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महिला वकीलों को 30% आरक्षण मिलेगा? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

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केंद्र, राज्य सरकारों और पीएसयू के कानूनी पैनलों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग

Last Updated- May 21, 2026 | 9:28 AM IST
Supreme Court

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को सरकारी पैनल और विधि अधिकारी पदों में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली के पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह की दलीलों पर गौर किया और लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किए।

इस जनहित याचिका में केंद्र, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को सर्वोच्च अदालत के पैनल से लेकर स्थानीय कानूनी सहायता प्राधिकरणों तक, सभी कानूनी स्तरों पर महिलाओं के लिए न्यूनतम 30 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

अदालत की कार्रवाई शुरू होने पर सिंह ने कहा कि एससीबीए ने कानूनी पेशे में महिला वकीलों की स्थिति और प्रतिनिधित्व पर एक सर्वेक्षण किया और उसके बाद जनहित याचिका दायर की गई है। वरिष्ठ वकील ने कहा, ‘उन्हें सरकारी पैनलों में शामिल किया जाना आवश्यक है।’

प्रधान न्यायाधीश ने मंगलवार को कहा कि तेलंगाना बार एसोसिएशन के कुछ प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की और उन्हें यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि वहां एक महिला वकील को सचिव नियुक्त किया गया है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा ‘ वह मुझे धन्यवाद दे रही थीं। मैंने बार की कुल संख्या के बारे में पूछा… यह 19,000 है। लगभग 8,000 (वकील) नियमित रूप से आते हैं, जिनमें से 2,000 महिलाएं हैं। अब केवल एक महिला सदस्य नियुक्त की गई है।’

 

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First Published - May 21, 2026 | 9:28 AM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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