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सरकारी नौकरी वाले दें ध्यान! माता-पिता या सास-ससुर के लिए मेडिकल बेनिफिट्स के नियम बदले

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नए स्पष्टीकरण के अनुसार पुरुष कर्मचारी मेडिकल लाभ के लिए माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को जीवन में सिर्फ एक बार चुन सकेंगे

Last Updated- May 18, 2026 | 4:51 PM IST
health
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

CGHS Medical Benefits for Parents: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बेहद जरूरी और काम की खबर आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। इसके मुताबिक, अब पुरुष सरकारी कर्मचारियों को मेडिकल बेनिफिट्स (चिकित्सा लाभ) के लिए अपने माता-पिता या फिर सास-ससुर में से किसी एक को चुनने की आजादी होगी।

लेकिन यहां एक बड़ा पेच है। यह चुनाव पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही बार किया जा सकेगा। यानी अगर आपने एक बार फैसला ले लिया, तो उसे बाद में बदला नहीं जा सकेगा।

13 मई 2026 को जारी हुआ नया आदेश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 13 मई 2026 को एक ऑफिस मेमोरेंडम (OM) यानी कार्यालय ज्ञापन जारी किया है। इस आदेश में साफ किया गया है कि यह मेडिकल सुविधा ‘सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम’ (CGHS) और ‘सेंट्रल सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स, 1944’ दोनों के तहत आने वाले कर्मचारियों को मिलेगी। हालांकि, इसके लिए निर्भरता (dependency) और पात्रता (Eligibility) से जुड़ी शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।

मंत्रालय ने अपने आदेश में सीधे शब्दों में कहा है कि एक पुरुष सरकारी कर्मचारी को अपने माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को आश्रित (dependent) मानकर चुनने का केवल एक बार ही मौका मिलेगा।

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माता-पिता के निधन के बाद भी नहीं बदलेगा विकल्प

सरकार का यह नया स्पष्टीकरण इसलिए बहुत मायने रखता है क्योंकि इससे भविष्य में होने वाले किसी भी तरह के भ्रम या असमंजस को खत्म कर दिया गया है। कई बार कर्मचारी सोचते हैं कि माता-पिता के न रहने पर वे सास-ससुर का नाम जुड़वा सकते हैं, लेकिन सरकार ने इस पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अगर किसी कर्मचारी ने शुरुआत में अपने माता-पिता को मेडिकल सुविधा के लिए चुना है, तो बाद में वह किसी भी सूरत में सास-ससुर का नाम शामिल नहीं करवा सकता। भले ही उसके माता-पिता का निधन ही क्यों न हो जाए या परिस्थितियां कितनी भी बदल जाएं, यह विकल्प बदला नहीं जाएगा। यही नियम उल्टे तरीके से भी लागू होगा। यानी अगर किसी ने पहले सास-ससुर को चुना है, तो वह बाद में अपने माता-पिता को लिस्ट में शामिल नहीं करा पाएगा।

क्या पहले से लागू था यह नियम?

मंत्रालय ने साफ किया कि माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को चुनने की यह सुविधा कर्मचारियों को पहले से मिल रही थी। इसके लिए 26 जुलाई 2023 को एक आदेश जारी किया गया था।

इसके बाद 28 मार्च 2024 को एक और आदेश जारी करके इस सुविधा का दायरा बढ़ाया गया। इसके तहत ‘सेंट्रल सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स, 1944’ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को भी CGHS के बराबर ला खड़ा किया गया और उन्हें भी यह हक दिया गया। अब जो नया आदेश आया है, वह मुख्य रूप से इसी नियम को और ज्यादा स्पष्ट करने के लिए जारी किया गया है।

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CGHS के तहत कौन-कौन आता है ‘परिवार’ की परिभाषा में?

CGHS के नियमों के मुताबिक, ‘परिवार’ शब्द में कर्मचारी की पत्नी के अलावा उसके कई अन्य आश्रित सदस्य शामिल हो सकते हैं। इस लिस्ट में ये लोग आते हैं:

  • माता-पिता (या उनकी जगह सास-ससुर)
  • बहनें और विधवा बहनें
  • विधवा बेटियां
  • नाबालिग भाई और नाबालिग बहनें
  • कर्मचारी पर पूरी तरह निर्भर और उनके साथ रहने वाले बच्चे या सौतेले बच्चे
  • आश्रित तलाकशुदा या अलग रह रही बेटियां (और उनके नाबालिग बच्चे)

बच्चों के लिए उम्र सीमा की शर्तें:

  • बेटों के लिए: 25 साल की उम्र होने या शादी होने तक (जो भी पहले हो)।
  • बेटियों के लिए: शादी होने तक।

‘आश्रित’ होने की क्या है शर्त?

सरकार हर किसी को आश्रित नहीं मानती, इसके लिए कमाई की एक सीमा तय की गई है। CGHS नियमों के अनुसार, परिवार के उस सदस्य को आश्रित माना जाएगा जिसकी सभी स्रोतों से होने वाली मासिक आय 9,000 रुपये + महंगाई भत्ता (DA) से कम हो। इस आय में पेंशन या ग्रेच्युटी (DCRG) से मिलने वाला पैसा भी शामिल है।

हालांकि, कर्मचारी की पत्नी या पति के मामले में यह नियम लागू नहीं होता। उन्हें आय की इस शर्त से छूट दी गई है, यानी अगर वे फैमिली पेंशन भी पा रहे हैं, तब भी वे मेडिकल सुविधा के हकदार बने रहेंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि वे इस नियम को अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाएं ताकि इसका सख्ती से पालन किया जा सके।

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First Published - May 18, 2026 | 4:47 PM IST

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