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ITR filing 2026: सीनियर सिटीजन इन इनकम सोर्सेज को जरूर करें डिस्क्लोज, वरना सीधे घर आएगा नोटिस!

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ITR Filing AY 2026-27: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वरिष्ठ नागरिक ITR भरते समय ब्याज, पेंशन और किराये जैसी आय न छिपाएं; नोटिस से बचने के लिए 15 जून तक AIS अपडेट का इंतजार करें

Last Updated- May 29, 2026 | 4:01 PM IST
Income Tax Return
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ITR Filing AY 2026-27: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही देश भर के टैक्सपेयर्स अपनी आमदनी और टैक्स देनदारी का हिसाब-किताब लगाने में व्यस्त हो जाते हैं। आम टैक्सपेयर्स की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए यह प्रक्रिया और भी अधिक संवेदनशील और सावधानी की मांग करती है। 

असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए ITR फाइल करते समय बुजुर्गों को अपनी आमदनी के हर छोटे-बड़े स्रोत की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देनी होगी। आज का दौर तकनीकी रूप से बेहद विकसित और डिजिटल हो चुका है, जहां टैक्स डिपार्टमेंट के पास आपके हर एक लेनदेन का पूरा लेखा-जोखा मौजूद रहता है। ऐसी स्थिति में जरा सी भी लापरवाही, अनदेखी या किसी इनकम को अनजाने में भी छिपाने की कोशिश सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के टैक्स नोटिस को बुलावा दे सकती है। 

टैक्स एक्सपर्ट्स का साफ तौर पर कहना है कि अब वह पुराना जमाना पूरी तरह बीत चुका है, जब लोग छोटी-मोटी ब्याज या डिविडेंड की आय को रिटर्न में दिखाना भूल जाते थे और डिपार्टमेंट की नजरों से बच निकलते थे। आज के समय में टैक्स डिपार्टमेंट की आधुनिक और हाईटेक प्रणालियां आपकी हर छोटी-बड़ी आर्थिक गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही हैं। बैंक अकाउंट में होने वाले लेनदेन से लेकर बड़े कैश ट्रांजैक्शन, निवेश और खरीदारी तक, लगभग हर जानकारी अब सिस्टम की निगरानी में रहती है।

फाइलिंग में कतई न दिखाएं जल्दबाजी, डिपार्टमेंट की हर जगह नजर

वरिष्ठ नागरिकों को इस साल ITR फाइल करते समय किन तकनीकी और व्यावहारिक बातों का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए और वे कौन सी आम गलतियां हैं जो अक्सर उनसे अनजाने में हो जाती हैं। इस पर टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा कहती हैं, “मौजूदा दौर में लगभग हर तरह के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ऑटोमैटिक तरीके से होती है और यह सब कुछ आपके पैन (PAN) कार्ड से पूरी तरह मैप यानी लिंक होता है।”

चड्ढा आगे बताती हैं कि ऐसी सख्त और पूरी तरह डिजिटल निगरानी वाली व्यवस्था में जैसे ही आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं और उसमें किसी ऐसी आय का जिक्र नहीं करते जिसकी जानकारी टैक्स डिपार्टमेंट के पास पहले से थर्ड-पार्टी डेटा के जरिए मौजूद होती है, तो आपका ITR तुरंत मिसमैच की श्रेणी में आ जाता है। इस तरह का मिसमैच सामने आते ही टैक्सपेयर को डिपार्टमेंट की ओर से कानूनी नोटिस भेज दिया जाता है।

उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि तकनीक से लैस नए सिस्टम की वजह से अब ऐसे नोटिस महीनों बाद नहीं, बल्कि रिटर्न फाइल करने के कुछ ही दिनों के भीतर आपके पास पहुंच सकते हैं।

चड्ढा बताती हैं, “पहले लोग कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड या अलग-अलग सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज जैसी छोटी इनकम को अक्सर रिपोर्ट करना भूल जाते थे या जानबूझकर छोड़ देते थे। लेकिन अब केंद्रीय डिजिटल सिस्टम काफी मजबूत और एडवांस हो चुकी हैं, जिसके बाद ऐसी किसी भी इनकम पर टैक्स भुगतान से बचने का न तो कोई आसान रास्ता बचा है और न ही कोई शॉर्टकट।”

इसी वजह से उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को समय-सीमा से जुड़ी एक बेहद जरूरी और व्यावहारिक सलाह दी है। चड्ढा के मुताबिक, बुजुर्गों को जून की शुरुआत में ही जल्दबाजी में अपना ITR फाइल नहीं करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद बैंकों, कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को टैक्स और ट्रांजैक्शन से जुड़ा डेटा सिस्टम में अपडेट करने में कुछ समय लगता है। ऐसे में टैक्सपेयर्स के लिए कम से कम 15 जून तक इंतजार करना बेहतर माना जाता है।

