1 अप्रैल 2026 से रियल एस्टेट से जुड़े कुछ नए टैक्स नियम लागू हो गए हैं। इनमें बड़े बदलाव नहीं हैं, बल्कि कुछ जरूरी क्षेत्रों में साफ-साफ नियम बनाए गए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे लोगों को प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने के फैसले लेने में आसानी होगी। कैपिटल गेंस टैक्स पर कोई नया नियम नहीं आया है, इसलिए खरीदार और विक्रेता अपनी पुरानी रणनीति के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं।
प्रॉपर्टी पर कैपिटल गेंस टैक्स के नियम वैसे ही बने हुए हैं। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति बिना टैक्स के नए हिसाब-किताब के अपनी प्रॉपर्टी बेच या खरीद सकता है।
अमरावती ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन राजनी कांत मिश्रा कहते हैं, “1 अप्रैल 2026 से टैक्स का माहौल स्थिर लग रहा है, जो प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने वालों के लिए अच्छी खबर है। कैपिटल गेंस में कोई बड़ा बदलाव न होने से लोग अपनी सुविधा के हिसाब से फैसला ले सकते हैं। उदाहरण के लिए, प्रॉपर्टी थोड़ा और होल्ड करके टैक्स को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।”
यह स्थिरता उन लोगों के लिए अच्छी है जो यह सोच रहे हैं कि अपनी प्रॉपर्टी अभी बेचें या कुछ समय बाद बेचें। क्योंकि टैक्स में कोई अचानक बदलाव नहीं है, इसलिए लोग अपने फैसले अपनी आर्थिक जरूरतों और टारगेट के हिसाब से आसानी से ले सकते हैं, न कि किसी अनिश्चितता के दबाव में।
ERA ग्रुप के फाउंडर और CEO ई लक्ष्मीनारायण रेड्डी भी यही कहते हैं। उनका कहना है कि 1 अप्रैल 2026 से बड़े बदलावों के बजाय अब नियम ज्यादा साफ हो गए हैं, जो रियल एस्टेट मार्केट के लिए अच्छा संकेत है। इससे खरीदार और विक्रेता बिना किसी बदलाव की चिंता के आसानी से बेहतर प्लानिंग कर सकते हैं।
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एक बड़ा अपडेट भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। राइट टू फेयर कंपेंसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट 2013 (RFCTLARR एक्ट) के तहत मिलने वाले मुआवजे को अब कानून में साफ-साफ टैक्स फ्री बताया गया है। फाइनेंस एक्ट 2026 ने पहले की एक क्लैरिफिकेशन को अब औपचारिक रूप से कानून का हिस्सा बना दिया है।
सिरिल अमरचंद मंगलदास लॉ फर्म के पार्टनर कुणाल सवानी बताते हैं कि 1 अप्रैल 2026 से फाइनेंस एक्ट 2026 ने इस क्लैरिफिकेशन को कानून के नियमों में शामिल कर लिया है। RFCTLARR Act के तहत मिलने वाला मुआवजा अब साफ तौर पर टैक्स फ्री रहेगा और यह नियम टैक्स ईयर 2026-27 से लागू होगा।
जिन किसानों या जमीन मालिकों की जमीन सरकार लेती है, उनके लिए अब स्थिति साफ हो गई है। राजनी कांत मिश्रा का कहना है कि इससे जमीन मालिकों को सही और उचित मुआवजा मिलने में मदद मिलेगी और प्रक्रिया के नियम भी ज्यादा स्पष्ट रहेंगे। वहीं ई लक्ष्मीनारायण रेड्डी मानते हैं कि इस छूट से लेन-देन और भी आसान हो जाएंगे।
ज्यादातर नियम 1 अप्रैल से लागू हो चुके हैं, लेकिन NRI से प्रॉपर्टी खरीदने वालों को एक बड़ी राहत अक्टूबर से मिलेगी। 1 अक्टूबर 2026 से रेजिडेंट खरीदारों को कुछ कम औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
