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‘स्वामित्व योजना’ के तहत 3 लाख से अधिक गांवों का ड्रोन से हुआ सर्वे, 1.5 लाख गांवों में कार्ड भी वितरित

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सूत्रों ने कहा कि अब तक लक्षित 3.4 लाख गांवों में 3.27 लाख गांवों के ड्रोन सर्वेक्षणों से भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली और स्पष्ट जानकारियां जुटाई गई हैं

Last Updated- January 18, 2026 | 10:54 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार ‘स्वामित्व’ (गांवों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत तकनीक से मानचित्रण) योजना के लिए ड्रोन से जुटाए गई जानकारियों (डेटा) का अधिक से अधिक लाभ लेने की तैयारी कर रही है। स्वामित्व योजना में गैर-पंजीकृत ग्रामीण घरों के लिए कानूनी संपत्ति दस्वावेज (आईडी कार्ड) की गारंटी का प्रावधान है।

सूत्रों ने कहा कि अब तक लक्षित 3.4 लाख गांवों में 3.27 लाख गांवों के ड्रोन सर्वेक्षणों से भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली और स्पष्ट जानकारियां जुटाई गई हैं। इन जानकारियों का इस्तेमाल अब ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था, सड़कों, सीवेज लाइन, बिजली के खंभे आदि नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

स्वामित्व योजना के तहत 1.5 लाख गांवों को संपत्ति आईडी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। स्वामित्व कार्ड तैयार करने की पूरी प्रक्रिया गांवों के ड्रोन सर्वेक्षण से शुरू होती है जो कार्ड वितरित करने से पहले सत्यापन, मानचित्र तैयारी, भौतिक जांच जैसे कई चरणों से गुजरती है।

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन सर्वेक्षण ने 1:500 के रिजॉल्यूशन में डेटा दिया है जो गूगल अर्थ प्रो की तरह है मगर बहुत सटीक है। ड्रोन ने गांवों की 3डी रीडिंग 5 सेंटीमीटर लंबाई और 20 सेंटीमीटर ऊंचाई की सटीक रूप से ली है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,‘वास्तव में अब हम जानते हैं कि उन 3.27 लाख गांवों में किस घर में कच्ची छत है, यह किससे बनी हुई है और क्या वह छत सौर पैनल लगाने लायक है या नहीं आदि।’

उन्होंने कहा कि ड्रोन डेटा का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने हाल ही में एक हैकाथॉन का आयोजन किया था जिसमें भारत के प्रमुख संस्थानों एवं संगठनों की टीमों ने हिस्सा लिया। टीमों ने ऐसे विचार प्रस्तुत किए जिनमें जल प्रवाह प्रारूप का विश्लेषण करने, जलभराव वाले प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करने और एक ठोस जल निकासी व्यवस्था तैयार करने के लिए ड्रोन पॉइंट क्लाउड डेटा का उपयोग कर डिजिटल भूभागीय प्रारूप विकसित करना शामिल था।

इसके अलावा मंत्रालय उपलब्ध भूभागीय मानचित्रों के आधार पर एक नियोजित जल निकासी तंत्र विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के सात गांवों में एक प्रायोगिक परियोजना संचालित करने की योजना बना रहा है।

अवधारणा का प्रमाण आयोजित करने वाली वेंडर एजेंसियों को उच्च-रिजॉल्यूशन वाले भू-स्थानिक और जल मौसम विज्ञान आंकड़े प्रदान किया जाएगा जिसमें भूभागीय और उन्नयन प्रतिरूपण(एलिवेशन मॉडलिंग) के लिए स्वामित्व योजना ड्रोन-आधारित पॉइंट क्लाउड डेटा, सटीक सतह सुविधा व्याख्या के लिए विकृति रहित चित्रण (ऑर्थोमोसैक इमेजरी) और वर्षा प्रारूप का आकलन करने के लिए वर्षा से जुड़े आंकड़े शामिल हैं।

भूभाग, भूमि उपयोग और वर्षा की प्रवृत्ति के एकीकृत विश्लेषण के आधार पर एक ग्राम स्तर का जल निकासी तंत्र प्रस्तावित किया जाएगा और संभावित तालाब स्थानों की पहचान की जाएगी।

भू-स्थानिक विश्लेषण और प्रस्तावित बनावट को प्रमाणित करने के लिए क्षेत्रीय निरीक्षण और मैनुअल सर्वेक्षण  भी किए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि  प्रायोगिक परियोजना यह दर्शाएगी कि  स्वामित्व योजना  के ड्रोन-आधारित भू-स्थानिक डेटा, हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग और क्षेत्रीय सत्यापन को वैज्ञानिक जल निकासी और अन्य योजना को गांव स्तर पर प्रभावी ढंग से समर्थन करने के लिए कैसे एकीकृत किया जा सकता है।

इस पायलट परियोजना के लिए चुने गए गांव उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के पूरे, कुरुहुआ, जयापुर, नागेपुर, बारियार, परम्पुर और खाखरिया हैं।

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First Published - January 18, 2026 | 10:53 PM IST

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