विदेश से भारत लौटने वाले यात्रियों के लिए कस्टम नियमों में बड़ा बदलाव आया है। फरवरी 2026 से लागू ‘बैगेज रूल्स 2026’ पुराने 2016 के नियमों की जगह ले चुके हैं। इन नियमों का मकसद है कि यात्रियों को कुछ राहत मिले, लेकिन साथ ही चेकिंग और कंप्लायंस को और मजबूत बनाया जाए। अब गहनों की लिमिट वजन पर आधारित हो गई है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे सामान की छूट भी थोड़ी साफ-साफ हो गई है।
सबसे बड़ा बदलाव गोल्ड ज्वेलरी में आया है। पहले वैल्यू के आधार पर कैप था, जो सोने की कीमत बढ़ने-घटने से यात्रियों को परेशान करता था। अब वो वैल्यू कैप हट गया है। अब सिर्फ वजन देखा जाएगा।
महिला यात्री 40 ग्राम तक गोल्ड ज्वेलरी बिना ड्यूटी दिए ला सकती हैं। पुरुष और बाकी यात्री 20 ग्राम तक ले जा सकते हैं। यह छूट सिर्फ उन भारतीय निवासियों या भारतीय मूल के लोगों पर लागू होती है, जिन्होंने विदेश में एक साल से ज्यादा समय बिताया हो।
कस्टम अधिकारी अब गहनों की कीमत नहीं, सिर्फ उनका वजन देखेंगे, जिससे विवाद कम होने की उम्मीद है। लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी हैं। गहने सिर्फ अपने इस्तेमाल के लिए होने चाहिए, बेचने के लिए नहीं। ये सामान आपके साथ ही आना चाहिए, यानी बैगेज में होना जरूरी है। अगर तय सीमा से ज्यादा वजन हुआ, तो उस पर ड्यूटी देनी पड़ेगी।
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गोल्ड ज्वेलरी के अलावा सोने के सिक्के, बार या बुलियन इस छूट में शामिल नहीं हैं। इन्हें रेस्ट्रिक्टेड आइटम माना जाता है, इसलिए अलग से डिक्लेयर करना पड़ता है और ड्यूटी भी देनी होती है। जो लोग तय लिमिट से ज्यादा या दूसरे रूप में सोना ला रहे हैं, उनके लिए नियम अभी भी सख्त हैं।
भारतीय पासपोर्ट होल्डर या भारतीय मूल के लोग, जिन्होंने विदेश में कम से कम छह महीने बिताए हों, वे कुल 1 किलो तक सोना (ज्वेलरी समेत) ला सकते हैं, लेकिन इस पर ड्यूटी देनी होगी। 30 दिन तक की छोटी ट्रिप्स को इस छह महीने की अवधि में नहीं गिना जाता। ड्यूटी आमतौर पर विदेशी मुद्रा में चुकानी होती है और सोना आते ही डिक्लेयर करना जरूरी है।
इसे बिना साथ आए बैगेज के रूप में भी लाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए तय समयसीमा का पालन करना होता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स के नियम ज्यादा बदले नहीं हैं, लेकिन अब उन्हें ज्यादा साफ तरीके से समझाया गया है। हवाई या समुद्री रास्ते से आने वाले यात्री, विदेशी टूरिस्ट्स को छोड़कर, 75,000 रुपये तक का सामान बिना ड्यूटी के ला सकते हैं, जबकि विदेशी टूरिस्ट्स के लिए यह सीमा 25,000 रुपये है।
इस लिमिट में स्मार्टफोन, कैमरा, वॉच, दूसरे गैजेट्स और लैपटॉप शामिल हैं। 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के यात्री एक नया लैपटॉप या टैबलेट बिना ड्यूटी के ला सकते हैं, और यह 75,000 रुपये की लिमिट से अलग है। पुराने पर्सनल सामान पर कोई ड्यूटी नहीं लगती, यानी जो लैपटॉप, फोन या वॉच आप पहले अपने साथ ले गए थे और वापस ला रहे हैं, वे फ्री हैं। रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान भी ड्यूटी फ्री रहता है।
हालांकि, किसी भी विवाद से बचने के लिए पुरानी चीजों का सबूत साथ रखना बेहतर है या भारत से निकलते समय एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट बनवा लेना चाहिए।
नियमों का पालन तभी सही माना जाएगा जब आप सही तरीके से डिक्लेरेशन करें। अगर आपके पास ड्यूटी वाले सामान हैं, तो रेड चैनल का इस्तेमाल करें, और अगर आपके पास डिक्लेयर करने के लिए कुछ भी नहीं है, तो ग्रीन चैनल से गुजरें।
अगर आप कुछ भी डिक्लेयर नहीं करते हैं, तो सामान जब्त हो सकता है, ड्यूटी का तीन गुना तक जुर्माना लग सकता है, और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। अब अतिर्थी जैसे डिजिटल सिस्टम के जरिए पहले से ही डिक्लेयर करने की सुविधा भी मिल रही है, जिससे जांच प्रक्रिया आसान और तेज हो जाती है।
फायरआर्म्स, कुछ बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे टीवी और बिना अनुमति वाले बुलियन जैसे सामान पूरी तरह प्रतिबंधित या रेस्ट्रिक्टेड हैं। अगर आपके पास तय FEMA लिमिट (आमतौर पर 10,000 डॉलर या उसके बराबर) से ज्यादा करेंसी है, तो उसे डिक्लेयर करना जरूरी होता है। ट्रांसफर ऑफ रेजिडेंस वाले यात्रियों को घरेलू सामान पर ज्यादा छूट मिल सकती है।
ये नए नियम यात्रियों को कुछ राहत देते हैं, लेकिन ड्यूटी और डिक्लेरेशन को लेकर सख्ती भी बढ़ाते हैं। सोने पर अभी भी नियंत्रण बना रहेगा, और ज्यादा गैजेट्स ले जाने पर लिमिट पार हो सकती है। इसलिए सही डॉक्यूमेंटेशन और ईमानदारी से डिक्लेयर करना सबसे जरूरी है।