दरअसल, 15 जून तक आपका AIS और फॉर्म 26AS पूरी तरह अपडेट हो जाता है, जिससे आपके द्वारा फाइल किए गए रिटर्न और टैक्स डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड के बीच किसी तरह के मिसमैच की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।

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इन सोर्सेज को भूलकर भी न करें मिस, AIS के हर आंकड़े का रखें ध्यान

अक्सर देखा जाता है कि कई वरिष्ठ नागरिक पारंपरिक सोच, याद्दाश्त से जुड़ी दिक्कतों या तकनीकी जानकारी की कमी की वजह से अपनी कुछ महत्वपूर्ण आय को टैक्स रिटर्न में दर्ज करना भूल जाते हैं।

इस पर ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट CA चांदनी आनंदन ने उन प्रमुख इनकम सोर्सेज की एक विस्तृत सूची साझा की है, जिन्हें वरिष्ठ नागरिक अक्सर अपना टैक्स रिटर्न भरते समय शामिल करना भूल जाते हैं।

आनंदन के मुताबिक, वरिष्ठ नागरिक अक्सर कई तरह की आमदनी को अपने टैक्स रिटर्न में शामिल करना भूल जाते हैं। इनमें बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाला ब्याज, सेविंग्स अकाउंट का इंटरेस्ट, पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं से होने वाली आय, पूर्व एम्प्लॉयर से मिलने वाली पेंशन, परिवार के किसी सदस्य या जीवनसाथी के निधन के बाद मिलने वाली फैमिली पेंशन, मकान या दुकान जैसी अचल संपत्ति से आने वाला किराया, कंपनियों के शेयरों पर मिलने वाला डिविडेंड और शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से होने वाला शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) शामिल हैं।

आनंदन का कहना है कि कई वरिष्ठ नागरिकों के अलग-अलग बैंकों में कई खाते होते हैं। ऐसे में उन खातों में जमा होने वाले छोटे-छोटे ब्याज क्रेडिट, रेकरिंग डिपॉजिट (RD) या बैंक के स्वीप अकाउंट्स से मिलने वाले ब्याज पर अक्सर ध्यान नहीं जाता और यही आय ITR फाइल करते समय छूट जाती है। 

उनके मुताबिक, इस तरह की गंभीर गलती से बचने का सबसे सुरक्षित और सटीक तरीका यह है कि बुजुर्ग अपने हर इनकम सोर्स का मिलान बैंक पासबुक, बैंक स्टेटमेंट, ब्याज सर्टिफिकेट, फॉर्म 16, फॉर्म 26AS और खास तौर पर AIS से जरूर करें।

इसके अलावा गौरी चड्ढा ने एक और बेहद अहम कानूनी पहलू पर जोर देते हुए कहा कि जो आय पूरी तरह टैक्स फ्री या टैक्स एक्जम्प्ट (Exempt Income) होती है, उसे भी ITR के सही कॉलम में दिखाना जरूरी है, भले ही उस पर कोई टैक्स देनदारी न बनती हो। 

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आपके AIS में जो भी वित्तीय जानकारी या आय दिखाई दे रही है, उसे टैक्स रिटर्न में शामिल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि उसे नजरअंदाज करने पर बाद में मिसमैच की स्थिति पैदा हो सकती है।

TDS कटने के बाद भी आय दिखाना और ITR भरना जरूरी

वरिष्ठ नागरिकों और आम टैक्सपेयर्स के बीच टैक्स को लेकर एक पुरानी और बड़ी गलतफहमी लंबे समय से बनी हुई है। कई लोग यह मान लेते हैं कि अगर किसी बैंक या वित्तीय संस्था ने उनकी आय पर पहले ही TDS काट लिया है, तो अब उस इनकम को ITR में अलग से दिखाने या उसकी जानकारी टैक्स डिपार्टमेंट को देने की जरूरत नहीं है।

इस गलतफहमी को पूरी तरह दूर करते हुए चांदनी आनंदन कहती हैं कि TDS कट जाने के बाद भी उस पूरी आय को ITR में दिखाना पूरी तरह अनिवार्य है। उनके मुताबिक, TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स केवल टैक्स वसूली का एक शुरुआती सिस्टम है, लेकिन इससे टैक्सपेयर्स की यह जिम्मेदारी खत्म नहीं होती कि वे अपनी मूल आय को टैक्स नियमों के तहत सही तरीके से रिपोर्ट करें। आसान शब्दों में कहें तो चाहे आपकी आय पर पहले ही टैक्स कट चुका हो, फिर भी उस इनकम को ITR में दिखाना जरूरी होता है।

