facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

ITR Filing FY26: गलत फॉर्म भरा तो मिल सकता है नोटिस, जानें सही फॉर्म कैसे चुनें

Advertisement

नए ITR नियमों और फॉर्म चयन में हुई गलतियां टैक्स रिटर्न को डिफेक्टिव बना सकती हैं, इसलिए AIS और सही फॉर्म का मिलान जरूरी है।

Last Updated- May 25, 2026 | 5:22 PM IST
Income Tax
Representative image

ITR Filing: वित्त वर्ष 2025-26 यानी असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का सीजन शुरू हो गया है। इस दौरान करदाताओं को सलाह दी जा रही है कि वे रिटर्न फाइल करने से पहले नए ITR फॉर्म, जरूरी घोषणाओं और टैक्स व्यवस्था से जुड़े विकल्पों को ध्यान से समझ लें।

टैक्सपेयर्स को सलाह दी गई है कि वे अपने रिटर्न को दाखिल करने से पहले Form 26AS और Annual Information Statement यानी AIS में दी गई जानकारियों से अच्छी तरह मिलान कर लें। किसी भी तरह की असंगति भविष्य में समस्या खड़ी कर सकती है।

सैलरी पाने वाले कर्मचारी, फ्रीलांसर, निवेशक और कैपिटल गेन से आय अर्जित करने वाले लोगों को सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि उनके लिए कौन सा ITR फॉर्म उपयुक्त है। सही फॉर्म का चयन और पूरी जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल करने से प्रक्रिया आसान और त्रुटि रहित बन सकती है।

ITR Forms में बड़ा बदलाव

आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले करदाताओं के लिए असेसमेंट ईयर 2026-27 में अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव ITR-1 की पात्रता में देखने को मिला है। पहले यह फॉर्म उन निवासी व्यक्तियों के लिए था जिनकी आय वेतन, एक मकान संपत्ति और अन्य स्रोतों से 50 लाख रुपये तक होती थी। इसके साथ सीमित शर्तों के तहत कृषि आय और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की सुविधा दी जाती थी।

अब नए नियमों के तहत ITR-1 में करदाताओं को दो मकान संपत्तियों की जानकारी दर्ज करने की अनुमति दी गई है। इससे सरल रिटर्न फॉर्म का दायरा बढ़ गया है और करदाताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हो जाएगी।

Also Read: जल्दी रिफंड पाने के लिए 15 जून से पहले ITR भरने की सोच रहे हैं? एक्सपर्ट्स ने कहा: ठहरिए! यह बहुत रिस्की

किराए और सह-स्वामित्व की डिटेल अब अनिवार्य

नए फॉर्म में संपत्ति से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी भी मांगी गई है। इसमें सह-स्वामित्व यानी को-ओनरशिप का प्रतिशत और यदि संपत्ति किराए पर दी गई है तो किरायेदार से संबंधित जानकारी शामिल करनी होगी। इसका उद्देश्य टैक्स फाइलिंग में पारदर्शिता और सटीकता को बढ़ाना है।

व्यक्तिगत जानकारी में नया सेकेंडरी एड्रेस

ITR फॉर्म के पर्सनल इंफॉर्मेशन सेक्शन में भी बदलाव किया गया है। अब करदाताओं को सेकेंडरी एड्रेस के लिए अलग फील्ड भरना होगा। इससे करदाता की जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से रिकॉर्ड किया जा सकेगा।

कैपिटल गेन और डोनेशन नियम सख्त

कैपिटल गेन शेड्यूल को सरल बनाया गया है ताकि लागू टैक्स दरों को स्पष्ट रूप से दिखाया जा सके। वहीं डोनेशन से जुड़े नियमों को और सख्त किया गया है।

अब Schedule 80G में UPI या बैंक ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर और IFSC डिटेल देना अनिवार्य होगा। वहीं Schedule 80GGC के तहत राजनीतिक दल को दिए गए दान में पार्टी का नाम और PAN नंबर दर्ज करना जरूरी कर दिया गया है।

Nangia & Co LLP के सीनियर पार्टनर Neeraj Agarwala के अनुसार, नए ITR फॉर्म का उद्देश्य टैक्स फाइलिंग को अधिक पारदर्शी और सरल बनाना है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त विवरणों की मांग से ट्रांजैक्शन की ट्रेसबिलिटी बेहतर होगी और गलत रिपोर्टिंग की संभावना कम होगी।

