facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने को संवैधानिक रूप से वैध ठहराने संबंधी अर्जी ठुकराई

Advertisement

पीठ ने कहा, ‘‘यह अदालत केंद्र सरकार के किसी कृत्य की संवैधानिक वैधता के संबंध में घोषणा नहीं कर सकती है

Last Updated- August 21, 2023 | 4:49 PM IST
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने को संवैधानिक रूप से वैध घोषित करने संबंधी याचिका सोमवार को खारिज कर दी।

चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को ‘भ्रामक’ करार देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने की संवैधानिक वैधता का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष पहले ही विचाराधीन है। पीठ में न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।

पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा, ‘‘यह किस तरह की याचिका है? आप अब इस अदालत से यह घोषणा चाहते हैं कि अनुच्छेद 370 को निरस्त किया जाना वैध है। हमें आपकी याचिका पर घोषणा क्यों करनी चाहिए? आपके मुवक्किल को किसने खड़ा किया है।’’

न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 370(1) और अनुच्छेद 35-ए को रद्द किए जाने को संवैधानिक रूप से वैध घोषित करने का अनुरोध किया गया है। पीठ ने कहा, ‘‘यह अदालत केंद्र सरकार के किसी कृत्य की संवैधानिक वैधता के संबंध में घोषणा नहीं कर सकती है। वैसे भी संवैधानिक वैधता का मुद्दा संवैधानिक पीठ के समक्ष लंबित है।’’

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘मौजूदा याचिका भ्रामक है और इसे खारिज किया जाता है।’’ अनुच्छेद 35-ए को 1954 के राष्ट्रपति आदेश के जरिये संविधान में शामिल किया गया था, जो जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को विशेष अधिकार देता था और तत्कालीन राज्य में बाहर के लोगों को कोई अचल संपत्ति खरीदने से रोकता था। यह अनुच्छेद राज्य की उस महिला को संपत्ति अधिकार से भी वंचित करता था जो राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति से शादी करती थी।

केंद्र ने पांच अगस्त, 2019 को पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा खत्म करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभक्त करने का निर्णय लिया था। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने तथा जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को 2019 में पांच सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दिया गया था। इन याचिकाओं में पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किये जाने को भी चुनौती दी गई है।

Advertisement
First Published - August 21, 2023 | 4:49 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement