उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद में वेतन वृद्धि, बोनस व सुविधाओं की मांग को लेकर श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने न्यूनतम वेतन में 21 प्रतिशत तक अंतरिम बढ़ोतरी की है। श्रमिकों को बढ़ा हुआ वेतन इसी महीने से मिलने लगेगा। हालांकि इसके बाद भी नोएडा में मंगलवार को कई जगहों पर कामगारों का उपद्रव दिखा।
आधिकारिक बयान के मुताबिक गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है, अर्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12,445 रुपये से बढ़ाकर 15,059 रुपये किया गया है, जबकि कुशल श्रमिकों का वेतन 13,940 रुपये से बढ़ाकर 16,868 रुपये कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि अन्य नगर निगम वाले जनपदों के लिए अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,006 रुपये, अर्ध कुशल श्रमिकों का वेतन 12,445 रुपये से बढ़ाकर 14,306 रुपये तथा कुशल श्रमिकों का वेतन 13,940 रुपये से बढ़ाकर 16,025 रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार अन्य जनपदों के लिए अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 12,356 रुपये, अर्ध कुशल श्रमिकों का वेतन 12,445 रुपये से बढ़ाकर 13,591 रुपये तथा कुशल श्रमिकों का वेतन 13,940 रुपये से बढ़ाकर 15,224 रुपये कर दिया गया है। मजदूरी बढ़ाने का यह फैसला एक उच्च-स्तरीय समिति ने लिया था, जिसे सोमवार रात मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी।
श्रमिकों ने मंगलवार को भी अपना विरोध जारी रखा और हर महीने लगभग 20,000 रुपये की आय की जोरदार मांग की। विरोध कर रहे श्रमिक अरुण तिवारी कहते हैं, ‘जब तक हमारी मांगें पूरी तरह से मान नहीं ली जातीं, तब तक हम विरोध करते रहेंगे। हमारी मजदूरी न तो दूसरे राज्यों के बराबर है और न ही इतनी है कि हम अपना गुजारा कर सकें।’ अन्य श्रमिक का कहना है, ‘जब हम दूसरे राज्यों के अपने साथियों से मिलते हैं, तो वे हमें बताते हैं कि उन्हें रहने की जगह, ठीक से खाना वगैरह मिलता है। हम इस तरह के भेदभाव के खिलाफ हैं।’
मंगलवार को इस औद्योगिक केंद्र में पुलिस की भारी गश्त देखी गई, और 35 से ज्यादा जगहों पर फ्लैग मार्च निकाले गए। गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया, ‘सुबह 5 बजे से ही रूट मार्च निकाले जा रहे हैं। अब तक 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।’ प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के जरिए उनके इस आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच से पता चला है कि व्हाट्सऐप ग्रुप और क्यूआर कोड के माध्यम से हुई बातचीत ने सोमवार को प्रदर्शनकारियों को भड़काया हो सकता है। सिंह ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इन मैसेज से पता चलता है कि इसके पीछे कोई बड़ी साजिश काम कर रही है। कल 15,000 से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए थे और हमें लगता है कि यह यूनियनों के नेतृत्व वाला कोई आम विरोध प्रदर्शन नहीं था।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सोशल मीडिया पर चल रहे झूठे नैरेटिव को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।’हालांकि मजदूर यूनियनों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए इसे नैरेटिव बदलने की कोशिश बताया।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के सदस्य ने कहा, ‘हमारा सोशल मीडिया नेटवर्क इतना बड़ा नहीं है। मजदूर क्यूआर कोड इस्तेमाल करने में इतने माहिर नहीं हैं। यह सब लोगों का ध्यान भटकाने के लिए कहा जा रहा है।’