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US-Iran War: हॉर्मुज में फिर गरमाया टकराव, ईरान के ड्रोन खतरे के बाद अमेरिका की बड़ी जवाबी स्ट्राइक

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना की रक्षात्मक कार्रवाई और परमाणु समझौते पर चल रही बातचीत से वैश्विक अस्थिरता बढ़ी हुई है।

Last Updated- May 28, 2026 | 9:48 AM IST
Iran US Conflict
Representative image

US-Iran War: अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान से जुड़े एक नए सैन्य खतरे को देखते हुए रक्षात्मक कार्रवाई की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास चार ईरानी हमलावर ड्रोन को मार गिराया गया, जो एकतरफा हमले की क्षमता वाले थे और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते थे।

यह जानकारी उन अधिकारियों ने दी, जिन्होंने सार्वजनिक बयान देने की अनुमति न होने के कारण नाम उजागर नहीं किया।

बंदर अब्बास में ड्रोन लॉन्च की तैयारी पर हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के बलों ने ईरान के बंदर अब्बास में स्थित एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर भी कार्रवाई की। बताया गया कि यह सुविधा एक और ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी में थी, जिसे समय रहते रोक दिया गया।

अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई में उस संभावित पांचवें ड्रोन को भी निष्क्रिय कर दिया गया, जिसे लॉन्च करने की योजना थी।

वैश्विक तनाव के बीच ट्रंप का बयान

इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान अब बेहद कमजोर स्थिति में बातचीत कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव उनके निर्णयों को प्रभावित नहीं करेंगे और वे किसी भी समझौते के लिए जल्दबाजी में नहीं हैं।

ट्रंप ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को लगभग तीन महीने हो चुके हैं और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी दिखने लगा है।

ट्रंप ने कैबिनेट बैठक की शुरुआत में कहा कि ईरान के साथ समझौता अब करीब है। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी सरकार जल्द ही एक ऐसे नतीजे पर पहुंच सकती है जिससे मौजूदा तनाव कम हो सके।

ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कई मुद्दों पर लगभग सहमति बन चुकी है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार बातचीत अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं है और कई अहम बिंदुओं पर अंतिम निर्णय बाकी है।

व्हाइट हाउस की कोशिश है कि किसी भी समझौते के जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोला जा सके और ईरान की परमाणु क्षमता को सीमित करने का दावा किया जा सके। ट्रंप इस समझौते को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करना चाहते हैं, जिससे वे संघर्ष समाप्त होने का संकेत दे सकें।

इस संभावित समझौते को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी असंतोष के संकेत मिल रहे हैं। कई आलोचकों का मानना है कि इससे ईरान की सरकार कमजोर होने के बजाय और अधिक मजबूत होकर उभर सकती है। वहीं, इस मुद्दे ने अमेरिकी राजनीति में भी बहस तेज कर दी है।

मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ी चिंता

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आ रहा है जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं। बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर पहले से ही मतदाताओं में असंतोष देखा जा रहा है, जिससे रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ गई है।

इन सवालों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि उनकी ईरान नीति पर चुनावों का कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, “लोग सोचते हैं कि वे मुझे चुनाव के इंतजार में रोक लेंगे, लेकिन मुझे मध्यावधि चुनाव की कोई परवाह नहीं है।”

ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ समझौते की दिशा में अभी काम बाकी है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि दोनों पक्ष किसी नतीजे तक पहुंच सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अब तक सहमति नहीं बन पाई है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर डील नहीं हुई तो “काम को खत्म करना होगा”।

सैन्य कार्रवाई से बढ़ी तनाव की स्थिति

इसी बीच अमेरिकी रक्षा विभाग ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइन बिछाने वाली नावों पर “रक्षात्मक” हमले किए। अमेरिका ने दावा किया कि उसने संघर्षविराम को ध्यान में रखते हुए संयम बरता है, लेकिन ईरान ने इन हमलों को “अविश्वास और गलत मंशा” का संकेत बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं से बातचीत और अधिक जटिल हो सकती है।

डील की शर्तों पर मतभेद

रिपोर्ट्स के मुताबिक संभावित समझौते को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कुछ रिपब्लिकन सहयोगी भी इस डील को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित शर्तें ईरान के लिए ज्यादा अनुकूल दिखाई देती हैं और यह ओबामा प्रशासन की पुरानी परमाणु डील जैसी लगती हैं, जिसे ट्रंप ने पहले अपने कार्यकाल में खत्म कर दिया था।

प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान से यह उम्मीद की जा रही है कि वह अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ देगा। इसके बदले में उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस यूरेनियम को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने या आंशिक रूप से कम करने पर चर्चा हो रही है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

रूस और चीन को लेकर ट्रंप की आपत्ति

ट्रंप ने कहा है कि वह इस बात से सहज नहीं हैं कि रूस या चीन जैसे देश ईरान के यूरेनियम भंडार को संभालें, क्योंकि दोनों देशों के ईरान से करीबी संबंध हैं।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार ईरान के पास करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया है। यह स्तर हथियार-ग्रेड यानी 90 प्रतिशत के काफी करीब माना जाता है। ईरान ने अब तक इस यूरेनियम को छोड़ने पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है।

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First Published - May 28, 2026 | 9:48 AM IST

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