आनंदन बताती हैं कि टैक्सपेयर्स को सबसे पहले अपनी हर आय को कानून के मुताबिक सही हेड (शीर्षक) के तहत ITR में घोषित करना चाहिए। इसके बाद ही फॉर्म 26AS या AIS में दिखाई दे रहे TDS का क्रेडिट अपनी टैक्स लायबिलिटी के खिलाफ क्लेम करना चाहिए।

इसी विषय को आसान और व्यावहारिक भाषा में समझाते हुए गौरी चड्ढा कहती हैं कि लोगों के बीच यह गलत धारणा बन गई है कि अगर उनकी किसी आय पर पहले ही TDS कट चुका है, तो उन्हें उस इनकम को अलग से रिपोर्ट करने या ITR फाइल करने की जरूरत नहीं है। जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है।

उनके मुताबिक, अगर आपकी किसी भी आय पर TDS कटा है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर में उस आय को रिटर्न में दिखाना और ITR फाइल करना और भी ज्यादा जरूरी और अनिवार्य हो जाता है।

उन्होंने एक और बेहद महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलू की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कई बार वरिष्ठ नागरिक इसी गलतफहमी में ITR फाइल ही नहीं करते। इसका नुकसान यह होता है कि वे उस बड़े टैक्स रिफंड (Refund) से भी वंचित रह जाते हैं, जो उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से वापस मिल सकता था।

दरअसल, कई मामलों में बुजुर्गों की कुल टैक्स देनदारी शून्य या बहुत कम होती है, जबकि उनकी आय पर पहले से TDS कट चुका होता है। ऐसे में रिटर्न फाइल करने पर वही कटा हुआ टैक्स उन्हें रिफंड के तौर पर वापस मिल सकता है।

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ग्रॉस और नेट इनकम का अंतर समझना बेहद जरूरी

ITR भरते समय वरिष्ठ नागरिक अक्सर एक और बड़ी तकनीकी गलती कर बैठते हैं। कई लोग नेट इनकम (शुद्ध आय) और ग्रॉस इनकम (कुल आय) के बीच का बुनियादी अंतर सही तरह से नहीं समझ पाते। इसी गंभीर भ्रम को दूर करने के लिए गौरी चड्ढा ने इसे एक बेहद सरल और सटीक गणितीय उदाहरण के जरिए समझाया है।

चड्ढा कहती हैं, “उदाहरण के तौर पर मान लीजिए किसी वरिष्ठ नागरिक को किसी जमा राशि या किसी काम के बदले कुल 1,00,000 रुपये मिलने हैं। अब नियमों के तहत भुगतान करने वाली संस्था इस रकम पर 10 फीसदी TDS काट लेती है। ऐसे में उनके बैंक खाते में सीधे केवल 90,000 रुपये ही जमा होंगे, जबकि बाकी 10,000 रुपये TDS के रूप में सरकार के पास उनके PAN के खिलाफ जमा कर दिए जाएंगे”

गौरी चड्ढा बताती हैं कि ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक और आम टै्सपेयर्स अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट देखकर उसमें जमा हुए 90,000 रुपये को ही अपनी वास्तविक आय मान लेते हैं और उसी रकम को ITR में दर्ज कर देते हैं। जबकि टैक्स नियमों के हिसाब से यह पूरी तरह गलत तरीका है। इस मामले में आपकी असली आय 90,000 रुपये नहीं, बल्कि पूरा 1,00,000 रुपये का ग्रॉस अमाउंट माना जाएगा। 

नियम के मुताबिक आपको अपने टैक्स रिटर्न में पूरी एक लाख रुपये की आय दिखानी होगी। इसके बाद टैक्स की अंतिम गणना करते समय सरकार के रिकॉर्ड में पहले से जमा 10,000 रुपये के TDS का क्रेडिट क्लेम किया जाता है। अगर कोई टैक्सपेयर इस गणित को सही तरह नहीं समझता और केवल नेट अमाउंट दिखाता है, तो उसे अंडर-रिपोर्टिंग का नोटिस भी मिल सकता है।

कमाई की सही कैटेगरी चुनें, गलती हो तो सुधार का भी मौका

टैक्स नियमों के तहत हर तरह की आय को एक ही तरीके से नहीं देखा जाता और न ही सभी आमदनी को एक साथ मिलाकर रिपोर्ट किया जा सकता है। उनके मुताबिक, पेंशन, फैमिली पेंशन, किराये से होने वाली आय और कैपिटल गेन्स जैसी इनकम के लिए अलग-अलग टैक्स नियम और अलग-अलग हेड तय किए गए हैं। 