अभी तक NRI विक्रेता से प्रॉपर्टी खरीदते समय खरीदार को टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन अकाउंट नंबर (TAN) लेना पड़ता था, ताकि सोर्स पर टैक्स कटौती (TDS) की जा सके। अब यह जरूरत खत्म हो जाएगी।
कुणाल सवानी समझाते हैं, “रेजिडेंट भारतीय और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) NRI विक्रेता से प्रॉपर्टी खरीदते समय अब सिर्फ अपने PAN नंबर का इस्तेमाल करके TDS काट और जमा कर सकेंगे। 1 अक्टूबर 2026 से TAN लेने की जरूरत नहीं रहेगी।”
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इससे विदेशी लेन-देन आसान हो जाएंगे। राजनी कांत मिश्रा का कहना है, “NRI डील्स में TAN की जरूरत खत्म होने से खरीदारों के लिए कागजी कार्रवाई और देरी दोनों कम हो जाएंगी।” वहीं ई लक्ष्मीनारायण रेड्डी भी मानते हैं कि इस सरल प्रक्रिया से लेन-देन और भी आसान होंगे।
घर खरीदने वालों, खासकर पहली बार घर लेने वालों के लिए होम लोन से जुड़े टैक्स नियम पहले जैसे ही बने हुए हैं। नए टैक्स सिस्टम में भी निर्माणाधीन प्रॉपर्टी पर ब्याज को कब्जा मिलने के बाद पांच बराबर किस्तों में क्लेम करने की सुविधा जारी है।
एकोर्ड ज्यूरिस लॉ फर्म के मैनेजिंग पार्टनर आलय रजवी के अनुसार, यह व्यवस्था लंबी समय की टैक्स प्लानिंग में मदद करती है। राजनी कांत मिश्रा का कहना है कि पहली बार घर खरीदने वालों के लिए होम लोन पर मिलने वाले मौजूदा टैक्स लाभ कुल लागत को कम करने में बड़ा फर्क डालते हैं। वहीं ई लक्ष्मीनारायण रेड्डी कहते हैं कि इन कटौतियों से घर खरीदना और ज्यादा आसान हो जाता है।
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1 अप्रैल से लागू हुए बदलाव दिखाते हैं कि सरकार का ध्यान स्थिरता और नियमों का पालन आसान बनाने पर है, न कि नई टैक्स छूट देने पर। आलय रजवी कहते हैं, “फोकस कानून को सरल बनाने और नीति में निरंतरता बनाए रखने पर है। इससे लोग शॉर्ट टर्म टैक्स बचत के बजाय लंबे समय के फाइनेंशियल प्लानिंग पर ध्यान दे सकते हैं।”
राजनी कांत मिश्रा का कहना है, “ये बदलाव पूरी प्रक्रिया को आसान बनाते हैं और लोगों को अपने प्रॉपर्टी फैसलों पर आगे बढ़ने का भरोसा देते हैं।” वहीं ई लक्ष्मीनारायण रेड्डी भी मानते हैं कि यह फ्रेमवर्क लोगों का भरोसा बढ़ाता है और लंबे समय के फैसले लेने में मदद करता है।
जल्दबाजी न करें: कैपिटल गेंस के नियम पहले जैसे ही हैं, इसलिए आप अपनी सुविधा के अनुसार सही समय चुन सकते हैं।
जमीन मालिकों के लिए साफ नियम: अनिवार्य अधिग्रहण पर मिलने वाला मुआवजा अब साफ तौर पर टैक्स फ्री है।
NRI डील्स आसान होंगी: अक्टूबर से अनुपालन से जुड़ा बोझ कम हो जाएगा।
खरीदारों के लिए स्थिर लाभ: होम लोन से जुड़े टैक्स फायदे पहले की तरह ही बने रहेंगे।
नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ रियल एस्टेट टैक्स सिस्टम में बड़े बदलावों से ज्यादा स्थिरता और स्पष्टता आई है। इससे आम लोगों को अपने अगले प्रॉपर्टी फैसलों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।