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एक साल में 9 ब्रिटिश विश्वविद्यालयों को मंजूरी, आगे और बड़ा विस्तार

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नीतिगत बदलाव और एफटीए के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच शिक्षा सहयोग और तेजी से बढ़ता दिख रहा है।

Last Updated- March 20, 2026 | 8:46 AM IST
UK Education
Representational Image

ब्रिटिश काउंसिल के सीईओ स्कॉट मैकडॉनल्ड ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर और हाल में हुए नीतिगत बदलावों के बाद अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और आवागमन के लिए दोनों देश के बीच सहयोग काफी तेज गति से बढ़ रहा है।

पिछले एक साल में नौ ब्रिटिश विश्वविद्यालयों को भारत में संचालन स्थापित करने की मंजूरी मिल चुकी है और उम्मीद है कि यह संख्या जल्द ही बढ़कर 15 हो जाएगी। मैकडॉनल्ड ने कहा,‘हमने देखा है कि केवल एक साल की अवधि में नौ ब्रिटिश विश्वविद्यालयों ने भारत में अपनी शाखाएं स्थापित कर ली हैं। मैंने इतनी तेजी गति से ऐसी प्रगति पहले कभी नहीं देखी। हमें लगता है कि बहुत जल्द यह संख्या 15 तक पहुंच जाएगी।’

वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ऐसे नियम अधिसूचित किए जिनके तहत विश्व के शीर्ष संस्थानों में शुमार विदेशी विश्वविद्यालयों को नियामक की मंजूरी के अधीन भारत में परिसर स्थापित करने और स्नातक, स्नातकोत्तर और अनुसंधान कार्यक्रम चलाने की अनुमति दी गई है।

ब्रिटिश काउंसिल की भारत कंट्री डायरेक्टर एलिसन बैरेट एमबीई ने कहा कि भारत शिक्षा का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि ऐसे में ब्रिटेन को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने वाले विश्वविद्यालयों के आगमन का लाभ मिल रहा है। मैकडॉनल्ड ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बावजूद भारत-ब्रिटेन गलियारा भू- राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मजबूती के साथ जमे रहने में पूरी तरह सक्षम है।

मैकडॉनल्ड ने आगे कहा,‘बात चाहे ब्रिटेन की हो या भारत की मगर एक देश के रूप में आपका लक्ष्य स्थिर रहना है ताकि हर दौर में आप अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित कर सकें। हम दोनों देश वर्तमान में स्थिर हैं और दोनों ही इसे कायम रखने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे। इससे मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता में हमें काफी फायदा होगा।’

‘भारत-ब्रिटेन विजन’ 2035 के तहत दोनों देशों ने शिक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई है जिसमें ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना, संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता को मजबूत करना शामिल हैं।

यूजीसी के 2023 के नियमों के तहत भारत में परिसर स्थापित करने की योजना की घोषणा करने वाले ब्रिटेन के 9 विश्वविद्यालयों में से अब तक केवल साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय ने ही परिचालन शुरू किया है जबकि अन्य विश्वविद्यालयों के 2026 और 2027 के बीच शुरू होने की उम्मीद है।

बैरेट एमबीई ने कहा,‘ब्रिटेन में भारतीयों के लिए अब भी आकर्षक एवं पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। वहां अध्ययन करने से लोगों को अन्य देशों में काम करने के अवसर भी मिल सकते हैं।’ मैकडॉनल्ड ने कहा कि दोनों देश कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर सहयोग के अवसरों पर भी विचार कर रहे हैं और भविष्य में इस संबंध में और नीतिगत चर्चा होगी।

ब्रिटिश काउंसिल ने इस सप्ताह की शुरुआत में स्मृति इरानी द्वारा समर्थित ‘एलायंस फॉर ग्लोबल गुड – जेंडर इक्विटी एंड इक्वालिटी’ के तहत एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है। इसका उद्देश्य भारत में लगभग 1,00,000 महिला उद्यमियों को अंग्रेजी, संचार और डिजिटल कौशल में प्रशिक्षण प्रदान करके उनके व्यवसायों को आगे बढ़ाने में सहायता करना है।

उन्होंने आगे कहा,‘भारत में कौशल विकास को अपेक्षाकृत अधिक महत्त्व दिया जाता है क्योंकि यहां रोजगार की व्यापक चुनौती मौजूद है। मगर ब्रिटेन में भी हमारे सामने ठीक यही चुनौती है इसलिए हम इस पर भी विचार कर रहे हैं कि विश्वविद्यालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण के सही संयोजन और ऐसी प्रणालियों को कैसे बढ़ावा दिया जाए।’

भारत ने नीति में कौशल विकास को लगातार प्राथमिकता दी है जिसमें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और स्किल इंडिया मिशन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इनका उद्देश्य कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने और रोजगार के अंतर को दूर करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण और प्रमाणन का विस्तार करना है।

मैकडॉनल्ड ने कहा कि आर्टिफिशल इंटेजिलेंस (एआई) शिक्षा प्रणाली पर व्यापक प्रभाव डाल रही है और एआई के शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने के लिए नीतिगत बदलावों की जरूरत है। मैकडॉनल्ड ने कहा,‘एआई हमारे काम के हर पहलू को प्रभावित कर रहा है। हम इस बात पर गहराई से विचार करते हैं कि यह शिक्षा पर कैसे लागू होता है।’

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First Published - March 20, 2026 | 8:46 AM IST

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