन्य आरोपियों को मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने मामले के अन्य आरोपियों जैसे गुलफिशा फातिमा, मीरान हाइडर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी। अदालत ने उन्हें कई शर्तों के पालन के निर्देश दिए और कहा कि यदि शर्तों का उल्लंघन होता है, तो ट्रायल कोर्ट जमानत रद्द कर सकता है।

एक साल तक नई जमानत याचिका नहीं

अदालत ने स्पष्ट किया कि उमर खालिद और शरजील इमाम अगले एक साल तक नई जमानत याचिका नहीं दायर कर सकते। अदालत ने कहा, “सुरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या इस आदेश की एक साल की अवधि समाप्त होने के बाद ये आरोपी जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।”

UAPA की सख्ती पर जोर

अदालत ने UAPA को विशेष कानून बताते हुए कहा कि इसके तहत जमानत की प्रक्रिया आम कानून से अलग है। अदालत ने कहा, “धारा 43D(5) UAPA जमानत देने के सामान्य प्रावधानों से अलग है, लेकिन यह न्यायिक समीक्षा को समाप्त नहीं करता और न ही स्वतः जमानत देने से इंकार करता है।”

हर याचिका का अलग मूल्यांकन जरूरी

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां कई आरोपी शामिल हैं, हर याचिका को उसके अपने मामलों के आधार पर देखा जाना चाहिए। अदालत ने कहा, “उमर खालिद और शरजील इमाम अन्य आरोपियों की तुलना में अलग प्रकार की भूमिका में हैं और उनके मामलों का अलग मूल्यांकन आवश्यक है।”

मामले की पृष्ठभूमि

2020 के दिल्ली दंगे फरवरी में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान भड़क उठे थे, जिसमें 53 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि खालिद, इमाम और अन्य आरोपी इस हिंसा की बड़ी साजिश में शामिल थे। उन्हें भारतीय दंड संहिता और UAPA की कई धाराओं के तहत आरोपित किया गया। उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था।

Advertisement
First Published - January 5, 2026 | 3:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement