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US-Iran War: अमेरिका से समझौते पर ईरान का सख्त रुख, बोला ‘न्याय नहीं तो डील नहीं’

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US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच बातचीत जारी है, जहां एक ओर समझौते के संकेत हैं तो दूसरी ओर हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।

Last Updated- May 06, 2026 | 3:21 PM IST
Iran US Conflict
Representative image

US-Iran War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत एक बार फिर सुर्खियों में है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर अधूरा या एकतरफा समझौता नहीं मानेगा। वहीं अमेरिका की ओर से बातचीत में प्रगति का दावा किया गया है, जिससे कूटनीतिक हल की उम्मीद भी बनी हुई है।

ईरान का स्पष्ट रुख

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश केवल ऐसा समझौता स्वीकार करेगा जो पूरी तरह न्यायसंगत हो और सभी पहलुओं को कवर करता हो। उन्होंने यह भी दोहराया कि बातचीत के दौरान ईरान अपने वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

बीजिंग में चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी से मुलाकात के बाद अराघची ने यह बयान दिया। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान इस मुद्दे पर चीन के साथ भी कूटनीतिक समन्वय बनाए हुए है।

दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वार्ता में “काफी प्रगति” हो रही है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं। हालांकि अभी तक किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर चुप्पी

हाल ही में अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा से जुड़े अपने सैन्य अभियान को कुछ समय के लिए रोकने का प्रस्ताव दिया था। इसे बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए एक संकेत के तौर पर देखा गया।

लेकिन ईरान के विदेश मंत्री ने इस प्रस्ताव पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इससे यह साफ नहीं हो पाया है कि तेहरान इस पहल को किस नजर से देख रहा है।

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद जैसा हो गया है। यह रास्ता दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसके बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है और कई देशों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

ट्रंप का बयान, प्रोजेक्ट फ्रीडम पर अस्थायी रोक

डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि आपसी सहमति से “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान पर लगाई गई नाकेबंदी पूरी तरह जारी रहेगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि दोनों पक्ष किसी संभावित समझौते को अंतिम रूप दे सकें।

ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हल्की गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.2 प्रतिशत गिरकर 108.60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। इससे पहले इसमें 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत भी 1.2 प्रतिशत गिरकर 101.06 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो पिछले सत्र में 3.9 प्रतिशत नीचे बंद हुई थी।

व्हाइट हाउस की चुप्पी, बातचीत पर सस्पेंस

इस मुद्दे पर व्हाइट हाउस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह भी साफ नहीं हो पाया है कि बातचीत कितनी आगे बढ़ी है और यह अस्थायी रोक कितने समय तक जारी रहेगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ईरान को इस अहम समुद्री रास्ते पर नियंत्रण नहीं करने दिया जा सकता। उनका मानना है कि इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ईरान की सैन्य तैयारी, अमेरिका की जवाबी कार्रवाई

ईरान ने इस जलडमरूमध्य को बंद करने के लिए बारूदी सुरंग, ड्रोन, मिसाइल और तेज गति वाली नौकाओं के इस्तेमाल की धमकी दी है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा के साथ निकालने की व्यवस्था की है।

अमेरिकी सेना ने सोमवार को कई ईरानी नौकाओं, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया है। इसके बावजूद चार हफ्ते पहले हुआ युद्धविराम अभी तक कायम है, हालांकि स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है।

उन्होंने कहा है कि ईरान अब शांति चाहता है और दोनों पक्षों के बीच एक अंतिम समझौते की दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है। हालांकि जमीनी हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं और संघर्ष का असर कई देशों तक फैल चुका है।

ईरान से शुरू हुआ यह टकराव अब लेबनान और खाड़ी देशों तक फैल चुका है। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है, जिससे आम लोगों की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर

इस संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी इसका दबाव दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख के मुताबिक, अगर आज ही यह संघर्ष खत्म हो जाए, तब भी इसके आर्थिक असर से उबरने में तीन से चार महीने का समय लग सकता है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। उनके मुताबिक, ईरान अब केवल सीमित क्षमता के साथ जवाब दे पा रहा है और अंदरखाने शांति चाहता है, भले ही सार्वजनिक रूप से आक्रामक बयान दे रहा हो।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लिखा कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ एक व्यापक और अंतिम समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है।

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अमेरिका में राजनीतिक दबाव बढ़ा

इस संघर्ष का असर अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ती गैस की कीमतें आम लोगों पर असर डाल रही हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों का उद्देश्य ईरान से उत्पन्न खतरे को खत्म करना था। उन्होंने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन देने को भी चिंता का कारण बताया।

वहीं, ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। उसका कहना है कि वह परमाणु अप्रसार संधि का हिस्सा है और उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक विकसित करने का अधिकार है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन भी शामिल है।

तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच एक बार आमने-सामने बातचीत हो चुकी है, लेकिन इसके बाद आगे की बैठकों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में फिलहाल समाधान की राह आसान नहीं दिख रही।

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First Published - May 6, 2026 | 3:21 PM IST

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