वरिष्ठ अर्थशास्त्री Ashok Lahiri को जल्द ही NITI Aayog का उपाध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है। इस नियुक्ति के साथ वह एक बार फिर केंद्र सरकार की नीतिगत भूमिका में वापसी करेंगे।
लाहिड़ी इस पद पर Suman Bery की जगह लेंगे। नीति आयोग देश की आर्थिक रणनीति और सुधारों की दिशा तय करने वाली अहम संस्था है। ऐसे समय में यह बदलाव हो रहा है जब भारत वैश्विक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अपनी आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।
अशोक लाहिड़ी को नीतिगत और शैक्षणिक दोनों क्षेत्रों में कई दशकों का अनुभव है। वह दिसंबर 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के कार्यकाल में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाए गए थे।
उन्होंने जून 2007 तक इस पद पर काम किया। उनके कार्यकाल का एक हिस्सा Manmohan Singh की सरकार के दौरान भी रहा। इस दौरान उन्होंने देश की वित्तीय नीतियों और आर्थिक सुधारों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
लाहिड़ी Presidency University के पूर्व छात्र रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने Delhi School of Economics, Asian Development Bank, Bandhan Bank और National Institute of Public Finance and Policy में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
वह World Bank और International Monetary Fund के साथ सलाहकार और वरिष्ठ अर्थशास्त्री के रूप में भी काम कर चुके हैं।
हाल के वर्षों में राजनीति में सक्रिय रहे लाहिड़ी ने पश्चिम बंगाल से भारतीय जनता पार्टी के विधायक के रूप में काम किया है। अब उनका नीति आयोग में जाना एक तरह से फिर से नीतिगत कामकाज की ओर वापसी माना जा रहा है। सार्वजनिक वित्त और आर्थिक विश्लेषण में उनके अनुभव को देखते हुए उम्मीद है कि वे देश की प्राथमिकताओं को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
सरकार ने लाहिड़ी के साथ-साथ वैज्ञानिक गोबर्धन दास को भी नीति आयोग का सदस्य नियुक्त किया है। दास भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों से जुड़े रहे हैं और उनके अनुभव का लाभ भी नीति निर्माण में मिलने की उम्मीद है।
उपाध्यक्ष के रूप में लाहिड़ी केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर काम करेंगे। उनका फोकस लंबी अवधि की आर्थिक योजना और नीतियों को मजबूत करने पर रहेगा, जिससे नीति आयोग की सलाहकार भूमिका और प्रभावी हो सके।