कांग्रेस सहित विपक्ष के कई प्रमुख दलों ने लोक सभा में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश किए जाने से एक दिन पहले बुधवार को कहा कि वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के पक्ष में हैं, लेकिन इस विधेयक के परिसीमन के प्रावधानों का पुरजोर विरोध करेंगे, क्योंकि ये खतरनाक हैं। हालांकि सूत्रों ने कहा कि दक्षिणी राज्यों केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित किसी भी राज्य में लोक सभा सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं की जाएगी। जनसंख्या वृद्धि को जिम्मेदारी से नियंत्रित करने वाले राज्यों के लिए कानूनी सुरक्षा उपाय भी किए जाएंगे।
सरकार गुरुवार से शुरू होने वाले तीन दिवसीय विस्तारित बजट सत्र के दौरान लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए एक बड़े सुधार के रूप में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने की तैयारी कर रही है। इससे संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन संबंधी विधेयक पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया कि वे परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ एकजुट होकर वोट करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि लोक सभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू किया जाए।
बैठक में खरगे, लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और जयराम रमेश, समाजवादी पार्टी के रमाशंकर राजभर और सनातन पांडेय, द्रमुक नेता टी. आर. बालू, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत एवं अरविंद सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह सहित अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए।
सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने डिजिटल माध्यम से बैठक में भाग लिया। बैठक के बाद खरगे ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं। हालांकि, जिस तरह से इसे लाया गया है, वह संदिग्ध है और हमें इस पर गंभीर आपत्ति है।’
इस बीच, लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला आरक्षण के नाम पर अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) का ‘हिस्सा चोरी’ करना चाहते हैं, जो ‘राष्ट्र विरोधी गतिविधि’ है।