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चीन की सेना तक पहुंच सकती हैं Nvidia की सबसे ताकतवर AI चिप्स? रिपोर्ट ने बढ़ाई अमेरिका की टेंशन

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सेना और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विश्वविद्यालय Nvidia की सबसे एडवांस AI चिप H200 तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं

Last Updated- June 02, 2026 | 10:12 AM IST
Chinese Military Nvidia AI Chips

Nvidia AI Chips: अमेरिका और चीन के बीच AI और चिप्स को लेकर खींचतान लगातार बढ़ रही है। इसी बीच एक नई रिपोर्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की सेना से जुड़े कई विश्वविद्यालय Nvidia की सबसे ताकतवर AI चिप्स में से एक H200 तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि अमेरिका में एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि कहीं अमेरिकी तकनीक का फायदा चीन की सेना को तो नहीं मिल रहा।

चीन की सेना से जुड़े विश्वविद्यालयों की नजर Nvidia AI Chips पर

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के कम से कम सात ऐसे विश्वविद्यालय, जिनका सीधा संबंध सेना या रक्षा उद्योग से है, Nvidia की H200 चिप्स इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ संस्थान इन चिप्स को खरीदना चाहते हैं, जबकि कुछ उनकी कंप्यूटिंग क्षमता किराये पर लेने का रास्ता तलाश रहे हैं।

इनमें Beihang University और Northwestern Polytechnical University (NWPU) जैसे नाम शामिल हैं। ये दोनों चीन के मशहूर “सेवन सन्स ऑफ नेशनल डिफेंस” समूह का हिस्सा हैं, जिन्हें चीन की सेना के लिए रिसर्च और तकनीक विकसित करने वाला अहम संस्थान माना जाता है।

आखिर H200 चिप में ऐसा क्या खास है?

अगर आसान भाषा में समझें तो H200 इस समय दुनिया की सबसे ताकतवर AI चिप्स में से एक है। इसका इस्तेमाल बड़े AI मॉडल तैयार करने, उन्हें ट्रेन करने और जटिल डेटा प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि H200 की क्षमता पहले चीन में बिकने वाली H20 चिप से कई गुना ज्यादा है। यही वजह है कि दुनियाभर की AI कंपनियां और रिसर्च संस्थान इसे हासिल करना चाहते हैं।

ब्लूमबर्ग की जांच में क्या सामने आया?

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सेना और रक्षा क्षेत्र से जुड़े 25 से ज्यादा विश्वविद्यालय और रिसर्च लैब Nvidia की पुरानी पीढ़ी की चिप्स पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं या उन्हें हासिल करने की कोशिश कर चुके हैं। कई संस्थान अमेरिका की ब्लैकलिस्ट में भी हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये संस्थान मिसाइल, परमाणु तकनीक और सैन्य रिसर्च जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं।

Nvidia AI Chips खरीद नहीं सकते तो किराये पर लेने की कोशिश

रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात भी सामने आई है। कई संस्थान चिप्स खरीदने के बजाय उनकी कंप्यूटिंग क्षमता किराये पर लेना चाहते हैं। मतलब चिप किसी दूसरे देश के सर्वर में लगी होगी, लेकिन चीन के विश्वविद्यालय इंटरनेट के जरिए उसका इस्तेमाल करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी नियमों में यह एक बड़ी खामी है क्योंकि इस तरीके में चिप चीन की सीमा के भीतर नहीं जाती, इसलिए तकनीकी रूप से इसे निर्यात नहीं माना जाता।

पहले से इस्तेमाल हो रही हैं कई Nvidia AI चिप्स

ब्लूमबर्ग की जांच में पता चला कि चीन के कई विश्वविद्यालय पहले से Nvidia की A100, A800, H100 और H20 जैसी चिप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, Beijing University of Posts and Telecommunications के सुपरकंप्यूटर में Nvidia के 144 A800 चिप्स लगे हुए हैं। वहीं Harbin Institute of Technology पहले से H100 चिप्स इस्तेमाल कर रहा है और उसने H20 चिप हासिल करने की भी कोशिश की थी।

Nvidia ने क्या कहा?

Nvidia ने इस पूरे मामले को लेकर कहा है कि यह मानना गलत होगा कि चीन की सेना कुछ दर्जन चिप्स के भरोसे अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रही है। कंपनी का कहना है कि चीन के पास अपनी जरूरतों के लिए पर्याप्त घरेलू चिप्स मौजूद हैं। Nvidia के मुताबिक, जिस तरह अमेरिकी सेना चीनी तकनीक पर निर्भर नहीं रह सकती, उसी तरह चीन की सेना भी अमेरिकी तकनीक पर पूरी तरह निर्भर नहीं हो सकती।

अमेरिका में क्यों बढ़ी चिंता?

अमेरिका के कई सांसदों और सुरक्षा विशेषज्ञों को डर है कि अगर Nvidia जैसी कंपनियों की एडवांस AI चिप्स चीन के सैन्य संस्थानों तक पहुंच गईं तो उनका इस्तेमाल हथियारों के विकास, साइबर हमलों और दूसरी सैन्य गतिविधियों में किया जा सकता है। अमेरिकी सांसद ब्रायन मस्ट ने हाल ही में कहा कि अगर ये चिप्स चीनी सैन्य संस्थानों तक पहुंचती हैं तो यह गंभीर चिंता की बात होगी और कांग्रेस इस पर नजर रखेगी।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के तकनीकी विश्लेषक माइकल डेंग का कहना है कि जिन चिप्स को हासिल करने की कोशिश की जा रही है, उनकी संख्या ज्यादा नहीं है। इसलिए इनका इस्तेमाल ChatGPT जैसे बड़े AI मॉडल बनाने के लिए नहीं होगा। लेकिन इतनी क्षमता भी सैन्य रिसर्च, साइबर सुरक्षा से जुड़े काम या नए तरह के हथियारों पर रिसर्च के लिए काफी हो सकती है।

वहीं अमेरिकी रिसर्च संस्था American Enterprise Institute से जुड़े रयान फेडासियुक का कहना है कि AI चिप्स के मामले में Nvidia अभी भी सबसे आगे है। यही वजह है कि चीन के सेना से जुड़े संस्थान भी इन चिप्स को हासिल करना चाहते हैं।

AI की जंग का नया मोर्चा

यह खबर ऐसे समय आई है जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीक को लेकर मुकाबला लगातार तेज हो रहा है। अमेरिका नहीं चाहता कि उसकी सबसे उन्नत AI चिप्स और तकनीक चीन तक पहुंचे, जबकि चीन अपनी खुद की चिप इंडस्ट्री को मजबूत बनाने में लगा हुआ है। लेकिन इस रिपोर्ट से इतना जरूर साफ होता है कि तमाम प्रतिबंधों के बावजूद Nvidia की AI चिप्स की मांग चीन में अब भी बनी हुई है। खासकर सेना और रक्षा क्षेत्र से जुड़े संस्थान इन चिप्स को हासिल करने में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)

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First Published - June 2, 2026 | 9:41 AM IST

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