आनंदन कहती हैं कि मिसाल के तौर पर, किसी टैक्सपेयर को मिलने वाली नियमित पेंशन को टैक्स नियमों में ‘सैलरी’ हेड के तहत रखा जाता है। वहीं परिवार के किसी कमाने वाले सदस्य की मृत्यु के बाद आश्रित वरिष्ठ नागरिक को मिलने वाली फैमिली पेंशन को ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ के तहत माना जाता है, जिसमें नियमों के अनुसार अलग तरह की वैधानिक कटौती (Deduction) का लाभ भी मिलता है।

 इसी तरह मकान या दुकान से मिलने वाला किराया ‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ के दायरे में आता है, जहां 30 फीसदी स्टैंडर्ड डिडक्शन समेत अन्य पात्र छूट मिलती हैं। दूसरी ओर, शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से होने वाले कैपिटल गेन्स पर टैक्स उनकी होल्डिंग अवधि और एसेट की प्रकृति के आधार पर तय किया जाता है। इसे सैलरी या पेंशन जैसी नियमित आय के साथ मिलाकर नहीं दिखाया जा सकता। यही वजह है कि ITR भरते समय हर आय का सही वर्गीकरण करना बेहद जरूरी माना जाता है।

अगर किसी वरिष्ठ नागरिक से ITR फाइल करते समय गलती से कोई आय छूट भी जाती है, तो कानून उसे सुधारने का मौका भी देता है। 

चड्ढा के मुताबिक, कोई भी टैक्सपेयर अपने ओरिजिनल रिटर्न को संबंधित असेसमेंट ईयर की 31 मार्च तक कभी भी रिवाइज (संशोधित) कर सकता है। यह रिवाइज्ड रिटर्न सिस्टम में पुराने रिटर्न की जगह ले लेता है। 

वहीं आनंदन का कहना है कि अगर समय रहते अपनी गलती का पता चल जाए, तो तुरंत रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। अगर तय समय सीमा निकल जाए और कानून इसकी अनुमति देता हो, तो अपडेटेड रिटर्न का विकल्प भी अपनाया जा सकता है, हालांकि इसमें अतिरिक्त टैक्स और ब्याज देना पड़ सकता है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक सबसे समझदारी भरा कदम यही है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से कोई औपचारिक नोटिस आने से पहले खुद ही अपनी गलती सुधार ली जाए।

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नोटिस के पचड़े से बचना है तो बरतें ये जरूरी सावधानियां

अंत में दोनों टैक्स एक्सपर्ट्स ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए कुछ बेहद जरूरी सावधानियों की एक प्रैक्टिकल चेकलिस्ट साझा की है। उनका कहना है कि अगर बुजुर्ग इन बातों का सख्ती से पालन करें, तो वे भविष्य में आने वाले टैक्स नोटिस, मिसमैच और अन्य कानूनी परेशानियों से काफी हद तक खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

गौरी चड्ढा की खास सलाह है कि ITR फाइल करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपने AIS और फॉर्म 26AS को बेहद ध्यान और धैर्य के साथ अच्छी तरह जांच लें। इसके साथ ही अपने सभी सक्रिय और बंद हो चुके बैंक खातों के स्टेटमेंट्स भी ध्यान से खंगालें, ताकि कोई ट्रांजैक्शन या इनकम एंट्री छूट न जाए। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि रिटर्न फाइल करने के बाद तय 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verify) करना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि बिना ई-वेरिफिकेशन के आपका ITR अधूरा और अमान्य माना जाता है।

आनंदन भी इस बात पर खास जोर देती हैं कि सभी वरिष्ठ नागरिक ITR फाइल करने से पहले अपने जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार और व्यवस्थित रखें। इनमें पेंशन पे ऑर्डर (PPO), रेंट एग्रीमेंट, बैंक FD और सेविंग्स अकाउंट के इंटरेस्ट सर्टिफिकेट, साथ ही ब्रोकर द्वारा जारी किए गए कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट्स जैसे दस्तावेज शामिल हैं।

उनका कहना है कि अपने द्वारा तैयार किए गए हर आंकड़े का सरकारी टैक्स रिकॉर्ड्स से मिलान करना ही किसी भी तरह के मिसमैच, नोटिस और कानूनी परेशानी से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

साफ तौर पर कहा जाए तो थोड़ी सावधानी, सही वित्तीय समझ और एक्सपर्ट्स की इन अहम सलाहों का पालन करके वरिष्ठ नागरिक बिना किसी मानसिक तनाव के असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अपना टैक्स रिटर्न आसानी और सही तरीके से फाइल कर सकते हैं।

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First Published - May 29, 2026 | 4:01 PM IST

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