AIS, TIS और Form 26AS का सही तरीके से मिलान करना क्यों जरूरी है

AIS यानी Annual Information Statement में बैंक, कंपनी, म्यूचुअल फंड, नियोक्ता और अन्य संस्थानों द्वारा टैक्स विभाग को दी गई आपकी वित्तीय जानकारी होती है। इसमें आपकी आय, निवेश और टैक्स से जुड़ी कई डिटेल्स दर्ज रहती हैं।

आजकल टैक्स सिस्टम काफी हद तक ऑटोमेटेड हो गया है, इसलिए AIS और ITR के बीच अगर कोई अंतर पाया जाता है, तो टैक्स विभाग की ओर से नोटिस या स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। जैसे कि अगर ब्याज की आय कम दिखाई गई हो, डिविडेंड इनकम छूट गई हो या प्रॉपर्टी की बिक्री की रकम में फर्क हो, तो सिस्टम उसे पकड़ लेता है।

AIS में गलतियां भी हो सकती हैं

हालांकि AIS हमेशा पूरी तरह सही नहीं होता। इसमें कई बार गलत या अधूरी जानकारी भी दर्ज हो सकती है।

आम समस्याओं में शामिल हैं:

  • ब्याज या TDS की गलत रिपोर्टिंग
  • एक ही ट्रांजैक्शन का दो बार दर्ज हो जाना
  • गलत PAN की वजह से आय का गलत व्यक्ति से जुड़ जाना
  • जानकारी अपडेट न होने की वजह से पुराना डेटा दिखना
  • Form 26AS, Form 16 या Form 16A से मेल न खाना, क्योंकि रिपोर्टिंग में देरी हो सकती है

Neeraj Agarwala के अनुसार, AIS, TIS और Form 26AS का मिलान करना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि AIS में कभी-कभी त्रुटियां या अधूरी जानकारी रह सकती है, इसलिए करदाताओं को इसे ध्यान से जांचना चाहिए और ITR भरने से पहले सभी दस्तावेजों को सही तरह से मिलान करना चाहिए।

New vs Old Tax Regime: सही विकल्प कैसे चुनें?

करदाताओं को पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से किसी एक का चुनाव वास्तविक कर गणना के आधार पर करना चाहिए, न कि अनुमान के आधार पर। दोनों व्यवस्थाओं के फायदे अलग-अलग परिस्थितियों में सामने आते हैं, इसलिए सही विकल्प व्यक्तिगत आय और निवेश पैटर्न पर निर्भर करता है।

पुरानी टैक्स व्यवस्था कब फायदेमंद है

पुरानी टैक्स व्यवस्था उन करदाताओं के लिए अधिक लाभकारी मानी जा रही है जो विभिन्न प्रकार की छूट और कटौतियों का लाभ लेते हैं। इसमें हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA जैसी छूटें शामिल हैं। जिन लोगों के पास टैक्स सेविंग निवेश और अन्य डिडक्शन अधिक हैं, उनके लिए यह व्यवस्था कुल कर बोझ को कम कर सकती है।

नई टैक्स व्यवस्था किनके लिए बेहतर

एक्सपर्ट का कहना है कि नई टैक्स व्यवस्था उन करदाताओं के लिए उपयुक्त है जिनकी आय संरचना सरल है और जिनके पास टैक्स बचत वाले निवेश कम हैं। इसमें कम स्लैब दरों के साथ मानक कटौती का लाभ मिलता है, जिससे बिना अधिक निवेश के भी कर गणना आसान हो जाती है।

बिजनेस से जुड़े करदाताओं को नई टैक्स व्यवस्था चुनते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। एक बार विकल्प चुनने के बाद कई मामलों में दोबारा पुरानी व्यवस्था में लौटने की सुविधा सीमित हो सकती है। इसलिए निर्णय लेते समय भविष्य की योजना को ध्यान में रखना जरूरी है।

ITR-1 और ITR-4 कौन भर सकता है, नियम हुए और स्पष्ट

ITR फॉर्म्स की सरल श्रेणी जारी

आयकर विभाग की ओर से जारी सरल रिटर्न फॉर्म ITR-1 (सहज) और ITR-4 (सुगम) अभी भी उपलब्ध हैं। हालांकि इनके लिए पात्रता नियम अब पहले से अधिक स्पष्ट कर दिए गए हैं। इन फॉर्म्स का उद्देश्य उन करदाताओं को राहत देना है जिनकी आय संरचना सरल होती है।

