सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि देश में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की कोई कमी नहीं है। इस समय एक महीने की एलपीजी आपूर्ति की व्यवस्था है। इसके अलावा और गैस खरीदने का भी इंतजाम किया जा रहा है। केंद्र ने यह भी कहा कि घरेलू रिफाइनरियों में उत्पादन 40 फीसदी तक बढ़ाया गया है, जिससे एलपीजी का दैनिक उत्पादन बढ़कर 50,000 टन हो गया है। यह रोजाना की कुल जरूरत का 60 फीसदी से भी अधिक है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘शुद्ध दैनिक आयात की आवश्यकता घटकर केवल 30,000 टन रह गई है। इसका मतलब है कि भारत अब आयात की जाने वाली मात्रा से कहीं अधिक गैस का उत्पादन कर रहा है। घरेलू उत्पादन के अलावा अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से भी 80,000 टन एलपीजी कार्गो सुरक्षित कर लिया गया है। यह देश में आ रहा है, जो अभी रास्ते में है।’
मंत्रालय ने कहा कि लगभग एक महीने की आपूर्ति की पुख्ता व्यवस्था है और अतिरिक्त खरीद भी लगातार की जा रही है। तेल कंपनियां हर दिन 50 लाख से अधिक सिलिंडर की आपूर्ति कर रही हैं।
उपभोक्ताओं द्वारा घबराहट की गई बुकिंग के कारण एलपीजी सिलिंडरों की मांग बढ़कर 89 लाख हो गई थी जो अब घटकर फिर से 50 लाख रह गई है। जमाखोरी या कालाबाजारी से बचने के लिए वाणिज्यिक सिलिंडरों का आवंटन बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के बारे में गलत सूचना फैलाई जा रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि देश में केवल छह दिन का स्टॉक उपलब्ध है। मंत्रालय ने कहा, ‘भारत के पास कुल 74 दिनों की आरक्षित क्षमता है और फिलहाल वास्तविक स्टॉक कवर लगभग 60 दिन का है, जिसमें कच्चे तेल का स्टॉक, उत्पाद स्टॉक और समर्पित रणनीतिक भंडारण शामिल है।’
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्थिति चाहे जो हो, भारतीय नागरिकों के लिए लगभग दो महीने की स्थिर आपूर्ति उपलब्ध है। अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद सुरक्षित कर ली गई है और भारत अगले कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है।
मंत्रालय ने कहा, ‘ऐसी आपूर्ति स्थिति में रणनीतिक भंडारण में मात्रा गौण हो जाती है।’ सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट संकट के बावजूद भारत को आज दुनिया भर में अपने 41 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं से पहले की तुलना में अधिक कच्चा तेल प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध उच्च मात्रा किसी भी व्यवधान की भरपाई से कहीं अधिक है। भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिन के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली है।’ मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत वर्तमान में 150 से अधिक देशों को शोधित ईंधन की आपूर्ति कर रहा है। देश में तेल की कोई कमी नहीं है और किसी भी पट्रोल पंप को आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए नहीं कहा गया है।
मंत्रालय ने कहा, ‘तेल कंपनियों ने पंप मालिकों के कार्यशील पूंजी के मुद्दों का समाधान करते हुए उनकी क्रेडिट 1 दिन से बढ़ाकर 3 दिन से अधिक करने का निर्णय किया है ताकि किसी भी पंप पर पेट्रोल-डीजल की कमी न हो।’पश्चिम एशिया संकट पर एक अलग बयान में पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि 540 भारतीय नाविकों के साथ 20 भारतीय-ध्वजवाहक पोत पश्चिमी फारस की खाड़ी में हैं और डीजी शिपिंग, पोत मालिकों, अन्य एजेंसियों तथा भारत के दूतावासों के समन्वय से स्थिति की निगरानी की जा ही है।