भारतीय परिवारों में सोना यानी गोल्ड को सिर्फ एक आभूषण या जेवर नहीं माना जाता, बल्कि इसे सुख-दुख के सबसे सच्चे साथी के रूप में देखा जाता है। हर छोटे-बड़े त्योहार, शादी-ब्याह या किसी भी शुभ मौके पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों के परंपरा का हिस्सा रहा है। यही वजह है कि देश के लगभग हर घर में थोड़ा-बहुत या भारी मात्रा में सोना जरूर मिल जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कानून की नजर में आप अपने घर की तिजोरी में कितना सोना रख सकते हैं? क्या घर में बहुत ज्यादा सोना रखने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके घर का दरवाजा खटखटा सकता है? आम लोगों के बीच अक्सर इस बात को लेकर कई तरह के भ्रम और डर बने रहते हैं।
CA फर्म ‘S D Singh & Associates’ के फाउंडर CA सूरज सिंह बताते हैं कि सबसे पहली और सबसे जरूरी बात जो हर किसी को राहत देती है, वह यह है कि भारतीय कानून के मुताबिक घर में सोना रखने की कोई अधिकतम सीमा यानी मैक्सिमम लिमिट तय नहीं की गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से अपने पास कितनी भी मात्रा में या कितने भी वजन का सोना रख सकता है। कानून आपको अपने घर में ढेर सारा सोना रखने से भी नहीं रोकता।
सूरज आगे कहतें हैं कि लेकिन, इसमें एक बहुत बड़ा पेंच है। आप जितना भी सोना अपने पास रख रहे हैं, उसे खरीदने या हासिल करने का जरिया (सोर्स) पूरी तरह साफ होना चाहिए। अगर कभी इनकम टैक्स अथॉरिटी या कोई अन्य सरकारी एजेंसी आपसे पूछताछ करती है, तो आपको संतोषजनक ढंग से यह समझाना होगा कि वह सोना आपके पास कहां से आया। अगर आप सोने का जायज सोर्स और अपनी कमाई का जरिया साबित कर देते हैं, तो आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है।
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अब बात करते हैं उस नियम की, जिसे लेकर लोग सबसे ज्यादा उलझन में रहते हैं। जब भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट किसी संदिग्ध मामले में ‘सर्च एंड सीजर’ (यानी खोज और जब्ती) की कार्रवाई करता है, तो टैक्स अधिकारियों को CBDT (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज) के एक खास निर्देश को मानना पड़ता है। यह निर्देश 11 मई 1994 को जारी किया गया था, जिसे ‘CBDT इंस्ट्रक्शन नंबर 1916’ कहा जाता है।
इस नियम के तहत टैक्स अधिकारियों को साफ हिदायत दी गई है कि छापेमारी के दौरान घरों में मिलने वाले जेवरों को एक तय सीमा तक बिल्कुल न जब्त किया जाए। यह सीमा परिवार के सदस्यों के हिसाब से कुछ इस तरह तय की गई है:
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यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि यह लिमिट केवल ‘जब्त न करने’ के लिए है, न कि सोना रखने की कानूनी सीमा। इसका मतलब यह नहीं है कि इस लिमिट से ज्यादा सोना रखना गैर-कानूनी है या वह आपकी अघोषित कमाई बन जाता है। देश की अदालतों ने भी समय-समय पर यह माना है कि भारतीय परिवारों, खासकर महिलाओं के पास पारंपरिक रूप से काफी जेवर होते हैं।
इसके अलावा, अगर परिवार की सामाजिक स्थिति, समाज के रीति-रिवाज या अन्य खास परिस्थितियां इजाजत देती हैं, तो जांच अधिकारी इस लिमिट से ज्यादा सोने को भी बिना जब्त किए छोड़ने का फैसला ले सकते हैं। हालांकि, उन्हें इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देनी होती है।
सूरज कहते हैं कि अगर आपके पास CBDT की तय सीमा से ज्यादा सोना है, तो खुद को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका यह है कि आपके पास उसके पुख्ता कागजात होने चाहिए। कागजी सबूत ही यह तय करते हैं कि आपका सोना नंबर एक का है या नंबर दो का।
सूरज के मुताबिक, अगर आपने सोना खुद बाजार से खरीदा है, तो आपके पास उसका असली बिल या इनवॉइस होना चाहिए। इसके साथ ही बैंक स्टेटमेंट या क्रेडिट-डेबिट कार्ड का स्टेटमेंट होना चाहिए, जो यह साबित करे कि आपने पेमेंट ईमानदारी से किया है। पुराने मामलों में वेल्थ टैक्स रिटर्न या आपके इनकम टैक्स रिकॉर्ड (ITR) में डिस्क्लोज किए गए एसेट्स की कॉपी भी बहुत काम आती है।
दूसरी तरफ, अगर आपको सोना पुरखों से विरासत में मिला है या परिवार से तोहफे में मिला है, तो आपके पास वसीयत (Will), गिफ्ट डीड, फैमिली सेटलमेंट के कागजात, उत्तराधिकार के रिकॉर्ड या कम से कम परिवार के सदस्यों के आपसी घोषणापत्र (एफिडेविट) होने चाहिए। ये डॉक्यूमेंट संकट के समय आपको किसी भी कानूनी झंझट से बचा सकते हैं।
घर में रखा सोना आखिर कब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रडार पर आता है, इसे समझना भी बहुत जरूरी है। सामान्य तौर पर केवल सोना रखने की वजह से कोई जांच शुरू नहीं होती। टैक्स डिपार्टमेंट की सुई तब घूमती है जब आपके घर में मिले सोने की मात्रा या उसकी कीमत आपकी घोषित आय (कमाई), आपके फाइनेंशियल प्रोफाइल या आपके सोर्स से मेल नहीं खाती। यानी, अगर किसी की कमाई सीमित है और उसके घर में करोड़ों का सोना मिलता है, तो यह संदेह पैदा करता है।
इसके अलावा, अगर किसी ने बिना बिल के बड़ी मात्रा में कैश देकर सोना खरीदा है, या बैंकिंग सिस्टम और SFT (स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस) के जरिए किसी बड़े और संदिग्ध लेनदेन की जानकारी अधिकारियों तक पहुंची है, तो जांच शुरू हो सकती है। बेनामी संपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग या टैक्स चोरी जैसे मामलों में भी सोने की खरीद और उसके स्रोत की बारीकी से जांच होती है।
आसान शब्दों में कहें तो सोना रखना गलत नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर आपको यह साफ बताना आना चाहिए कि सोना आपका है और उसे खरीदने के लिए पैसा कहां से आया।