HUF Succession Rule: भारत में टैक्स प्लानिंग और पारिवारिक संपत्ति के प्रबंधन के लिए Hindu Undivided Family यानी HUF को लंबे समय से एक अहम वित्तीय व्यवस्था माना जाता है। खासतौर पर बिजनेस फैमिली और संयुक्त परिवारों में HUF का इस्तेमाल टैक्स बचत, संपत्ति प्रबंधन और उत्तराधिकार की योजना बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन समय के साथ HUF से जुड़े कई नियम बदल चुके हैं, जिनकी जानकारी आज भी बहुत कम लोगों को है।
सबसे ज्यादा भ्रम इस बात को लेकर रहता है कि HUF में Karta कौन बन सकता है? क्या हमेशा परिवार का सबसे बड़ा बेटा ही Karta बनता है? साथ ही, मां या पत्नी की HUF संपत्ति में क्या हिस्सेदारी होती है? इन सवालों को लेकर अक्सर परिवारों में कानूनी और वित्तीय विवाद भी देखने को मिलते हैं।
ईज़ीपे के को-फाउंडर और सीईओ शम्स तबरेज के अनुसार, HUF एक पारंपरिक व्यवस्था जरूर है, लेकिन इसमें उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकारों को लेकर कानून समय के साथ काफी विकसित हुए हैं। ऐसे में परिवारों के लिए जरूरी है कि वे नए कानूनी प्रावधानों को सही तरीके से समझें।
शम्स तबरेज बताते हैं कि पहले HUF में कर्ता (Karta) का पद परिवार के सबसे बड़े पुरुष सदस्य को दिया जाता था। लेकिन अब कानूनी स्थिति बदल चुकी है। Hindu Succession Act, 1956 में 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को भी coparcener (सह-अंशधारी, यानी परिवार की संयुक्त संपत्ति में जन्मसिद्ध अधिकार रखने वाला सदस्य) का समान अधिकार मिल गया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब परिवार का सबसे वरिष्ठ coparcener (सह-अंशधारी, यानी परिवार की संयुक्त संपत्ति में जन्मसिद्ध अधिकार रखने वाला सदस्य), चाहे वह बेटा हो या बेटी, Karta बन सकता है। यदि परिवार की सबसे बड़ी संतान बेटी है, तो वह भी HUF की Karta बनने की पात्र है। अब Karta बनने का आधार केवल पुरुष होना नहीं, बल्कि coparcenary अधिकार होना है। इस बदलाव ने HUF व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक समावेशी बना दिया है।
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HUF में मां या पत्नी की भूमिका को लेकर भी लोगों के बीच काफी भ्रम रहता है। तबरेज के अनुसार, मां HUF की सदस्य जरूर होती है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में वह coparcener (सह-अंशधारी, यानी परिवार की संयुक्त संपत्ति में जन्मसिद्ध अधिकार रखने वाला सदस्य) नहीं मानी जाती, जब तक कि वह जन्म से उस HUF का हिस्सा न रही हो।
इस वजह से मां को HUF संपत्ति में जन्मसिद्ध अधिकार नहीं मिलता, जैसा बेटा या बेटी को मिलता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मां का कोई अधिकार नहीं होता। अगर HUF संपत्ति का बंटवारा होता है या कर्ता की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार की प्रक्रिया शुरू होती है, तो मां को बराबर हिस्सेदारी मिल सकती है। वह परिवार की एक महत्वपूर्ण beneficiary मानी जाती है।
पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि HUF succession को लेकर स्पष्ट योजना बनाना बेहद जरूरी है। कई बार दस्तावेजों की कमी या कानूनी जानकारी न होने के कारण परिवारों में विवाद पैदा हो जाते हैं।
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि:
आज के समय में HUF केवल पारंपरिक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण वित्तीय और टैक्स प्लानिंग टूल बन चुका है। ऐसे में उत्तराधिकार से जुड़े नियमों की सही समझ परिवारों को भविष्य के कानूनी विवादों और वित्तीय असमंजस से बचाने में मदद कर सकती है।