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12वीं के नतीजों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, परीक्षा प्रबंधन और रुके हुए रिजल्ट को लेकर CBSE से मांगा जवाब

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कक्षा 12वीं की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में गड़बड़ियों और रोके गए परीक्षा परिणामों को लेकर उच्चतम न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीएसई से जवाब मांगा है

Last Updated- June 08, 2026 | 10:55 PM IST
Supreme Court
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में सोमवार को उच्चतम न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने सवाल उठाए। दोनों अदालतों ने सीबीएसई द्वारा कक्षा 12वीं की परीक्षा और नतीजों के प्रबंधन मामले पर चिंता जताई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और सीबीएसई को नोटिस जारी किया है। यह मामला सीबीएसई द्वारा कक्षा 12वीं की परीक्षा के लिए शुरू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति मधु जैन के खंडपीठ ने शिक्षा विभाग और सीबीएसई से जवाब मांगा और अगली सुनवाई 12 जून को तय की। यह याचिका एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद झाखड़ ने दायर की है। इसमें मांग की गई है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

याचिका में कहा गया है कि नतीजे घोषित होने के बाद, देश भर के कई छात्रों ने शिकायत की कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी धुंधली थी,कुछ पेज गायब थे,सभी उत्तर अपलोड नहीं हुए थे,उत्तर पुस्तिकाओं का मिलान सही नहीं था,अपेक्षा से बहुत कम अंक मिले और शिकायतों की जांच के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी।

सुनवाई के दौरान सीबीएसई के वकील एम. ए. नियाजी ने कहा कि यह जनहित याचिका एक राजनीतिक दल के छात्र संगठन ने दायर की है इसलिए इसकी स्वीकार्यता पर सवाल है। उन्होंने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि शिक्षा का राजनीतिकरण हो।’

याचिका में यह भी कहा गया है कि बड़ी संख्या में छात्रों ने नतीजे घोषित किए जाने के तुरंत बाद अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मांगनी शुरू कर दी जो इस बात का संकेत है कि मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा कम हुआ है।

इसमें कहा गया, ‘अगर बहुत सारे छात्र नतीजों की घोषणा के बाद एक साथ अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखने की मांग कर रहे हैं तब यह इस बात का संकेत हो सकता है कि उन्हें मूल्यांकन प्रक्रिया पर संदेह है। ऐसे में इस मामले को सामान्य या नियमित प्रक्रिया समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।’

याचिका में मांग करते हुए कहा गया है कि सत्यापन पोर्टल को एक महीने के लिए फिर से खोला जाए,विवादित मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच हो,और ओएसएम प्रणाली की स्वतंत्र जांच कराई जाए। 

दूसरे मामले में उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई से जवाब मांगा है। यह याचिका सऊदी अरब के एक छात्र ने दायर की है जिसका कक्षा 12वीं का सुधार परीक्षा परिणाम रोक दिया गया है। पश्चिम एशिया के कुछ देशों में क्षेत्रीय तनाव के कारण सीबीएसई की कई परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं, जिसके चलते यह समस्या पैदा हुई। न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई के पीठ ने सीबीएसई और उसके क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की।

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First Published - June 8, 2026 | 10:52 PM IST

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