ITR-1 के लिए कौन पात्र है

ITR-1 उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी आय सीमित और सरल स्रोतों से आती है। इसमें वे करदाता शामिल हैं जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है।

इस फॉर्म का उपयोग वे लोग कर सकते हैं जिनकी आय में शामिल है

  • वेतन या पेंशन
  • अधिकतम दो घरों से आय
  • ब्याज आय
  • कृषि आय 5000 रुपये तक
  • धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ

टैक्स विशेषज्ञ Agarwala के अनुसार, यह फॉर्म केवल उन्हीं मामलों के लिए उपयुक्त है जहां आय का ढांचा सीधा और कम जटिल हो।

ITR-1 कब नहीं भर सकते

Preeti Sharma, Partner, Global Employer Services, Tax & Regulatory Services, BDO India के अनुसार कई परिस्थितियों में करदाता ITR-1 का उपयोग नहीं कर सकते।

इनमें शामिल हैं

  • कंपनी के निदेशक
  • अनलिस्टेड शेयर रखने वाले निवेशक
  • विदेश में संपत्ति या आय रखने वाले
  • विदेशी बैंक खाते में सिग्नेचर अथॉरिटी वाले
  • कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक होने पर

उन्होंने बताया कि इसके अलावा जिन लोगों को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होता है या धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये से अधिक टैक्सेबल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन है, वे भी इस फॉर्म का उपयोग नहीं कर सकते।

ITR-4 किसके लिए है

ITR-4 उन व्यक्तियों और छोटे व्यवसायियों के लिए है जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत आते हैं। इसमें वे फ्रीलांसर और प्रोफेशनल्स भी शामिल हो सकते हैं जिनकी आय निर्धारित सीमा के भीतर होती है।

टैक्स विशेषज्ञ Agarwala के मुताबिक, ITR-1 और ITR-4 दोनों ही सरल आय वाले करदाताओं के लिए बनाए गए हैं, लेकिन जैसे ही आय का स्वरूप जटिल होता है, करदाता को दूसरे फॉर्म्स की ओर जाना पड़ता है।

कब भरना होगा ITR-2 या ITR-3

विशेषज्ञों के अनुसार जिन करदाताओं की आय संरचना जटिल है, उन्हें ITR-2 या ITR-3 की ओर जाना होगा।

इन स्थितियों में ITR-2 अनिवार्य हो जाता है

  • अधिक पूंजीगत लाभ होने पर
  • विदेशी संपत्ति या विदेशी आय होने पर
  • अनलिस्टेड शेयर या कंपनी डायरेक्टर होने पर

वहीं ITR-3 उन लोगों के लिए जरूरी है जिनकी व्यवसाय या पेशे से आय प्रिजम्प्टिव सीमा से अधिक है, जिसमें फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग से होने वाली आय भी शामिल है।

वेतनभोगी करदाताओं के लिए ITR फॉर्म चुनने का सही तरीका

वेतनभोगी करदाताओं को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि वे ITR-1 फॉर्म दाखिल करने के योग्य हैं या नहीं। यह फॉर्म उन लोगों के लिए उपयुक्त होता है जिनकी आय केवल वेतन, एक आवासीय संपत्ति से किराया और सामान्य ब्याज आय तक सीमित रहती है।

यदि किसी करदाता के पास शेयर या म्यूचुअल फंड से पूंजीगत लाभ, विदेशी संपत्ति या आय, क्रिप्टो लेनदेन, ESOP से जुड़ी जानकारी, एक से अधिक घरों की संपत्ति, कंपनी में निदेशक पद या अनलिस्टेड शेयरों में निवेश जैसे स्रोत हैं, तो ऐसे मामलों में आमतौर पर ITR-2 फॉर्म दाखिल करना आवश्यक होता है।

ITR-3 कब लागू होता है

यदि किसी वेतनभोगी व्यक्ति की आय में वेतन के साथ-साथ व्यवसाय, पेशेवर सेवाएं, फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, ट्रेडिंग, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या पार्टनरशिप से आय शामिल है, तो उसे ITR-3 फॉर्म दाखिल करना होता है। सरल शब्दों में, जिन लोगों की आय में व्यापार या ट्रेडिंग जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं, उन्हें ITR-3 चुनना पड़ता है।

