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‘AI से खत्म नहीं होंगी नौकरियां’, OpenAI के CEO का दावा: ‘इंसानी जुड़ाव’ को रिप्लेस करना लगभग नामुमकिन

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OpenAI के CEO ऑल्टमैन का मानना है कि AI के तेजी से बढ़ते कदम और इसे अपनाने की रफ्तार के बावजूद दुनिया में नौकरियों का कोई बड़ा संकट या 'कयामत' जैसी स्थिति नहीं आने वाली है

Last Updated- May 26, 2026 | 6:13 PM IST
Sam Altman
OpenAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन | फोटो क्रेडिट: Commons

दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के पैर पसारने के साथ ही इस बात का डर लगातार बना हुआ है कि यह तकनीक इंसानी नौकरियों को पूरी तरह लील जाएगी। लेकिन अब खुद ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन ने इस पर एक बड़ा और राहत देने वाला बयान दिया है।

ऑल्टमैन का मानना है कि AI के तेजी से बढ़ते कदम और इसे अपनाने की रफ्तार के बावजूद दुनिया में नौकरियों का कोई बड़ा संकट या ‘कयामत’ जैसी स्थिति नहीं आने वाली है। उनका कहना है कि तकनीक ने अभी तक वैसी तबाही नहीं मचाई है, जैसा कि उन्होंने खुद शुरुआत में सोचा था।

सिडनी में आयोजित कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (CBA) की एक कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली जुड़कर ऑल्टमैन ने अपनी पुरानी चिंताओं को खुलकर साझा किया। उन्होंने माना कि शुरुआती दिनों में वह खुद इस बात को लेकर बेहद चिंतित थे कि AI का वैश्विक रोजगार के स्तर पर क्या और कितना बुरा असर पड़ेगा। 

साल 2022 में जब OpenAI ने ChatGPT को लॉन्च किया था, तब कंपनी और उसके अधिकारियों ने तकनीक के विकास को लेकर जो भविष्यवाणियां की थीं, वे तो काफी हद तक सही साबित हुईं। लेकिन, इसके सामाजिक और आर्थिक नतीजों को भांपने में वे पूरी तरह से गलत निकले।

नौकरियों के खात्मे को लेकर गलत साबित हुई पुरानी धारणा

कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैट कॉमिन को दिए एक इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने कहा कि वह अपनी पुरानी धारणा के गलत साबित होने पर बेहद खुश हैं। उन्होंने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि उन्हें लगा था कि AI के आने से अब तक शुरुआती स्तर की कई व्हाइट-कॉलर नौकरियां (दफ्तरों में बैठकर काम करने वाले पद) पूरी तरह खत्म हो चुकी होंगी, लेकिन असलियत में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। 

ऑल्टमैन का कहना है कि अब वह बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों नहीं हुआ। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी चुटकी ली कि लोग अब उनसे कह रहे हैं कि वे दुनिया को पहले ही इस डर और कयामत के माहौल से बचा सकते थे। इस पर उनका मानना है कि उस वक्त उन्हें यह एक वास्तविक खतरा लगा था, जिसके बारे में बात करना जरूरी था और हो सकता है कि यह आगे भी एक विषय बना रहे।

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अपनी इस बातचीत के दौरान ऑल्टमैन ने नौकरियों से जुड़े कोई तय आंकड़े तो सामने नहीं रखे, लेकिन यह भी एक सच है कि अमेजन, HSBC, स्टैंडर्ड चार्टर्ड और खुद CBA जैसी कई बड़ी वैश्विक कंपनियों ने हाल के दिनों में अपने यहां कुछ पदों को AI से बदलने की घोषणा की है। 

इस बीच, रॉयटर्स की कुछ रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि OpenAI आने वाले हफ्तों में अमेरिका में IPO लाने की गुपचुप तैयारी कर रही है, जिसमें कंपनी की नजर 1 ट्रिलियन डॉलर के मूल्यांकन और कम से कम 60 बिलियन डॉलर जुटाने पर है।

रोजगार में ‘इंसानी जुड़ाव’ को रिप्लेस करना नामुमकिन

सैम ऑल्टमैन ने इस बात पर खास जोर दिया कि भले ही AI कई उद्योगों और कामों में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है, लेकिन रोजगार का एक ‘इंसानी हिस्सा’ ऐसा है जिसे कभी बदला नहीं जा सकता। उन्होंने अपना ही उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने स्लैक (Slack) और ईमेल के जवाब देने के लिए AI का इस्तेमाल शुरू किया था। उन्होंने इसके जवाबों के आगे बकायदा यह लिखवाया था कि ‘यह सैम का AI है’।

लेकिन जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि लोग आपस में इंसानी जुड़ाव और बातचीत को ज्यादा तवज्जो देते हैं। ऑल्टमैन ने कहा कि वह अपने समय का एक बड़ा हिस्सा खुद लोगों को जवाब देने में लगाते हैं और वह आने वाले समय में इस काम को किसी AI के भरोसे छोड़ने की सोच भी नहीं सकते। इसी अनुभव ने उनके इस भरोसे को पक्का किया है कि जिन नौकरियों में इंसानी बातचीत और सूझबूझ की जरूरत होती है, वहां AI कभी भी इंसानों की जगह नहीं ले पाएगा। 

उनका कहना है कि इस बदलाव ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया है और वह इस क्षेत्र की दूसरी कंपनियों की तरह किसी भी ‘जॉब्स अपोकैलिप्स’ यानी नौकरियों की कयामत जैसी थ्योरी पर भरोसा नहीं करते।

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First Published - May 26, 2026 | 6:13 PM IST

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