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गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होंगे 12 औद्योगिक गलियारे, ₹47 हजार करोड़ के निवेश की तैयारी

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इस योजना के तहत 594 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है

Last Updated- April 26, 2026 | 7:39 PM IST
Ganga Expressway
फोटो क्रेडिट: X/@upeidaofficial

इसी महीने शुरू हो रहे उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के साथ 12 जिलों में योगी सरकार औद्योगिक गलियारा भी विकसित कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाले 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। योगी सरकार गंगा एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के रूप में विकसित कर रही है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए इसे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) के रूप में डिजाइन किया है।

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की इस योजना के तहत 594 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। अब तक 987 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनके जरिए लगभग ₹47 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है।

Also Read: मेरठ से प्रयागराज अब सिर्फ 6 घंटे दूर! 29 अप्रैल को PM करेंगे 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन

औद्योगिक नोड्स से बनेगा ‘इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट’

औद्योगिक विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि IMLC योजना के तहत पूरे एक्सप्रेसवे कॉरिडोर में 12 जिलों में 12 नोड्स विकसित किए जा रहे हैं। प्रत्येक नोड को उसकी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक संभावनाओं के आधार पर डिजाइन किया गया है, ताकि मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को एकीकृत रूप से बढ़ावा मिल सके। मेरठ से प्रयागराज तक हर नोड का स्थान और क्षेत्र तय कर लिया गया है। इस स्ट्रैटेजिक प्लानिंग से पूरा एक्सप्रेसवे एक ‘इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट’ में बदल जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, योजना को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और अब तक 987 ‘इंटेंट्स ऑफ इन्वेस्टमेंट’ (EOI) प्राप्त हुए हैं, जिनसे ₹46,660 करोड़ के निवेश की संभावना है। यह निवेश मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर में आएगा। एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले IMLC नोड्स माल परिवहन को तेज और सस्ता बनाएंगे, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यह कॉरिडोर 12 जिलों को सीधे जोड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी और हरदोई, उन्नाव, रायबरेली व प्रतापगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में बड़ा इजाफा होगा।

प्रस्तावित नोड्स में मेरठ (10 किमी) पर 529 एकड़, हापुड़ (54 किमी) पर 304 एकड़, बुलंदशहर में 2,798 एकड़ का सबसे बड़ा क्लस्टर, अमरोहा (74 किमी) पर 348 एकड़, संभल (100 किमी) पर 591 एकड़, बदायूं (189 किमी) पर 269 एकड़, शाहजहांपुर (255 किमी) पर 252 एकड़, हरदोई (282 किमी) पर 335 एकड़, उन्नाव (422 किमी) पर 333 एकड़, रायबरेली (517 किमी) पर 232 एकड़, प्रतापगढ़ (555 किमी) पर 263 एकड़ और प्रयागराज (601 किमी) पर 251 एकड़ भूमि को औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित किया जाएगा।

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First Published - April 26, 2026 | 7:32 PM IST

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