नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने विवरणिका मसौदा (डीआरएचपी) जमा कराने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। उसने लंबे समय से प्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम में मौजूदा शेयरधारकों को अपने शेयर बेचने के लिए आमंत्रित किया है।
शेयरधारकों को भेजे एक संदेश में एनएसई ने कहा है कि उसके निदेशक मंडल ने बीती 6 फरवरी को ‘ऑफर फॉर सेल’ (ओएफएस) के ज़रिए सार्वजनिक सूचीबद्धता की योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत, पात्र निवेशक अपनी होल्डिंग्स का कुछ हिस्सा या पूरी होल्डिंग्स बेच सकेंगे। शेयरधारकों को प्रस्तावित शेयर बिक्री में हिस्सा लेने की अपनी इच्छा आगामी 27 अप्रैल तक बतानी होगी।
ओएफएस में हिस्सा लेने की पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि शेयरधारकों ने डीआरएचपी जमा कराने से कम से कम एक वर्ष पहले तक अपने शेयर लगातार अपने पास रखे हुए हों। हालांकि डीआरएचपी जमा कराने की तारीख अभी तय नहीं हुई है। लेकिन एनएसई ने अपनी अनुमानित समय-सीमा के आधार पर 15 जून, 2025 को कट-ऑफ तारीख रखा है।
नियामकीय नियमों के तहत शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को निवेशक के तौर पर आईपीओ में आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, उनकी बची हुई प्री-ऑफर शेयरहोल्डिंग पर लॉक-इन की शर्तें लागू होंगी। प्रतिभागियों को सेबी के इश्यू ऑफ कैपिटल ऐंड डिस्क्लोजर रीक्वायरमेंट (आईसीडीआर) नियमन, 2018 और कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का पालन करना होगा।
सूत्रों के अनुसार एनएसई का मूल्यांकन 4 से 6 लाख करोड़ रुपये के बीच होने की संभावना है, जिससे वह भारत की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में से एक बन सकती है। यह आईपीओ पूरी तरह से ओएफएस होगा, जिसमें मौजूदा निवेशक टेंडरिंग प्रक्रिया को मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर अपनी करीब 2.5 से 5 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
इस महीने की शुरुआत में एक्सचेंज ने इस पेशकश के प्रबंधन के लिए रिकॉर्ड 20 मर्चेंट बैंकरों और आठ लीगल फर्मों को नियुक्त किया। चूंकि इस इश्यू में कोई नया इक्विटी हिस्सा शामिल नहीं होगा, इसलिए इससे मिलने वाली रकम पूरी तरह से शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को ही मिलेगी।
दिसंबर 2025 तक एनएसई के प्रमुख शेयरधारकों में एलआईसी, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया आदि शामिल थे।