गोल्ड लोन बाजार मार्च 2022 से अब तक करीब 4 गुना बढ़ गया है और यह आवास ऋण के बाद दूसरा बड़ा खुदरा ऋण बन गया है, वहीं कर्जदारों के बढ़ते ऋण और बार बार उधार लेने के व्यवहार से गोल्ड लोन में चूक का जोखिम बढ़ रहा है। इसकी वजह से विश्लेषकों का कहना है कि इस पोर्टफोलियो पर रिजर्व बैंक को अधिक निगरानी करने की जरूरत है।
ट्रांसयूनियन सिबिल की एक रिपोर्ट के अनुसार जून 2025 को समाप्त 6 महीनों में गोल्ड लोन के मामले में कुल मिलाकर चूक दर 1.1 प्रतिशत थी। अगर 6 महीने के दौरान 60 दिन से अधिक समय तक कर्ज का भुगतान नहीं किया जाता है तो उसे चूक माना जाता है। लेकिन जिन कर्जदारों की मूल राशि के बाद गोल्ड लोन की बकाया राशि 2.5 लाख रुपये से अधिक थी, उनमें 1.5 प्रतिशत की चूक दर रही, जो 0.7 प्रतिशत वाले कम जोखिम वाले कर्जदारों की तुलना में लगभग 2.2 गुना अधिक है। वहीं 5 लोन वाले कर्जदारों के मामले में चूक दर 1.9 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जिन कर्जदारों का चूक करने का इतिहास रहा है और बाद में उन्होंने गोल्ड लोन लिया है, वह औपचारिक ऋण व्यवस्था में तुलनात्मक रूप से ज्यादा जोखिम में हैं। उनकी क्रेडिट एक्सेस क्लोजर रेट चूक न करने वाले कर्जदारों की तुलना में 1.6 गुना ज्यादा थी। इससे पता चलता है कि दबाव झेल रहे कर्जदारों के लिए गोल्ड लोन आखिरी सहारा बन रहा है। मैक्वेरी के सुरेश गणेशन के अनुसार बड़े आकार के गोल्ड लोन के साथ-साथ कई अन्य कर्ज लिए हुए कर्जदारों के गोल्ड लोन की चूक दरें (गोल्ड लोन सेगमेंट में) अधिक हैं। 50,000 से 200,000 रुपये के बीच के लोन में चूक की दर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ दबाव बन रहा है, लेकिन कुल मिलाकर चूक की दर अभी कम है और गोल्ड लोन बुक में नुकसान की दर अभी कम है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ऋण वृद्धि को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, जो इस समय दूसरा सबसे बड़ा खुदरा ऋण बन गया है।
मैक्वेरी रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि रिजर्व बैंक गोल्ड लोन के संबंध में अधिक सतर्क रहेगा। कई नियामक बदलाव हुए हैं, लेकिन अगर यह वृद्धि तेज बनी रहती है तो हमारे हिसाब से प्रतिबंधों का नया दौर शुरू हो सकता है।’