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₹5 लाख करोड़ वैल्यूएशन वाले NSE IPO को मिली रफ्तार, अगले हफ्ते फाइल हो सकता है DRHP

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NSE IPO: यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा और इसमें नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। DRHP 15 या 16 जून को दाखिल किया जा सकता है।

Last Updated- June 14, 2026 | 11:36 AM IST
NSE
NSE ने पहली बार वर्ष 2016 में ऑफर फॉर सेल के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए थे। प्रतीकात्मक फोटो

NSE IPO Latest Update: करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE का IPO आखिरकार हकीकत बनने की ओर बढ़ता दिख रहा है। बाजार नियामक सेबी से मंजूरी मिलने के बाद एक्सचेंज अगले हफ्ते अपने ड्राफ्ट दस्तावेज (DRHP) दाखिल कर सकता है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के अनुमानित वैल्यूएशन और 1.8 लाख शेयरधारकों वाले NSE की लिस्टिंग पर निवेशकों, संस्थागत निवेशकों और पूरे बाजार की नजरें टिकी हुई हैं।

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज अगले सप्ताह सेबी (SEBI) के पास अपने प्रारंभिक दस्तावेज दाखिल कर सकता है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब 6 फरवरी को NSE के बोर्ड ने प्रस्तावित IPO को मंजूरी दी थी। इससे पहले एक्सचेंज को सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त हुआ था। यह पूरा सार्वजनिक निर्गम ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा और इसमें नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) 15 या 16 जून को दाखिल किया जा सकता है।

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LIC सबसे बड़ा शेयरधारक

NSE का शेयरधारक आधार काफी व्यापक है, जिसमें घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) NSE का सबसे बड़ा शेयरधारक है, जिसके पास एक्सचेंज की 10.72 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सहयोगी कंपनी SBI कैपिटल मार्केट्स के पास मिलाकर करीब 7.5 फीसदी हिस्सेदारी है।

विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सहायक कंपनी अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (Aranda Investments) और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) प्रमुख हिस्सेदारों में शामिल हैं। DRHP दाखिल होना NSE के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि नियामकीय मुद्दों, खासकर को-लोकेशन विवाद के कारण एक्सचेंज की लिस्टिंग योजना लगभग एक दशक से अटकी हुई थी। जनवरी में सेबी ने NSE को NOC प्रदान किया था, जिसके बाद एक्सचेंज के IPO की राह फिर से खुल गई।

सबसे बड़े IPOs में हो सकता है शामिल

प्रस्तावित IPO भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे बड़े इश्यू में शामिल हो सकता है। मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, अनलिस्टेड मार्केट में NSE का वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। फिलहाल एक्सचेंज के लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं।

NSE ने पहली बार वर्ष 2016 में ऑफर फॉर सेल के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए थे। हालांकि, कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों और को-लोकेशन मामले में उठी चिंताओं के कारण सेबी ने मंजूरी रोक दी थी। इसके बाद एक्सचेंज ने कई बार नियामक से मंजूरी की मांग की और अनुपालन तथा गवर्नेंस से जुड़े कई सुधारात्मक कदम उठाए।

IPO की तैयारी के तहत NSE ने 20 मर्चेंट बैंकरों के साथ कानूनी सलाहकारों और अन्य मध्यस्थों की नियुक्ति की है, जो इस सार्वजनिक निर्गम का प्रबंधन करेंगे।

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जनवरी में मिली बड़ी मंजूरी

जनवरी में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा था कि नियामक ने अनफेयर मार्केट एक्सेस मामले में NSE के सेटलमेंट आवेदन को “सैद्धांतिक मंजूरी” दे दी है। इसे IPO की राह में मौजूद एक बड़ी बाधा के दूर होने के रूप में देखा गया था। NSE ने जून 2025 में को-लोकेशन मामले से जुड़े विवाद के समाधान के लिए सेटलमेंट आवेदन दायर किया था। इस मामले में कुछ ब्रोकरों पर एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम तक विशेष पहुंच हासिल करने का आरोप था।

वर्षों तक चले कानूनी विवाद के बाद NSE ने 2025 में इस मामले के निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया था, ताकि वह अपनी लंबे समय से लंबित लिस्टिंग योजना को आगे बढ़ा सके।

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First Published - June 14, 2026 | 11:36 AM IST

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