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प​श्चिम ए​शिया संकट की MSME के रेवेन्यू व मुनाफे पर मार, कोरोना जैसे बन रहे हैं हालात

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क्रिसिल के मुताबिक एमएसएमई का राजस्व एक फीसदी और मुनाफा आधा से एक फीसदी घटने की आशंका, मोरबी और फिरोजाबाद जैसे औद्योगिक क्लस्टर सबसे अधिक प्रभावित

Last Updated- June 02, 2026 | 7:30 PM IST
MSME

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे माल की उपलब्धता और वैश्विक व्यापार में व्यवधान के कारण चालू वित्त वर्ष में MSME क्षेत्र की राजस्व वृद्धि और लाभ दोनों प्रभावित होंगे। यह अर्धवार्षिक रिपोर्ट 69 क्षेत्रों और 147 औद्योगिक क्लस्टरों को कवर करती है, जिनका संयुक्त कारोबार करीब 75 लाख करोड़ रुपये है। यह भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 20-25 प्रतिशत और देश के MSME क्षेत्र का करीब दो-तिहाई हिस्सा दर्शाता है।

MSMEs के राजस्व में कितनी आएगी कमी?

क्रिसिल की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027 में MSME क्षेत्र की राजस्व वृद्धि दर 7.5-8.5 प्रतिशत रहेगी, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 100 बेसिस प्वाइंट कम है यानी पश्चिम एशिया संकट के कारण MSME के राजस्व में एक फीसदी कमी आ सकती है। वहीं EBITDA मार्जिन 50-100 बेसिस प्वाइंट घटकर 5-5.5 प्रतिशत पर आ सकता है।

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सोने में तेजी से ज्वेलरी कारोबार को मिली राहत

रिपोर्ट के अनुसार, यदि घरेलू रत्न एवं आभूषण बाजार में सोने की ऊंची कीमतों के कारण मूल्य आधारित वृद्धि नहीं हो रही होती, तो MSME क्षेत्र के लिए अनुमानित स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती थी। सोने की कीमतों में तेजी के चलते ज्वेलरी कारोबार को कुछ राहत मिली है, जिससे समग्र आंकड़ों पर नकारात्मक प्रभाव सीमित हुआ है।

कोरोना से जैस बन रहे है हालात

क्रिसिल का कहना है कि वर्तमान स्थिति कोविड-19 महामारी के दौरान देखे गए प्रभावों से मिलती-जुलती है। पश्चिम एशिया संकट भी लगभग इसी तरह का परिदृश्य प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें छोटे व्यवसायों पर असमान रूप से अधिक बोझ पड़ रहा है। महामारी के समय वित्त वर्ष 2020 और 2021 में बड़ी कंपनियों के राजस्व में 0-1 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जबकि MSME क्षेत्र को 3-5 प्रतिशत की गिरावट का सामना करना पड़ा था। वित्त वर्ष 2021 में MSME क्षेत्र का EBITDA मार्जिन 80 बेसिस प्वाइंट घटकर 4.7 प्रतिशत रह गया था।

दोहरी चुनौती का सामना कर रहे MSME

रिपोर्ट के अनुसार इस बार MSME क्षेत्र दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर गैस जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होने से उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है, राजस्व भी घट रहा है। वहीं दूसरी, व्यापारिक व्यवधानों तथा बढ़ती जिंस और ऊर्जा लागत का बोझ ग्राहकों पर पूरी तरह नहीं डाल पाने की सीमित क्षमता के कारण मार्जिन पर दबाव दबाव बढ़ रहा है।

क्रिसिल ने प्रभावित MSME इकाइयों को तीन श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में वे उद्योग हैं जो गैस जैसे ऊर्जा आधारित कच्चे माल पर निर्भर हैं। दूसरी श्रेणी में वे उद्योग हैं जो ऊर्जा से जुड़े डेरिवेटिव उत्पादों का उपयोग करते हैं। तीसरी श्रेणी में वे उद्योग हैं जो व्यापारिक व्यवधानों से प्रभावित हो रहे हैं।

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मोरबी और फिरोजाबाद सबसे अधिक प्रभावित

गुजरात का मोरबी क्लस्टर, जो देश के 80 प्रतिशत से अधिक सिरेमिक टाइल उत्पादन का केंद्र है, सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यहां 80-85 प्रतिशत उत्पादन गैस आधारित है। क्लस्टर के सिरेमिक कारोबार में MSME इकाइयों की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार इन इकाइयों की राजस्व वृद्धि वित्त वर्ष 2026 के 9-11 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2027 में केवल 1-3 प्रतिशत रह सकती है। मोरबी के कुल उत्पादन का 80-90 प्रतिशत हिस्सा निर्यात किया जाता है, जबकि इसके कुल निर्यात का 20-25 प्रतिशत पश्चिम एशियाई देशों को जाता है। इस कारण यहां की इकाइयों का EBITDA मार्जिन 300-400 बेसिस प्वाइंट घटकर 4-6 प्रतिशत तक आ सकता है।

इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित कांच उद्योग पर भी संकट का गहरा असर पड़ा है। गैस आपूर्ति और लागत संबंधी चुनौतियों के चलते उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार यहां की MSME इकाइयों की राजस्व वृद्धि भी केवल 1-3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रसायन, डाई और वस्त्र उद्योग पर बढ़ा लागत दबाव

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषान शर्मा ने कहा कि रसायन उद्योग अपने प्रमुख कच्चे माल, विशेष रूप से मेथनॉल, के लिए 90 प्रतिशत से अधिक आयात पर निर्भर है। यह आयात मुख्य रूप से पश्चिम एशिया से होता है। संकट के कारण कच्चे माल की कीमतों में 1.2 से 1.4 गुना तक वृद्धि हुई है, जबकि कंपनियां इसका केवल आंशिक बोझ ग्राहकों पर डाल पा रही हैं। इसका असर गुजरात के वडोदरा स्थित रसायन उद्योग के MSME पर पड़ेगा, जहां EBITDA मार्जिन 150-250 बेसिस प्वाइंट घटकर 3-5 प्रतिशत रह सकता है। अहमदाबाद के डाई और पिगमेंट उद्योग में भी कच्चे माल की लागत 1.3 से 1.5 गुना तक बढ़ गई है, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।

सूरत के वस्त्र उद्योग में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। पॉलिएस्टर यार्न और फाइबर जैसे कच्चे माल, जो कच्चे तेल से तैयार होते हैं, उनकी कीमतों में वृद्धि से पहले से कम मार्जिन पर काम कर रही इकाइयों की स्थिति और कमजोर हो सकती है।

फार्मा और हीरा उद्योग भी दबाव में

पश्चिम एशिया संकट की फार्मा और हीरा उद्योग पर भी मार पड़ रही है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की एसोसिएट डायरेक्टर एलिजाबेथ मास्टर के अनुसार फार्मास्युटिकल क्षेत्र की MSME इकाइयों को सक्रिय औषधि संघटक (API) की कमी का सामना करना पड़ रहा है। चीन से आयात होने वाले कई महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होने से उनकी कीमतें बढ़ गई हैं। इसके परिणामस्वरूप छोटी दवा कंपनियों का EBITDA मार्जिन 100-200 बेसिस प्वाइंट घटकर 5-7 प्रतिशत रह सकता है।

सूरत का हीरा एवं आभूषण उद्योग भी प्रभावित होने की आशंका है। देश के हीरा निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सूरत से होता है और इसके कुल निर्यात का एक चौथाई से अधिक पश्चिम एशिया को जाता है। खरीदारों द्वारा 5-10 प्रतिशत तक मूल्य कटौती की मांग किए जाने से इस क्षेत्र की MSME इकाइयों का EBITDA मार्जिन 100-150 बेसिस प्वाइंट तक घट सकता है। वर्तमान में यह मार्जिन केवल 2-3 प्रतिशत के स्तर पर है।

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सड़क निर्माण और पैकेज्ड फूड क्षेत्र पर भी असर

क्रिसिल की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि डीजल की कीमतों में वृद्धि से सड़क निर्माण क्षेत्र की MSME इकाइयों पर भी दबाव बढ़ेगा। इस उद्योग में ईंधन लागत कुल लागत का 8-10 प्रतिशत तक होती है। इसके चलते EBITDA मार्जिन 50-100 बेसिस प्वाइंट घटकर 8-10 प्रतिशत तक आ सकता है। वहीं पैकेज्ड फूड उद्योग में पैकेजिंग लागत बढ़ने से मार्जिन प्रभावित होगा। इस क्षेत्र में पैकेजिंग का खर्च कुल लागत का 10-15 प्रतिशत तक होता है। परिणामस्वरूप इन इकाइयों का EBITDA मार्जिन 50-100 बेसिस प्वाइंट घटकर 6-6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

ECLGS 5.0 से राहत की उम्मीद

MSME क्षेत्र को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 1.81 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय वाली योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ECLGS 5.0) के माध्यम से 2.55 लाख करोड़ रुपये तक के ऋण समर्थन का प्रावधान किया गया है। क्रिसिल का मानना है कि कोविड महामारी के दौरान यह योजना काफी प्रभावी साबित हुई थी। उस समय जारी कुल गारंटी का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा वितरित किया गया था और गारंटी राशि का 66 प्रतिशत MSME क्षेत्र को मिला था। अनुमान है कि नई योजना से 1.1 करोड़ से अधिक उद्यमों को लाभ मिलेगा, जो उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत MSME इकाइयों का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा हैं।

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना की सफलता उसके प्रभावी, तेज और समावेशी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि सहायता समय पर उपलब्ध होती है तो पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित MSME इकाइयों को राहत मिल सकती है।

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First Published - June 2, 2026 | 7:30 PM IST

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