Marco Rubio India Visit: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शनिवार को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे। इस दौरे की शुरुआत बेहद खास रही, क्योंकि रुबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस बात की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से पीएम मोदी को जल्द से जल्द व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया है।
तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे भारत-अमेरिका संबंधों को एक बार फिर पटरी पर लाने और उन्हें मजबूत करने के लिहाज से मार्को रुबियो का यह भारत दौरा बेहद जरूरी माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक टैरिफ, ‘ऑपरेशन सिंदूर’, इमिग्रेशन और H-1B वीजा जैसे मुद्दों को लेकर काफी खींचतान देखी गई है। इसके अलावा, हाल ही में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में उपजे संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जिसने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को प्रभावित किया है।
मार्को रुबियो शनिवार को भारत आने के बाद सबसे पहले कोलकाता पहुंचे थे, जहां उन्होंने सेंट टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय ‘मदर हाउस’ का दौरा किया और श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे राजधानी दिल्ली पहुंचे। उनके तय कार्यक्रम के मुताबिक, वे सोमवार को आगरा और जयपुर की यात्रा करेंगे, जिसके बाद मंगलवार को वे दोबारा दिल्ली लौटकर ‘क्वाड’ (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे।
इस दौरे का एक और सबसे बड़ा आकर्षण विदेश मंत्री एस जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत है। न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक निवेश, आपसी तकनीकी सहयोग और दोनों देशों के नागरिकों के बीच रिश्तों को और मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा संकट और उसके चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे असर को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच अहम बातचीत हो सकती है।
असल में यह दौरा भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की वाशिंगटन यात्रा के ठीक एक महीने बाद हो रहा है, जो दोनों देशों के रिश्तों को फिर से सामान्य करने की कोशिशों का हिस्सा है। पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए सैन्य तनाव को लेकर ट्रंप के एक बयान से नई दिल्ली असहज हो गई थी, जहां ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने इस तनाव को कम करने में भूमिका निभाई थी। हालांकि, भारत ने साफ किया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत सीधे हुई थी और इसमें अमेरिका का कोई रोल नहीं था।
इसके बाद वीजा फीस में बढ़ोतरी और अमेरिकी टैरिफ नीतियों की वजह से दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी तल्खी भी देखने को मिली। हालांकि, इस साल की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया था, लेकिन हाल में अमेरिकी अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ फैसलों को अमान्य ठहरा दिया, जिसके बाद इस समझौते के भविष्य को लेकर कुछ सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।