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महिला आरक्षण विधेयक: लोकसभा में बोले पीएम मोदी- ‘राजनीति से ऊपर उठकर लें फैसला’

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उन्होंने चेतावनी भी दी कि जो लोग महिला आरक्षण का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है

Last Updated- April 16, 2026 | 3:52 PM IST
PM Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी | फाइल फोटो

Women’s Reservation Bill: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर चर्चा के दौरान कहा कि भारत के विकास की यात्रा में सांसदों के पास महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाने का एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी में भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और इस प्रगति में महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है।

महिलाओं की भागीदारी जरूरी

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का मतलब केवल बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, बल्कि नीति-निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही अहम है। उन्होंने सभी दलों के सांसदों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण अवसर को न गंवाएं और महिला आरक्षण को समर्थन दें।

Also Read: महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन पर सरकार का बड़ा कदम, लोकसभा में पेश हुए तीन अहम बिल

राजनीति से ऊपर उठकर लें फैसला- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीति से ऊपर रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस विषय को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह देश के लोकतंत्र को मजबूत करने से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि जो लोग महिला आरक्षण का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

लोकतंत्र को देगा नई मजबूती

प्रधानमंत्री ने अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक बेहद पिछड़े समुदाय से आते हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी है कि वे सभी को साथ लेकर चलें। उन्होंने कहा कि अगर सभी मिलकर आगे बढ़ेंगे, तो यह फैसला किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र के हित में होगा।

2029 तक लागू करने का लक्ष्य

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू नहीं हो सका, लेकिन अब 2029 के चुनाव में इसे लागू करने का अवसर है। पीएम मोदी ने दोहराया कि महिला आरक्षण विधेयक को राजनीतिक नजरिये से नहीं, बल्कि देशहित में देखा जाना चाहिए।

Also Read: क्या है डिलिमिटेशन, और क्यों बढ़ रही है उत्तर-दक्षिण की टेंशन?

इससे पहले सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण और अगले परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए तीन अहम बिल पेश किए। इसके तहत संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश किए गए।

संसद के विशेष सत्र (16 से 18 अप्रैल) के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किया। इस विधेयक का मकसद दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर सहित केंद्र शासित प्रदेशों में महिला आरक्षण व्यवस्था को लागू करना है।

इस सप्ताह की शुरुआत में केंद्र सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का ड्रॉफ्ट सांसदों के साथ साझा किया था। इस प्रस्ताव में महिला आरक्षण कानून में बदलाव और लोकसभा की कुल संख्या बढ़ाकर 850 करने की योजना शामिल है, जिसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दोनों शामिल होंगे।

(PTI इनपुट के साथ)

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First Published - April 16, 2026 | 3:51 PM IST

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