IPO Market: वित्त वर्ष 2025-26 भारत के प्राइमरी मार्केट के लिए कई मायनों में अहम रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में कंपनियों ने शेयर बाजार में एंट्री ली, लेकिन लिस्टिंग के बाद प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। आंकड़ों के अनुसार, इस साल आए 112 मेनबोर्ड IPO में से 52 कंपनियों के शेयर अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं। यानी करीब 46 फीसदी IPO निवेशकों को अब तक निराश कर चुके हैं।
PRIME Database के विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ खास सेक्टर में गिरावट ज्यादा देखने को मिली। खासतौर पर new-age tech कंपनियां, SME जैसे मॉडल को मेनबोर्ड पर लाने वाली कंपनियां और asset-light सर्विस बिजनेस वाले शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इन सेक्टर में निवेशकों की उम्मीदें काफी ऊंची थीं, लेकिन नतीजे उतने मजबूत नहीं रहे।
कुछ कंपनियों के शेयरों में गिरावट बेहद ज्यादा रही है। Anlon Healthcare, Jaro Institute, VMS TMT, Shree Ram Twistex और Glottis जैसे शेयर अपने इश्यू प्राइस से 50 से 80 फीसदी तक नीचे आ चुके हैं। इससे साफ है कि इन IPO में निवेश करने वाले निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
इसके अलावा Gem Aromatics और सोलर सेक्टर से जुड़ी कंपनियां जैसे Solarworld Energy Solutions, Oswal Pumps, Vikram Solar और GK Energy के शेयरों में भी 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई है। सोलर सेक्टर को लेकर पहले काफी उम्मीदें थीं, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव और वैल्यूएशन को लेकर चिंताओं ने इन शेयरों पर दबाव बनाया।
Pine Labs, HDB Financial Services, Physicswallah और JSW Cement जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के बाद अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, ये शेयर अपने IPO प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं और लिस्टिंग के बाद मिले सारे शुरुआती मुनाफे भी खत्म हो चुके हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह एक बड़ा संकेत है कि अब IPO से तुरंत मुनाफा कमाने का दौर खत्म हो चुका है। पहले जहां कंपनियां अपने ब्रांड और भविष्य की संभावनाओं के दम पर ऊंचे वैल्यूएशन पर IPO ला रही थीं, वहीं अब निवेशक ज्यादा सतर्क हो गए हैं। अब वे सिर्फ नाम या ग्रोथ स्टोरी के बजाय कंपनियों की कमाई, बैलेंस शीट और बिजनेस की मजबूती को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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Raghunath Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर Sourav Choudhary के अनुसार, यह स्थिति दिखाती है कि अगर कंपनियां निवेशकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरतीं तो बाजार का रुख कितनी तेजी से बदल सकता है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कुछ समय की गिरावट नहीं है, बल्कि बाजार के सोचने और कंपनियों को आंकने के तरीके में एक बड़ा बदलाव है।
उन्होंने इस कमजोरी के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए। पहला, कई कंपनियों के IPO बहुत ऊंचे वैल्यूएशन पर लाए गए, जहां उनसे परफेक्ट प्रदर्शन की उम्मीद की गई। दूसरा, कई कंपनियों की कमाई को लेकर स्पष्टता की कमी रही। और तीसरा, कुछ कंपनियां मौजूदा कमाई के बजाय भविष्य की संभावनाओं पर ज्यादा निर्भर रहीं।
Bonanza के रिसर्च एनालिस्ट Balaji Rao Mudili का कहना है कि निवेशकों का रुख अब पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क हो गया है। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने से लोग अब सिर्फ कहानी के आधार पर निवेश नहीं कर रहे, बल्कि कंपनी की कमाई, वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं को ज्यादा गंभीरता से देख रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी सेक्टर पर रेगुलेटरी दबाव है या फिर आर्थिक हालात जैसे ब्याज दरों में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी या सेक्टर की धीमी ग्रोथ जैसी चुनौतियां सामने आती हैं, तो उसका असर उन कंपनियों पर ज्यादा पड़ता है जो इन कारकों के प्रति संवेदनशील होती हैं। ऐसे में भले ही कोई शेयर सही कीमत पर हो, फिर भी वह गिरावट का सामना कर सकता है।
हालांकि इस गिरावट के बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। एक्सपर्ट Sourav के मुताबिक, सभी गिरते हुए IPO खराब कंपनियां नहीं हैं। कई बार लिस्टिंग के समय उनकी कीमत जरूरत से ज्यादा तय हो जाती है, जिसकी वजह से बाद में उनमें करेक्शन आता है।
उनका मानना है कि चुनिंदा सेक्टर्स में अब भी अच्छे मौके बन रहे हैं। खासतौर पर capital goods और infrastructure से जुड़ी कंपनियां, manufacturing आधारित बिजनेस और मजबूत order book वाली कंपनियां भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। operating leverage वाली कंपनियों में भी ग्रोथ की संभावना बनी हुई है।
Sourav ने उदाहरण देते हुए कहा कि Vikram Solar और Kalpataru जैसे नाम लंबे समय में सेक्टर की मजबूती का फायदा उठा सकते हैं, भले ही लिस्टिंग के बाद फिलहाल दबाव देखने को मिल रहा हो।
इस बीच IPO बाजार की रफ्तार अभी भी धीमी नहीं पड़ी है। Prime Database के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में ही 140 से ज्यादा कंपनियां करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं। वहीं वित्त वर्ष 2026 में 112 कंपनियों ने रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे।