Digital Gold Investment Tips: सोने में निवेश और कारोबार को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने एक बड़ा कदम उठाया गया है। NSE ने सोमवार, 18 मई से इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) सेगमेंट में लाइव ट्रेडिंग शुरू कर दी है। एक्सचेंज के मुताबिक, 16 मई को इस सिस्टम का सफल मॉक ट्रेडिंग सेशन यानी टेस्ट रन किया गया था, जिसके बाद अब इसे आधिकारिक तौर पर लाइव कर दिया गया है। माना जा रहा है कि यह शुरुआत देश के सर्राफा बाजार को डिजिटल और संगठित बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
NSE की इस पहल को बाजार से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और सर्राफा कारोबार से जुड़े लोग भी इसे एक अहम कदम मान रहे हैं। फिलहाल सोने को सुरक्षित रखने और उसकी डिलीवरी के लिए अहमदाबाद और मुंबई में वॉल्टिंग और कलेक्शन सेंटर काम कर रहे हैं।
वहीं, सोमवार से दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे चार बड़े शहरों में भी वॉल्टिंग और कलेक्शन सेंटर शुरू कर दिए गए हैं। NSE का कहना है कि इस नेटवर्क का विस्तार धीरे-धीरे आगे भी जारी रहेगा और आने वाले समय में देशभर के करीब 120 केंद्रों को इससे जोड़ने की योजना है।
आसान शब्दों में समझें तो इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR, असली सोने की एक डिजिटल रसीद की तरह काम करता है। यानी आप जितना EGR खरीदते हैं, उसके बदले उतनी ही मात्रा का शुद्ध और प्रमाणित सोना सुरक्षित तरीके से वॉल्ट में रखा जाता है। यह पूरा सिस्टम सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की निगरानी में चलता है, इसलिए इसमें पारदर्शिता और सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है। जिस तरह शेयर बाजार में किसी कंपनी के शेयर खरीदने पर वे आपके डीमैट अकाउंट में दिखाई देते हैं, ठीक उसी तरह EGR भी सीधे आपके डीमैट अकाउंट में जमा हो जाता है। यानी बिना घर पर सोना रखे भी आपके पास डिजिटल तरीके से सोने की ओनरशिप रहती है।
इस पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी भरोसेमंद व्यवस्था है। आपके डीमैट अकाउंट में दिखाई देने वाले डिजिटल गोल्ड के पीछे उतनी ही मात्रा में असली और प्रमाणित सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है। यह सोना तय मानकों के मुताबिक स्टोर किया जाता है और इन वॉल्ट्स का संचालन लाइसेंस वाले वॉल्ट मैनेजर्स करते हैं। पूरी प्रक्रिया में स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटरी जैसी संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, जिससे सिस्टम ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनता है।
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आमतौर पर लोगों को लगता है कि सोने में निवेश करने या सोने के बिस्कुट और सिक्के खरीदने के लिए काफी बड़ी रकम चाहिए होती है। लेकिन EGR फ्रेमवर्क ने इस सोच को काफी हद तक बदल दिया है। इसमें निवेश की रकम को लेकर काफी आसान रखा गया है, जिससे छोटे निवेशक भी अपनी कैपेसिटी और जरूरत के हिसाब से आसानी से इसमें निवेश कर सकते हैं। यानी अब कम पैसे के साथ भी डिजिटल तरीके से सोने में निवेश करना संभव हो गया है।
मार्केट रेगुलेटर और एक्सचेंज ने EGR को अलग-अलग डिनॉमिनेशन में उपलब्ध कराया है, ताकि हर तरह के निवेशक इसमें हिस्सा ले सकें। निवेशक अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से 1 किलोग्राम, 100 ग्राम, 10 ग्राम, 1 ग्राम और यहां तक कि सिर्फ 100 मिलीग्राम तक की इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट खरीद सकते हैं। इसकी खरीद-बिक्री भी बिल्कुल शेयर बाजार की तरह आसान रखी गई है। यानी जिस तरह आप अपने ट्रेडिंग अकाउंट से किसी कंपनी के शेयर खरीदते या बेचते हैं, उसी तरह EGR में भी ट्रेडिंग कर सकते हैं।
निवेशक अपने सामान्य ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए लाइव मार्केट में EGR को आसानी से खरीद और बेच सकते हैं, जबकि इसके पीछे मौजूद असली सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा रहेगा। एक्सचेंज के नियमों और लागू शर्तों के तहत निवेशकों को बाद में अपने डीमैट अकाउंट में मौजूद EGR को फिजिकल गोल्ड में बदलने का विकल्प भी मिल सकता है।
भारत में सोने में निवेश के कई विकल्प पहले से मौजूद हैं, लेकिन EGR को इन सबसे अलग और नया तरीका माना जा रहा है। पारंपरिक तौर पर लोग गहने, सोने के सिक्के या गोल्ड बार खरीदते हैं, जिसे फिजिकल गोल्ड में निवेश कहा जाता है। ऐसे निवेश में सोने को घर या बैंक लॉकर में सुरक्षित रखना पड़ता है। इसके अलावा गहनों में मेकिंग चार्ज जैसी अतिरिक्त लागत भी जुड़ जाती है, जिससे निवेश की कुल कीमत बढ़ जाती है।
वहीं, गोल्ड ETF ऐसे निवेश विकल्प होते हैं जो शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं और उनकी कीमत सोने के भाव से जुड़ी रहती है। इससे निवेशकों को बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का फायदा मिलता है। इसी तरह गोल्ड म्यूचुअल फंड भी सीधे सोना खरीदने के बजाय गोल्ड ETF और दूसरे गोल्ड आधारित इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं।
जहां तक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) का सवाल है, वे सरकार की गारंटी वाले बॉन्ड होते हैं, जिनमें सोने की कीमतों का फायदा और ब्याज मिलता है। लेकिन वे पूरी तरह से एक पेपर या डिजिटल एसेट होते हैं और उनके पीछे सीधे किसी वॉल्ट में आपकी रसीद के नाम पर सोना लॉक नहीं होता। EGR इन सबसे अलग इसलिए है क्योंकि यह सीधे आपके डीमैट खाते में असली सोने की मिल्कियत (ओनरशिप) देता है, जिसे आप जब चाहें फिजिकल रूप में ले सकते हैं।
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NSE का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से देश के सर्राफा बाजार को और मजबूती मिलेगी। यह पहल फिजिकल गोल्ड के कारोबार को सीधे स्टॉक एक्सचेंज के संगठित और रेगुलेटेड सिस्टम से जोड़ती है। इसका मकसद देश में सोने के कारोबार को ज्यादा पारदर्शी, व्यवस्थित और आसान बनाना है। अभी अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है, जिससे कई बार खुदरा निवेशकों और खरीदारों के लिए सही कीमत समझना मुश्किल हो जाता है।
EGR फ्रेमवर्क के जरिए देशभर के रिटेल निवेशक, ज्वैलर्स, बड़े बुलियन कारोबारी और रिफाइनरियां एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे समय के साथ सोने की कीमतों में ज्यादा पारदर्शिता और मानकीकरण आएगा, जिससे बाजार आधारित कीमत तय करने की प्रक्रिया मजबूत हो सकती है। इस रेगुलेटेड और पारदर्शी सिस्टम का बड़ा लक्ष्य भारत को वैश्विक बुलियन बाजार में मजबूत स्थिति दिलाना है, ताकि भविष्य में देश सोने की कीमत तय करने वाले प्रमुख बाजारों में अपनी पहचान बना सके।