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पश्चिम एशिया संघर्ष पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बड़ा बयान, पुतिन संग बैठक में उठाया मुद्दा

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बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और बातचीत के जरिए समाधान पर जोर दिया।

Last Updated- May 20, 2026 | 1:46 PM IST
Xi and Putin
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग बुधवार (20 मई, 2026) को चीन के बीजिंग स्थित 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में एक समारोह में शामिल हुए। फोटो: रॉयटर्स

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने बुधवार को पश्चिम एशिया में सभी तरह की सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्थिति ‘गंभीर मोड़’ पर पहुंच चुकी है। शी ने यह बात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के साथ बीजिंग में हुई बैठक के दौरान कही।

पीपुल्स ग्रेट हॉल में पुतिन का स्वागत करते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और व्यापक पश्चिम एशिया में दोबारा संघर्ष बढ़ने से बचना चाहिए और बातचीत जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संघर्ष का जल्द अंत होने से ऊर्जा आपूर्ति, औद्योगिक और सप्लाई चेन व वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर पड़ रहे असर को कम करने में मदद मिलेगी।

शी और पुतिन की यह बैठक ऐसे समय हुई जब कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 14-15 मई को चीन का दौरा किया था। इस दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ईरान-इजरायल संघर्ष, होर्मुज स्ट्रेट और द्विपक्षीय व्यापार विवादों पर विस्तृत चर्चा हुई थी।

चीन-रूस की बैठक पर थी दुनिया की नजर

इस बैठक पर दुनिया की नजर इसलिए भी थी क्योंकि चीन और रूस दोनों ईरान के करीबी रणनीतिक साझेदार हैं और तेहरान के साथ उनके मजबूत आर्थिक और सैन्य संबंध हैं। माना जा रहा है कि दोनों देश होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखने को लेकर ईरान के रुख को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।

शी जिनपिंग ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति को ‘अस्थिर और उथल-पुथल भरी’ बताया और अप्रत्यक्ष रूप से ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि एकतरफावाद और वर्चस्ववाद फिर से बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद शांति, विकास और सहयोग आज भी दुनिया के लोगों की सबसे बड़ी आकांक्षा है।

चीन-रूस सहयोग को और मजबूत करने की बात करते हुए शी ने कहा कि दोनों देशों को मिलकर वैश्विक शासन व्यवस्था को ज्यादा न्यायसंगत और संतुलित बनाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य और दुनिया की बड़ी शक्तियों के रूप में चीन और रूस को दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और उच्च स्तर के समन्वय के जरिए अपने देशों के विकास को आगे बढ़ाना चाहिए।

40 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना

क्रेमलिन के अनुसार पुतिन की इस यात्रा के दौरान करीब 40 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। चीन की 25वीं यात्रा पर आए पुतिन ने शी जिनपिंग को ‘प्रिय मित्र’ बताया और दोनों देशों के करीबी सहयोग की सराहना की।

रूसी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक पुतिन ने कहा, “प्रिय राष्ट्रपति शी जिनपिंग, मेरे प्रिय मित्र! चीन में एक कहावत है-‘एक दिन की दूरी तीन शरद ऋतु जैसी लगती है।’ हम आपसे मिलकर बेहद खुश हैं और लगातार संपर्क में रहते हैं।” दोनों नेताओं ने 25 साल पहले हुए चीन-रूस मैत्री और सहयोग समझौते को आगे भी जारी रखने पर सहमति जताई। शी जिनपिंग ने कहा कि इस समझौते ने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक दोस्ती और रणनीतिक सहयोग की मजबूत नींव रखी है।

बैठक से पहले शी जिनपिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। पुतिन मंगलवार रात बीजिंग पहुंचे थे, जहां उनका स्वागत चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने किया। यात्रा से पहले जारी वीडियो संदेश में पुतिन ने कहा कि रूस-चीन संबंध “अभूतपूर्व स्तर” पर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार 200 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और अब अधिकतर लेनदेन रूबल और युआन में हो रहा है।

पुतिन ने यह भी कहा कि रूस-चीन रणनीतिक साझेदारी वैश्विक स्थिरता में बड़ी भूमिका निभा रही है और दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स जैसे मंचों पर समन्वय जारी रखेंगे। पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी और अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों को जब्त किए जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है।

चीन अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से लगभग 90 प्रतिशत तेल आयात करता है, जबकि रूस और चीन दोनों के तेहरान के साथ करीबी रणनीतिक संबंध हैं।

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First Published - May 20, 2026 | 1:46 PM IST

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