facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

क्या रूसी तेल के बिना चल पाएंगी भारतीय रिफाइनरी? Kpler की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Advertisement

US Tariff: भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है। ऐसे में रूस से तेल आयात रोकने या कम करने की चर्चा हो रही है।

Last Updated- August 10, 2025 | 3:35 PM IST
crude oil

भारतीय रिफाइनरी तकनीकी रूप से रूस से कच्चे तेल की सप्लाई के बिना काम चला सकती हैं, लेकिन इस बदलाव के लिए उन्हें बड़े आर्थिक और रणनीतिक संतुलन बनाने होंगे। विश्लेषकों ने कहा कि रूसी कच्चा तेल उच्च ‘डिस्टिलेट’ उत्पादन को बढ़ावा देता है। इसका अर्थ है कि कच्चे तेल के शोधन के दौरान बनने वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन का हिस्सा ज्यादा होता है। भारत की रिफाइनरी खपत में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी 38% तक है।

वैश्विक विश्लेषण फर्म केप्लर के अनुसार, रूसी कच्चे तेल को वैकल्पिक तेलों से बदलने से उत्पादन में बदलाव आएगा। इसके चलते डीजल और विमान ईंधन का उत्पादन कम होगा और अवशेष उत्पादन बढ़ जाएगा।

भारत पर लगा कुल 50% टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारत से अमेरिकी आयात पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह टैरिफ रूस से कच्चे तेल का आयात करने के लिए दंड के रूप में है। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है। ऐसे में रूस से तेल आयात रोकने या कम करने की चर्चा हो रही है।

Also Read: PM मोदी ने बेंगलुरु में तीन वंदे भारत ट्रेनें और येलो लाइन मेट्रो की शुरुआत की, साथ ही ऑरेंज लाइन फेज-3 की रखी नींव

भारत को बनाना होगा संतुलन

केप्लर ने अपनी रिपोर्ट – ‘भारतीय आयात पर अमेरिकी शुल्क: ऊर्जा बाजारों और व्यापार प्रवाह पर प्रभाव’ में कहा, ”तकनीकी दृष्टि से भारतीय रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल के बिना काम चला सकती हैं, लेकिन इस बदलाव में बड़े आर्थिक और रणनीतिक समझौते शामिल होंगे।”

रिपोर्ट के मुताबिक, भारी छूट और भारत की रिफाइनरी प्रणालियों के अनुकूल होने के कारण रूसी कच्चे तेल के आयात में वृद्धि हुई। रूसी कच्चा तेल उच्च डिस्टिलेट उत्पाद (डीजल और विमान ईंधन) का समर्थन करता है और भारत के उन्नत शोधन बुनियादी ढांचे के लिए उपयुक्त है। इसने सरकारी और निजी दोनों रिफाइनरियों को मजबूत मार्जिन बनाए रखने में मदद की।

केप्लर ने कहा कि इसके उलट जाने पर मार्जिन पर अधिक प्रीमियम नहीं होगा। इसके अलावा अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे भी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा।

(PTI इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - August 10, 2025 | 3:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement