ITR Filing 2026: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू होते ही करदाताओं के बीच पेंशन और फैमिली पेंशन से जुड़ी जानकारी एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है। कई रिटायर्ड करदाता और उनके परिवार इन दोनों आय स्रोतों को एक जैसा मान लेते हैं, जबकि आयकर कानून में दोनों का ट्रीटमेंट अलग-अलग होता है। इस अंतर को नजरअंदाज करने से रिटर्न में गलत रिपोर्टिंग और आगे चलकर टैक्स नोटिस जैसी स्थिति बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ITR फाइलिंग के दौरान सबसे ज्यादा गलतियां इन्हीं दो आय वर्गों को लेकर होती हैं। जहां पेंशन को वेतन आय की श्रेणी में रखा जाता है, वहीं फैमिली पेंशन को अन्य स्रोतों से आय माना जाता है। यही बुनियादी अंतर आगे चलकर डिडक्शन, टैक्स कैलकुलेशन और रिपोर्टिंग नियमों को पूरी तरह बदल देता है।
इस विषय पर टैक्स विशेषज्ञों ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे ITR भरने से पहले अपनी आय की प्रकृति को सही तरह समझें और दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक मिलान करें, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या अतिरिक्त कर देनदारी से बचा जा सके।
1 Finance के टैक्स हेड पारग जैन के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली नियमित पेंशन को आयकर कानून में ‘Income from Salaries’ के तहत रखा जाता है। इसका अर्थ यह है कि पेंशन प्राप्त करने वाला व्यक्ति लगभग एक सैलरीड टैक्सपेयर की तरह माना जाता है।
उन्होंने बताया कि पेंशन पर TDS आमतौर पर पेंशन देने वाला बैंक या प्राधिकरण काटता है। इसके अलावा, पेंशनधारकों को स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ भी मिलता है। पुराने टैक्स रिजीम में यह सीमा 50,000 रुपये और नए टैक्स रिजीम (AY 2026-27) में 75,000 रुपये तक है।
पारग जैन के अनुसार, पेंशन को सही तरीके से ‘Salary Income’ में रिपोर्ट करने से करदाता सभी संबंधित छूट और लाभ का सही उपयोग कर सकते हैं।
फैमिली पेंशन की प्रकृति पेंशन से अलग होती है। यह राशि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके पति/पत्नी या कानूनी उत्तराधिकारी को दी जाती है।
पारग जैन बताते हैं कि चूंकि इसमें कोई नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं होता, इसलिए इसे ‘Income from Other Sources’ के तहत टैक्स किया जाता है। यही वर्गीकरण इसे सामान्य पेंशन से पूरी तरह अलग बनाता है।
फैमिली पेंशन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू नहीं होता, लेकिन आयकर कानून के तहत एक विशेष कटौती उपलब्ध होती है। इसके अनुसार वार्षिक फैमिली पेंशन का एक-तिहाई या 25,000 रुपये, जो भी कम हो, उसे कटौती के रूप में दावा किया जा सकता है।
फैमिली पेंशन पर आमतौर पर TDS नहीं काटा जाता, जिससे कई करदाता यह मान लेते हैं कि इस आय पर टैक्स देनदारी नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह एक बड़ी गलतफहमी है।
यदि TDS नहीं कटता है तो करदाता पर एडवांस टैक्स जमा करने की पूरी जिम्मेदारी होती है। ऐसा न करने पर ब्याज और पेनल्टी लग सकती है। AIS (Annual Information Statement) में आय दिखाई देने पर आयकर विभाग नोटिस भी जारी कर सकता है।
फैमिली पेंशन और पेंशन को गलत हेड में दिखाना ITR फाइलिंग की सबसे आम गलतियों में से एक है। यदि फैमिली पेंशन को ‘Salary Income’ में दिखा दिया जाए, तो न केवल गलत डिडक्शन का लाभ मिल सकता है बल्कि रिटर्न में मिसमैच भी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, करदाताओं को ITR-1 फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फैमिली पेंशन को ‘Income from Other Sources’ में ही रिपोर्ट किया जाए।
Ezeepay के सीनियर अकाउंटेंट आदिल मलिक का कहना है कि ITR दाखिल करते समय पेंशन और फैमिली पेंशन के बीच अंतर को समझना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि पेंशन को सामान्यतः सैलरी इनकम माना जाता है, जिससे करदाता को स्टैंडर्ड डिडक्शन सहित कई लाभ मिलते हैं। वहीं फैमिली पेंशन पूरी तरह अलग श्रेणी में आती है और इसे ‘Income from Other Sources’ के तहत रिपोर्ट किया जाता है।
आदिल मलिक के अनुसार, फैमिली पेंशन पर निर्धारित सीमा तक ही कटौती का लाभ मिलता है और यह तभी संभव है जब आय को सही तरीके से वर्गीकृत किया गया हो। गलत वर्गीकरण के कारण करदाता इस छूट से वंचित रह सकते हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि करदाताओं को Form 16, AIS, बैंक स्टेटमेंट और पेंशन स्लिप का मिलान करके ही ITR दाखिल करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके।
75 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष प्रावधान भी उपलब्ध है। यदि उनकी आय केवल पेंशन और उसी बैंक से प्राप्त ब्याज तक सीमित है, जहां पेंशन आती है, तो वे बैंक में Form 12BBA जमा कर सकते हैं।
इस स्थिति में बैंक स्वयं टैक्स की गणना और TDS कटौती करता है और ऐसे वरिष्ठ नागरिकों को अलग से ITR दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि यह सुविधा केवल पेंशन आय तक सीमित है और फैमिली पेंशन इस छूट के अंतर्गत नहीं आती।