ITR-3 और ITR-4 के बीच चयन कैसे करें

ITR-3 और ITR-4 के बीच चयन मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि करदाता प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम (धारा 44AD, 44ADA और 44AE) का लाभ ले रहा है या नहीं। ITR-4, जिसे सुगम फॉर्म भी कहा जाता है, छोटे व्यवसायियों, फ्रीलांसरों और उन पेशेवरों के लिए होता है जिनकी आय संरचना सरल होती है और जो अनुमानित कराधान योजना अपनाते हैं तथा विस्तृत लेखा पुस्तकों का रखरखाव नहीं करते।

धारा 44ADA के अंतर्गत जिन पेशेवरों की सकल आय 75 लाख रुपये तक होती है, वे इस फॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।

विशेषज्ञ शर्मा के अनुसार, ITR-3 उन मामलों में लागू होता है जहां करदाता विस्तृत लेखा पुस्तकों का रखरखाव करते हैं, टर्नओवर अधिक होता है, अनुमानित लाभ से कम आय घोषित की जाती है, या टैक्स ऑडिट की स्थिति बनती है। इसके अलावा, जिनके पास जटिल व्यवसाय, कंसल्टेंसी, ट्रेडिंग या एक से अधिक आय स्रोत होते हैं, उन्हें ITR-3 दाखिल करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि करदाताओं को अपने टर्नओवर और आय की जटिलता को ध्यान में रखते हुए ही सही फॉर्म का चयन करना चाहिए।

गलत फॉर्म चुनने से बढ़ सकती है परेशानी

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय गलत फॉर्म का चयन करना टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी आय और वित्तीय स्थिति के अनुसार सही ITR फॉर्म नहीं भरता है, तो उसका रिटर्न “डिफेक्टिव” यानी त्रुटिपूर्ण माना जा सकता है। इससे इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किया जा सकता है।

सेक्शन 139(9) के तहत मिलती है नोटिस

ऐसे मामलों में इनकम टैक्स विभाग आयकर अधिनियम की धारा 139(9) के तहत नोटिस जारी करता है। इसके बाद करदाता को आमतौर पर 15 दिनों का समय दिया जाता है, जिसमें उसे गलतियों को सुधारकर सही ITR फॉर्म दाखिल करना होता है और पोर्टल पर जवाब देना होता है।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर Sudhakar Sethuraman के अनुसार, अगर समय पर गलती सुधार ली जाए तो रिटर्न वैध माना जाता है। लेकिन अगर तय समय सीमा में सुधार नहीं किया गया, तो रिटर्न को अमान्य माना जा सकता है, जैसे कि रिटर्न दाखिल ही नहीं किया गया हो।

पुराने फॉर्म पर निर्भर रहना सबसे बड़ी गलती

कई टैक्सपेयर्स हर साल बिना बदलाव के वही ITR फॉर्म भर देते हैं, जो उन्होंने पहले उपयोग किया था। जबकि आय, निवेश और वित्तीय स्थिति में बदलाव के अनुसार सही फॉर्म चुनना जरूरी होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कई लोग यह ध्यान नहीं रखते कि उनकी आय का स्वरूप बदल गया है, जिससे गलत फॉर्म भरने की संभावना बढ़ जाती है।

निवेश और आय के गलत वर्गीकरण से समस्या

अक्सर देखा गया है कि जिन लोगों की आय शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो, ESOP या डेरिवेटिव्स से होती है, वे गलत तरीके से ITR-1 का उपयोग कर लेते हैं। जबकि ऐसे मामलों में आमतौर पर ITR-2 या ITR-3 की जरूरत होती है।

इसी तरह, फ्रीलांसर और कंसल्टेंट कई बार अपनी कमाई को सैलरी या अन्य आय के रूप में दिखा देते हैं, जबकि इसे व्यवसाय या पेशेवर आय के रूप में ITR-3 या ITR-4 में रिपोर्ट किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञ का कहना है कि कई टैक्सपेयर्स सरल फॉर्म चुनने के चक्कर में भारतीय और विदेशी संपत्तियों से जुड़ी अनिवार्य जानकारी को भी छिपा देते हैं या दर्ज नहीं करते। यह आगे चलकर अनुपालन से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है।

Advertisement
First Published - May 25, 2026 | 5:22 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement