ITR Filing 2026-27: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (फाइनेंशियल ईयर 2025-26) के लिए सभी तरह के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म्स को नोटिफाई कर दिया है। टैक्सपेयर्स की सहूलियत के लिए डिपार्टमेंट ने अलग-अलग तारीखों पर ये फॉर्म जारी किए हैं। ITR फॉर्म 1, 2, 3 और 4 को पहले ही 30 मार्च को नोटिफाई कर दिया गया था, जबकि हाल ही में 12 मई को ITR फॉर्म 5, 6, 7 और अपडेटेड रिटर्न के लिए इस्तेमाल होने वाले ITR-U फॉर्म को भी नोटिफाई कर दिया गया है।
ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों को कंपनियों की तरफ से फॉर्म-16 मिल चुका होगा या मिलने वाला होगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि आखिरी समय की हड़बड़ी और गलतियों से बचने के लिए टैक्सपेयर्स को वक्त रहते अपना रिटर्न फाइल कर लेना चाहिए। इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि आपको अपने लिए बिल्कुल सही ITR फॉर्म का चुनाव करना होगा। अगर आप गलत फॉर्म चुनकर रिटर्न भर देते हैं, तो टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से आपको सुधार (Correction) का नोटिस आ सकता है।
कहां से डाउनलोड करें फॉर्म?
टैक्सपेयर्स इन फॉर्म्स को डाउनलोड करने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। वहां से फॉर्म डाउनलोड करके, अपनी सही जानकारियां भरने के बाद एक JSON फाइल बनानी होती है। इसके बाद सभी आंकड़ों को अच्छे से जांचने और वेरिफाई करने के बाद इसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है।
आपके लिए कौन सा ITR फॉर्म है सही?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अलग-अलग आय वर्ग और कमाई के जरियों के हिसाब से फॉर्म तय किए हैं:
- ITR-1 (सहज): यह फॉर्म उन निवासी (Resident) भारतीय नागरिकों के लिए है, जिनकी कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपये तक है। इसमें सैलरी, एक घर (House Property) और अन्य स्रोतों (जैसे बैंक ब्याज आदि) से होने वाली आमदनी शामिल है।
- ITR-2: यह फॉर्म उन व्यक्तियों या हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है, जो ITR-1 भरने के हकदार नहीं हैं। आसान शब्दों में कहें तो जिनकी कमाई का जरिया बिजनेस या प्रोफेशन नहीं है, लेकिन उनकी आय 50 लाख से अधिक है या एक से ज्यादा घर हैं, वे इसे भर सकते हैं।
- ITR-3: यह फॉर्म उन लोगों और HUF के लिए बनाया गया है, जो किसी बिजनेस या प्रोफेशन (व्यापार या पेशा) से कमाई करते हैं और जिन्हें अपने खातों का पूरा हिसाब-किताब (Books of Accounts) रखना पड़ता है।
- ITR-4 (सुगम): इसे वो निवासी व्यक्ति, HUF या फर्में (LLP के अलावा) भर सकती हैं, जिनकी कुल कमाई 50 लाख रुपये तक है। साथ ही जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आमदनी का आकलन प्रिजम्प्टिव बेसिस (धारा 44AD, 44ADA या 44AE) के तहत किया जाता है। इसमें सैलरी, एक घर और 5,000 रुपये तक की कृषि आय वाले लोग भी शामिल हैं।
- ITR-5: इस फॉर्म का इस्तेमाल पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP), एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स (AOP), बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स (BOI) और आर्टिफिशियल जुरीडिकल पर्सन (AJP) द्वारा बिजनेस या प्रोफेशन की प्रिजम्प्टिव इनकम के लिए किया जाता है।
- ITR-6: यह फॉर्म उन कंपनियों के लिए है जो धारा 11 (धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्य) के तहत छूट का दावा नहीं करती हैं।
- ITR-7: यह फॉर्म उन व्यक्तियों और कंपनियों (जैसे ट्रस्ट, राजनीतिक दल और वैज्ञानिक अनुसंधान संघ) के लिए है जिन्हें धारा 139(4A), 139(4B), 139(4C) या 139(4D) के तहत रिटर्न भरना होता है।
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ऑनलाइन ITR फाइल करने का पूरा तरीका
अपना रिटर्न भरने बैठने से पहले कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे- पैन कार्ड, आधार की डिटेल्स, फॉर्म 16, फॉर्म 16A, फॉर्म 26AS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट), कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े सबूत (Investment Proofs) अपने पास रख लें।
- सबसे पहले इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/) पर जाएं।
- अपने पैन (PAN), पासवर्ड और कैप्चा कोड की मदद से अकाउंट में लॉग इन करें।
- होमपेज पर दिखने वाले ‘e-File’ मेन्यू में जाएं और ‘Income Tax Return’ के विकल्प को चुनें।
- अपनी कैटेगरी के हिसाब से सही ITR फॉर्म का चयन करें।
- असेसमेंट ईयर (AY) 2023-24 का चुनाव करें।
- फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को भरें, उनका मिलान करें और सबमिट कर दें।
- सबमिशन के बाद, आधार OTP या अन्य मौजूद विकल्पों का उपयोग करके अपने रिटर्न को ई-वेरिफाई जरूर करें। इसके बाद ही आपका रिटर्न अपलोड और वेरिफाई माना जाएगा।
क्या है आखिरी तारीख और लेट फाइन के नियम?
आम टैक्सपेयर्स (इंडिविजुअल्स) के लिए बिना किसी लेट फीस के ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। वहीं, जो लोग ITR फॉर्म 3 और 4 का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके लिए यह समयसीमा 31 अगस्त 2026 तक है। जो लोग किसी वजह से जुलाई की डेडलाइन चूक जाते हैं, वे 31 दिसंबर तक अपना बिलेटेड (देरी से) रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
अगर आप तय समयसीमा के बाद रिटर्न भरते हैं, तो आपकी कमाई के हिसाब से पेनाल्टी (जुर्माना) लगाई जाएगी:
- 5 लाख से अधिक आय पर: यदि टैक्सपेयर की सालाना आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो देरी से रिटर्न भरने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी होगी।
- 5 लाख या उससे कम आय पर: यदि नेट टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो देरी से ITR फाइल करने पर अधिकतम 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा।
First Published - May 18, 2026 | 7:59 PM IST
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