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घाटा घटा, कमाई बढ़ी… आईपीओ से पहले फ्लिपकार्ट की बड़ी तैयारी

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आईपीओ से पहले नए राजस्व स्रोतों और बेहतर मार्जिन पर फ्लिपकार्ट का फोकस

Last Updated- June 04, 2026 | 8:08 AM IST
Flipkart

बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट भुगतान और वित्तीय सेवाओं पर और ज्यादा जोर दे रहा है। कंपनी अगले साल या उसके बाद संभावित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) से पहले राजस्व के नए स्रोतों और बेहतर मार्जिन की तलाश में है।

वालमार्ट के स्वामित्व वाली यह कंपनी इस बात पर दांव लगा रही है कि भुगतान सफलता की दरों, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और लॉयल्टी कार्यक्रमों में सुधार आदि से राजस्व वृद्धि में इजाफा हो सकता है और लागत घट सकती है। यह ऐसी दोहरी जरूरत है, जो परिपक्व उपभोक्ता इंटरनेट कारोबार के सामने आने वाले दबावों को दर्शाती है।

फ्लिपकार्ट में पेमेंट्स और सुपकॉइन्स के उपाध्यक्ष गौरव अरोड़ा ने कहा कि भुगतान कंपनी की वृद्धि के शीर्ष तीन या चार संचालकों में से एक बन गया है। भुगतान पूरा होने की दरों में हर एक प्रतिशत की बढ़ोतरी से सीधे तौर पर राजस्व वृद्धि भी उतनी ही बढ़ जाती है। अरोड़ा कंपनी के सुपरकॉइन्स लॉयल्टी कार्यक्रम को फ्लिपकार्ट के अपने प्लेटफॉर्म के अलावा राइड-हेलिंग, विमानन और अन्य ज्यादा इस्तेमाल वाली श्रेणियों तक ले जाने पर भी काम कर रहे हैं। उनकी कोशिश ऐसा तंत्र बनाने की है जो उनकी नजर में भारत का सबसे बड़ा लॉयल्टी तंत्र होगा।

कंपनी की मार्केटप्लेस शाखा फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने वित्त वर्ष 25 में 20,493 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया, जो पिछले साल के मुकाबले 14 प्रतिशत ज्यादा है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास जमा नियामकीय सूचना के मुताबिक शुद्ध घाटा 37 प्रतिशत कम होकर 1,494 करोड़ रुपये रह गया। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार देश का ई-कॉमर्स बाजार वित्त वर्ष 2030 तक लगभग तीन गुना होकर 174 अरब डॉलर से 214 अरब डॉलर के बीच पहुंच सकता है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह लगभग 70 अरब डॉलर था।

इसी रिपोर्ट के अनुसार उद्योग के सकल व्यापारिक मूल्य (जीएमवी) में फ्लिपकार्ट की अनुमानित हिस्सेदारी 50 से 60 प्रतिशत थी और वह लगभग 22 करोड़ से 24 करोड़ उपयोगकर्ताओं के साथ मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं के मामले में बाजार में सबसे आगे रही।

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First Published - June 4, 2026 | 8:08 AM IST

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