आबकारी राजस्व से साल दर साल खजाना भर रही योगी सरकार के वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत ही धमाकेदार रही है। चालू वित्त वर्ष के पहले ही महीने अप्रैल में प्रदेश में आबकारी राजस्व में 20 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश सरकार का कहना है कि राजस्व में इजाफा बिना शराब बिक्री को प्रोत्साहित किए पारदर्शी व्यवस्था बनाकर और डिजिटल मॉनिटरिंग को बढ़ावा देकर हुआ है।
उत्तर प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि इस साल अप्रैल के महीने में ही पिछले साल के मुकाबले 931 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। अप्रैल 2026 में विभाग को 5251 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि अप्रैल 2025 में यह आंकड़ा 4319.46 करोड़ रुपये था। उनका कहना है कि यह वृद्धि शराब बिक्री को प्रोत्साहित किए बिना पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल मॉनिटरिंग और राजस्व लीकेज रोकने के लिए किए गए सख्त प्रशासनिक सुधारों का प्रत्यक्ष नतीजा है।
अग्रवाल ने बताया कि बीते नौ सालों में उत्तर प्रदेश के आबकारी राजस्व में 4.5 गुना से ज्यादा कि वृद्धि देखी गई है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के समय वित्त वर्ष 20216-17 में 14273 करोड़ रुपये आबकारी राजस्व से खजाने में आ रहे थे जोकि 2025-26 में रिकॉर्ड 57,722 करोड़ रुपये जा पहुंचा है।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2011-12 में प्रदेश को 8,139 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो 2016-17 तक बढ़कर 14,273 करोड़ रुपये पहुंचा। उस समय लक्ष्य के मुकाबले उपलब्धि का प्रतिशत लगातार गिर रहा था और 2016-17 में यह केवल 74.15 प्रतिशत तक सिमट गया था। इससे यह संकेत मिलता था कि तत्कालीन सिस्टम में राजस्व रिसाव, अवैध कारोबार और निगरानी की गंभीर चुनौतियां मौजूद थीं।
आबकारी मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार के गठन के बाद आबकारी विभाग में बड़े स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू किए गए। लाइसेंस प्रक्रिया में ई-टेंडरिंग, आपूर्ति श्रृंखला की डिजिटल ट्रैकिंग, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, बारकोड आधारित निगरानी, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने जैसे कदम उठाए गए।
इसके साथ ही अवैध शराब कारोबार और तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। इन सुधारों का असर जल्द ही राजस्व आंकड़ों में दिखाई देने लगा। वर्ष 2018-19 में पहली बार विभाग ने लक्ष्य से अधिक 104.03 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की और 23,928 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया। इसके बाद राजस्व संग्रह लगातार बढ़ता गया।
आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह वृद्धि ‘सिस्टम करेक्शन मॉडल’ का परिणाम है, जिसमें शराब बिक्री बढ़ाने के बजाय राजस्व लीकेज रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने पर जोर दिया गया। पहले जहां अधिकांश प्रक्रियाएं मैनुअल थीं और मानवीय हस्तक्षेप अधिक था, वहीं अब अधिकांश व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित हो चुकी है। इससे भ्रष्टाचार, अनियमितता और राजस्व हानि में उल्लेखनीय कमी आई है।
आबकारी मंत्री ने कहा कि 2026-27 के शुरुआती आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश आबकारी राजस्व के नए रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है।