आज के डिजिटल दौर में कर्ज या क्रेडिट इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब लोन लेना सिर्फ बड़ी खरीदारी या इमरजेंसी तक सीमित नहीं रहा। तकनीक बढ़ने के साथ क्रेडिट कार्ड, UPI ऑन क्रेडिट, क्विक लोन और बाय नाउ पे लेटर (BNPL) जैसे विकल्प लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खर्चों का आम हिस्सा बन गए हैं। जो लोग अपने खर्चों को आसानी से मैनेज करना चाहते हैं, वे इन सुविधाओं का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं।
लेकिन इस बदलते दौर में एक चीज सबसे ज्यादा अहम हो गई है, वह है आपका क्रेडिट स्कोर। नया लोन लेना हो या नया क्रेडिट कार्ड बनवाना, यह स्कोर हर बड़ी फाइनेंशियल जरूरत के पीछे चुपचाप काम करता है। अच्छा क्रेडिट स्कोर इस बात का संकेत होता है कि आपकी फाइनेंशियल साख मजबूत है। यही वजह है कि जरूरत पड़ने पर आपको आसानी से लोन या दूसरी क्रेडिट सुविधाएं मिलने में मदद मिलती है।
जब बात क्रेडिट स्कोर को मजबूत करने की आती है, तो सबसे पहली और बुनियादी आदत है समय पर बिलों और किश्तों का पेमेंट करना। ZET के CEO और को-फाउंडर मनीष शारा कहते हैं, “पेमेंट हिस्ट्री यानी आपके पुराने पेमेंट का रिकॉर्ड किसी भी क्रेडिट स्कोर का सबसे जरूरी हिस्सा होता है। इसमें आपके क्रेडिट कार्ड के बिल, लोन की EMI और दूसरे सभी क्रेडिट-लिंक्ड पेमेंट्स शामिल होते हैं। अक्सर लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन पेमेंट में होने वाली एक छोटी सी देरी या लापरवाही भी आपके क्रेडिट स्कोर पर बेहद बुरा असर डाल सकती है।”
हर महीने लगातार समय पर पेमेंट करने से एक मजबूत और भरोसेमंद क्रेडिट हिस्ट्री तैयार होती है। मनीष शारा इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक बहुत ही व्यावहारिक सुझाव देते हैं। उनके अनुसार, मैन्युअल तरीके से याद रखकर बिल चुकाने के बजाय अपने अकाउंट में ऑटो-पे (Auto-pay) मोड एक्टिव कर लेना चाहिए या फिर सिंपल रिमाइंडर सेट करने चाहिए। ऐसा करने से आखिरी वक्त की भागदौड़ से बचा जा सकता है और भूलने की गुंजाइश खत्म हो जाती है, जिससे रीपेमेंट करना आपकी एक सहज और नियमित आदत बन जाता है।
क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाए रखने की दूसरी सबसे जरूरी आदत यह है कि आप अपनी कुल क्रेडिट लिमिट को पूरी तरह इस्तेमाल करने से बचें। अपनी उपलब्ध क्रेडिट सीमा में से आप जितना खर्च करते हैं, उसे तकनीकी भाषा में क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी क्रेडिट लिमिट का बहुत ज्यादा हिस्सा लगातार इस्तेमाल करता है, तो बैंकों और लेंडिंग कंपनियों के बीच यह संदेश जाता है कि वह व्यक्ति पूरी तरह कर्ज पर निर्भर है। यह आदत क्रेडिट स्कोर में गिरावट की एक बड़ी वजह बनती है।
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क्रेडिट लिमिट का कम और समझदारी से उपयोग करना आपकी वित्तीय स्थिरता और बेहतर नियंत्रण को प्रदर्शित करता है। मनीष के मुताबिक, एक थंब रूल के तौर पर हर किसी को अपनी कुल क्रेडिट लिमिट का 30 प्रतिशत से कम ही इस्तेमाल करने की आदत डालनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, अगर आपके क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट एक लाख रुपये है, तो कोशिश करें कि आपका मासिक खर्च 30 हजार रुपये से ऊपर न जाए। यह एक छोटी सी दिखने वाली आदत आपके क्रेडिट प्रोफाइल को बैंकों की नजर में काफी सुरक्षित और मजबूत बना देती है।
एक मजबूत क्रेडिट स्कोर सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितना खर्च कर रहे हैं, बल्कि इस बात पर भी टिका होता है कि आपकी क्रेडिट प्रोफाइल कितनी स्थिर है। पुराने क्रेडिट अकाउंट्स, जिनका रीपेमेंट रिकॉर्ड बिल्कुल साफ और बेदाग रहा है, बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स का भरोसा जीतने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। इससे यह साबित होता है कि आप लंबे समय से अपने पैसों और कर्जों को मैनेज बेहद जिम्मेदारी के साथ करते आ रहे हैं।
इसके उलट, अगर आपके क्रेडिट इस्तेमाल करने के तरीके में बार-बार और अचानक बदलाव दिखता है, तो इससे आपकी पैसे संभालने की आदतों पर सवाल उठ सकते हैं। बिना किसी बड़ी वजह के पुराने क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट बंद करना, या फिर बहुत कम समय में कई नए लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करना आपको जोखिम भरा ग्राहक दिखा सकता है। आमतौर पर बैंक ऐसे लोगों को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं, जो लंबे समय तक अनुशासन और एक तय तरीके से क्रेडिट का इस्तेमाल करते हैं।
इस पूरी कवायद में यह समझना सबसे ज्यादा जरूरी है कि क्रेडिट स्कोर में सुधार कोई जादू नहीं है जो रातों-रात हो जाए। मनीष शारा स्पष्ट बताते हैं कि क्रेडिट स्कोर में बदलाव बहुत धीमी गति से होता है, क्योंकि यह आपके किसी एक शॉर्ट-टर्म एक्शन को नहीं, बल्कि लंबे समय के फाइनेंशियल बिहेवियर को ट्रैक करता है। यही वजह है कि एक बार के बड़े प्रयास के मुकाबले आपकी रोज की छोटी और लगातार बनी रहने वाली आदतें ज्यादा मायने रखती हैं।
मनीष का कहना है कि समय पर किया गया हर पेमेंट, समझदारी से इस्तेमाल की गई क्रेडिट लिमिट और लंबे समय तक बनाए रखा गया वित्तीय अनुशासन धीरे-धीरे आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत बनाता है। जब ये आदतें आपकी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन जाती हैं, तो भविष्य में घर, गाड़ी या किसी बड़े निवेश के लिए लोन लेते समय आपको ज्यादा वित्तीय परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता और फंड हासिल करना काफी आसान हो जाता है।