छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) के सार्वजनिक निर्गमों की संख्या में मई में तेजी आई है। पिछले दो महीनों में इनमें भारी गिरावट देखी गई थी। इस क्षेत्र में यह मजबूती ऐसे समय देखने को मिली है, जब वैश्विक अनिश्चितता के कारण मुख्य आईपीओ बाजार सुस्त बना हुआ है। इस महीने लगभग 13 एसएमई की लिस्टिंग की उम्मीद है। इनमें से दो आईपीओ अभी आवेदन के लिए खुले हैं। लगभग आधा दर्जन आने की तैयारी में हैं। इसकी तुलना में अप्रैल में चार और मार्च में नौ एसएमई की लिस्टिंग हुई थीं, जिनसे क्रमशः 204 करोड़ रुपये और 387 करोड़ रुपये की कुल पूंजी जुटाई गई थी।
बाज़ार के जानकारों का कहना है कि मुख्य प्लेटफॉर्म पर आईपीओ की कमी ने छोटी कंपनियों को अपनी लिस्टिंग की योजनाओं को आगे बढ़ाने और प्राथमिक बाजार में इस कमी को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया है। अल्फा एएमसी के संस्थापक और सीईओ राजेश सिंगला ने कहा, बड़ी कंपनियों को संस्थागत भागीदारी और स्थिर बाजार के मौकों की जरूरत होती है। अभी इन दोनों में से किसी की भी गारंटी देना आसान नहीं है। एसएमई अलग तरह से काम करती हैं। उनके इश्यू का आकार छोटा होता है। निवेशकों का आधार ज्यादातर खुदरा आधारित होता है और ज्यादातर मौजूदा एसएमई आईपीओ पूरी तरह से नए इश्यू होते हैं, जिनका पैसा सीधे कारोबार के विस्तार में लगाया जाता है, न कि निवेशकों के बाहर निकलने के लिए।
विशेषज्ञों ने कहा कि एक्सचेंजों से संपर्क करने वाले एसएमई की गुणवत्ता में भी सुधार आया है। उनके सुव्यवस्थित इश्यू, साफ-सुथरे वित्तीय ब्योरे और प्राप्त राशि का विश्वसनीय उपयोग निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ा रहे हैं, भले ही व्यापक बाजार का माहौल अभी भी सतर्क बना हुआ है।
प्राइम डेटाबेस समूह के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, जहां एक ओर बड़े संस्थागत निवेशकों, जिनमें विदेशी फंड भी शामिल हैं और जो मुख्य प्लेटफॉर्म वाले आईपीओ के प्रमुख निवेशक होते हैं, का व्यवहार बाजार के रुझानों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। दूसरी ओर खुदरा और अमीर निवेशकों के साथ ऐसा नहीं है। ये निवेशक एसएमई आईपीओ के प्राथमिक निवेशक होते हैं और मुख्य रूप से लिस्टिंग से होने वाले मुनाफे के लिए निवेश करते हैं। मुख्य प्लेटफॉर्म व एसएमई सेगमेंट के बीच मांग और आपूर्ति दोनों ही पक्षों में बहुत कम समानताएं हैं। लेकिन दोनों ही सेगमेंट में जुटाई जाने वाली धनराशि के मामले में कुछ सीधा संबंध हो सकता है।
हालांकि मई में एसएमई आईपीओ की गतिविधियों में सुधार हुआ है, फिर भी यह सेगमेंट बाजार की अस्थिरता से पूरी तरह अछूता नहीं रहा है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 26 में रिकॉर्ड 255 एसएमई की लिस्टिंग हुईं जो वित्त वर्ष 25 की 235 लिस्टिंग से ज्यादा थीं। यह लगातार तीसरा साल है जब 200 से ज्यादा लिस्टिंग हुई हैं। इसकी तुलना में मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी रही हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि एसएमई प्लेटफॉर्म पिछले कुछ सालों में काफी परिपक्व हो गया है। इसमें उद्यमी, निवेशक और बिचौलियों के बीच बढ़ती जागरूकता का भी योगदान है। सोक्राडेमस कैपिटल की सह-संस्थापक और निदेशक कृतिका रूपाड़ा ने कहा, मौजूदा रुझान से पता चलता है कि प्रवर्तकों को अपने बिजनेस को संस्थागत बनाने के लिए सार्वजनिक बाजार का इस्तेमाल करने में कितना भरोसा है। कई एसएमई के लिए लिस्टिंग का मतलब सिर्फ पूंजी जुटाना ही नहीं है, बल्कि अपनी विजिबिलिटी बढ़ाना, गवर्नेंस मज़बूत करना, बिजनेस के लिए मार्केट वैल्यू बनाना और भविष्य में फंड जुटाने के नए मौके खोलना भी है।
पिछले कुछ सालों में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और स्टॉक एक्सचेंजों ने एसएमई लिस्टिंग की जांच-परख और कड़ी कर दी है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के बीच एक्सचेंजों ने भी आईपीओ की योजना बना रहे एसएमई को दी गई सैद्धांतिक मंज़ूरी की वैधता बढ़ा दी है। यह कदम सेबी द्वारा मुख्य प्लेटफॉर्म वाले निर्गमों के लिए उठाए गए ऐसे ही कदम के बाद उठाया गया है।
खांडवाला सिक्योरिटीज के कार्यकारी निदेशक प्रणव खांडवाला ने कहा, सेबी के सख्त पात्रता मानक, खास तौर पर 1 करोड़ रुपये के मुनाफे के नियम ने, असल में ऐसे परिचालकों को बाहर कर दिया है जो अचानक गायब हो जाते थे। इससे रिटेल और अमीर निवेशकों का भरोसा फिर से कायम हुआ है। नतीजतन, एनएसई इमर्ज और बीएसई एसएमई पर जुटाए गए फंड की मात्रा तेजी से बढ़ी है और यह पिछले दो महीनों के मुकाबले बेहतर रही है।