facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

राज्यों ने कम उठाया केंद्र से धन, मुहैया कराई गई थी 1 लाख करोड़ रुपये की रकम

Advertisement
Last Updated- May 04, 2023 | 10:53 PM IST
Rs.2000 note

केंद्र सरकार ने पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2022-23) में राज्यों की व्यय जरूरतों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये दीर्घावधि ऋण मुहैया कराया था, जिसमें से राज्यों ने सिर्फ 82,000 करोड़ रुपये लिए हैं और बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक 18,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नहीं हो पाया है।

अधिकारियों ने कहा कि इसकी एक वजह यह है कि तमाम राज्यों की पूंजी केंद्रित, लंबी अवधि वाली परियोजाओं को लागू करने की क्षमता नहीं है, जैसा कि केंद्र सरकार करती है। बड़े राज्यों में पश्चिम बंगाल सबसे पीछे है और उत्तर प्रदेश पूरी राशि के उपयोग में सक्षम नहीं है। इनमें उत्तर पूर्व के राज्य भी शामिल हैं।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘वित्त वर्ष 23 के संशोधित अनुमान में हमने 1 लाख करोड़ रुपये में से 78,000 करोड़ रुपये जारी किए जाने का अनुमान लगाया था। 31 मार्च 2023 तक राज्यों ने 82,000 करोड़ रुपये लिए हैं।’ अधिकारी ने कहा, ‘कई राज्यों ने अपने पूंजीगत व्यय ऋण की राशि का पूरा इस्तेमाल नहीं किया है, जो उन्हें उपलब्ध थी। पश्चिम बंगाल ने सिर्फ 1 किस्त ली है।’

कई अन्य राज्य अपने आवंटन का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि वित्त वर्ष 24 में स्थिति बेहतर होगी।

केंद्र सरकार राज्यों के पूंजीगत व्यय की जरूरतों को पूरा करने के लिए 50 साल का ब्याज रहित ऋण मुहैया करा रही है। वित्त वर्ष 23 के लिए यह राशि 1 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 24 के लिए1.3 लाख करोड़ रुपये है। यह धनराशि केंद्र सरकार के अपने पूंजीगत व्यय लक्ष्य का हिस्सा है।

पिछले साल 1 लाख करोड़ रुपये में से 80,000 करोड़ रुपये ज्यादातर बगैर शर्त था। वहीं 20,000 करोड़ रुपये पीएम गतिशक्ति, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, शहरी क्षेत्र सुधार और डिजिटल इंडिया पहल के तहत फाइबर ऑप्टिक्स केबल बिछाने से जुड़े पूंजीगत व्यय के लिए था।

राज्यों को 80,000 करोड़ रुपये उसी फॉर्मूले से दिया गया है, जिसके तहत वे विभाजन वाले कर में हिस्सा पाते हैं। राज्यों को कर बंटवारा 15वें वित्त आयोग की सिफारिश के मुताबिक होता है। इस तरह से ज्यादा धनराशि उत्तर प्रदेश (17.9 प्रतिशत) और उसके बाद बिहार (10 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (7.8 प्रतिशत) पश्चिम बंगाल (7.5 प्रतिशत), महाराष्ट्र (6.3 प्रतिशत) और राजस्थान (6 प्रतिशत) को मिला है। यह योजना राज्यों में बहुत लोकप्रिय रही है और ज्यादातर राज्यो ने अपने लिए निर्धारित पूरी राशि ली है। वित्त वर्ष 24 में केंद्र ने पूंजीगत समर्थन को लेकर शर्तें और बढ़ा दी हैं।

Advertisement
First Published - May 4, 2023 | 10:53 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement