ITR filing AY 2026-27: असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। टैक्स डिपार्टमेंट ने कई ITR फॉर्म के लिए यूटिलिटी भी लाइव कर दी है। ऐसे में कई नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स अपना रिफंड जल्दी पाने के चक्कर में फटाफट रिटर्न फाइल करने की तैयारी में हैं। लेकिन अगर आप भी 15 जून से पहले इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की सोच रहे हैं, तो जरा ठहरिए! टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समय जल्दबाजी दिखाना आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। रफ्तार से ज्यादा जरूरी आपके रिटर्न की सटीकता है।
दरअसल, टैक्स रिफंड जल्दी पाने की चाहत में बिना सोचे-समझे फॉर्म भर देना समझदारी नहीं है। इस समय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुख्य डॉक्यूमेंट जैसे एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) और फॉर्म 26AS पूरी तरह से अपडेट नहीं हुए हैं। ऐसे में आधी-अधूरी जानकारी के साथ रिटर्न फाइल करना आपको टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस थमा सकता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जून के शुरुआती पखवाड़े (15 जून) से पहले ITR फाइल करने में काफी जोखिम हैं, जिन्हें आसानी से टाला जा सकता है। ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर संदीप भल्ला कहते हैं, “नौकरीपेशा लोगों और निवेशकों के लिए 15 जून से पहले इनकम टैक्स रिटर्न भरना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि कंपनियां, बैंक, म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकर्स और दूसरी संस्थाएं आमतौर पर मई के आखिरी हफ्ते तक TDS/TCS और बड़े वित्तीय लेनदेन (SFT) की जानकारी जमा करती हैं। इसके बाद जून के पहले दो हफ्तों में AIS, TIS और फॉर्म 26AS में ये डेटा धीरे-धीरे अपडेट होता है।”
अगर टै्सपेयर्स डेटा पूरी तरह अपडेट और स्थिर होने से पहले ही रिटर्न फाइल कर देते हैं, तो उनकी दी गई जानकारी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में फर्क आ सकता है।
एसके पाटोदिया एंड एसोसिएट्स LLP में एसोसिएट डायरेक्टर (डायरेक्ट टैक्सेस) मिहिर तन्ना कहते हैं, “अगर आप जल्दबाजी में रिटर्न भर देते हैं और बाद में सरकारी रिकॉर्ड में डेटा बदल जाता है, तो परेशानी हो सकती है। भले ही कानून में रिवाइज्ड ITR भरने की सुविधा है, लेकिन अगर टैक्स डिपार्टमेंट को लगे कि पहली रिटर्न में जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी या कुछ छुपाया गया था, तो वह रिवाइज्ड रिटर्न नहीं भी नहीं ले सकता। ऐसी स्थिति में फाइन भी लग सकता है।”
डेटा में गड़बड़ी होने पर टैक्सपेयर्स को डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस (धारा 139(9)) मिल सकता है। इसके अलावा TDS क्रेडिट रुकने या टैक्स रिफंड अटकने जैसी समस्याएं भी आ सकती हैं।
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कई टै्सपेयर्स के मन में सवाल होता है कि हर साल AIS, TIS और फॉर्म 26AS अपडेट होने में इतना वक्त क्यों लगता है। इसकी वजह पूरी तरह तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी होती है।
संदीप भल्ला बताते हैं, “31 मई तक कंपनियां और बैंक पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च का TDS रिटर्न भरने में लगे रहते हैं। वहीं म्यूचुअल फंड, रजिस्ट्रार और स्टॉक ब्रोकर्स को कैपिटल गेन और शेयर बाजार के लेनदेन का डेटा इकट्ठा कर जमा करने में भी थोड़ा समय लगता है।”
जबकि मिहिर तन्ना का कहना है कि अगर TDS रिटर्न समय पर और बिना गलती के भी फाइल किया जाए, तब भी उसे सरकारी सिस्टम यानी फॉर्म 26AS में दिखने में कम से कम 1 से 2 हफ्ते लग जाते हैं। अगर डेटा में कोई गलती हो, तो इसमें और ज्यादा समय लग सकता है।
तन्ना ने यह भी बताया कि इस साल ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2025’ के नए फ्रेमवर्क और बदले हुए ITR फॉर्म्स की वजह से बैकएंड सिस्टम में डेटा अपडेट और सिंक होने में थोड़ा अतिरिक्त समय लग रहा है।
टैक्स एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि हर किसी के लिए 15 जून से पहले रिटर्न भरना खतरनाक नहीं है, लेकिन कुछ कैटेगरी के लोगों को हर हाल में इंतजार करना चाहिए।
मिहिर तन्ना के मुताबिक, “जिन टैक्सपेयर्स की कमाई के स्रोत बहुत सीमित हैं, जैसे सिर्फ बैंक ब्याज या थोड़ा-बहुत डिविडेंड, और जिनका पूरे साल या आखिरी तिमाही में कोई TDS नहीं कटा है, वे अपने रिकॉर्ड अच्छी तरह जांचने के बाद 15 जून से पहले भी ITR फाइल कर सकते हैं।”
एक्सपर्ट के मुताबिक, भविष्य में कानूनी झंझटों और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस से बचने के लिए टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने से पहले कुछ जरूरी बातों की अच्छी तरह जांच जरूर कर लेनी चाहिए।
दोनों एक्सपर्ट्स की टैक्सपेयर्स को सलाह है कि AIS, TIS और फॉर्म 26AS सिर्फ मदद और क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिए होते हैं। इसलिए केवल इन्हीं पर भरोसा करने के बजाय टैक्सपेयर्स को अपने बैंक स्टेटमेंट, कंपनी के फॉर्म 16 और ब्रोकर के P&L स्टेटमेंट से सभी आंकड़ों का मिलान जरूर करना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर लें कि बैंक अकाउंट पहले से प्री-वैलिडेट हो, ताकि रिफंड मिलने में कोई परेशानी न आए।
कुल मिलाकर, दोनों एक्सपर्ट इस बात पर सहमत हैं कि बिना तनाव और सुरक्षित तरीके से टैक्स फाइलिंग करने के लिए 15 जून तक इंतजार करना और सभी डेटा के पूरी तरह अपडेट होने देना ज्यादा समझदारी माना जाएगा।